July 21, 2026

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बांदा 20जूलाई 26* पेपर लीक, बेरोजगारी और जवाबदेही पर राष्ट्रपति के नाम डीएम को सौंपा जाएगा ज्ञापन,

बांदा 20जूलाई 26* पेपर लीक, बेरोजगारी और जवाबदेही पर राष्ट्रपति के नाम डीएम को सौंपा जाएगा ज्ञापन,

बांदा 20जूलाई 26* पेपर लीक, बेरोजगारी और जवाबदेही पर राष्ट्रपति के नाम डीएम को सौंपा जाएगा ज्ञापन,

**राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन, पेपर लीक, बेरोजगारी और भर्ती में देरी के खिलाफ युवाओं का बड़ा विरोध*

यूपीआजतक बांदा से ब्यूरो सुनैना निषाद की रिपोर्ट

*बांदा*। पेपर लीक, वर्षों से लंबित भर्तियां, बढ़ती बेरोजगारी और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे मुद्दों को लेकर बांदा के छात्र और युवाओं ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को महामहिम राष्ट्रपति के नाम जिलाधिकारी के माध्यम से ज्ञापन सौंपकर युवाओं ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो देश के करोड़ों युवाओं का भविष्य संकट में पड़ जाएगा।
ज्ञापन में कहा गया है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में देरी और रोजगार के सीमित अवसरों ने युवाओं का भरोसा कमजोर किया है। लाखों अभ्यर्थी वर्षों तक तैयारी करने के बावजूद नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं, जिससे उनमें मानसिक तनाव और निराशा बढ़ रही है।
युवाओं ने मांग की है कि लापरवाह अधिकारियों और मंत्रियों की जवाबदेही तय की जाए। जो अधिकारी या मंत्री अपने दायित्वों का सही ढंग से निर्वहन नहीं कर रहे हैं, उनके खिलाफ निष्पक्ष जांच कर कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही नीट समेत सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक पर पूरी तरह रोक लगाने और दोषियों को कड़ी सजा देने के लिए प्रभावी व्यवस्था लागू की जाए।
ज्ञापन में उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) सहित सभी भर्ती आयोगों का वार्षिक परीक्षा कैलेंडर जारी करने, परीक्षा से लेकर नियुक्ति तक की प्रक्रिया तय समय सीमा में पूरी करने तथा नई शिक्षा नीति को रोजगार और कौशल आधारित स्वरूप में लागू करने की मांग भी की गई है।
युवाओं ने कहा कि बुंदेलखंड, विशेषकर बांदा में उद्योग, स्वरोजगार और रोजगार के नए अवसर विकसित किए जाएं, ताकि क्षेत्र से पलायन रुक सके और स्थानीय युवाओं को अपने जिले में ही सम्मानजनक रोजगार मिल सके।
छात्र-युवाओं ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन पूरी तरह लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण है। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि उनकी मांगों को गंभीरता से लेते हुए राज्य और केंद्र सरकार तक पहुंचाया जाए, ताकि युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए शीघ्र ठोस निर्णय लिए जा सकें।