September 18, 2026

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बस्ती 18 सितंबर 26*बड़हर खुर्द पेट्रोल पंप कांड में कहानी पर सवाल, रकम के अंतर ने बढ़ाया रहस्य*

बस्ती 18 सितंबर 26*बड़हर खुर्द पेट्रोल पंप कांड में कहानी पर सवाल, रकम के अंतर ने बढ़ाया रहस्य*

बस्ती 18 सितंबर 26*बड़हर खुर्द पेट्रोल पंप कांड में कहानी पर सवाल, रकम के अंतर ने बढ़ाया रहस्य*

*बंधक बनाकर लूट का आरोप, पीड़ित के 46-50 हजार के दावे के मुकाबले पुलिस के मुताबिक करीब 20 हजार नकदी*

*सूरज मिश्रा, मनीष तिवारी व सत्यम तिवारी पर आरोप; दूसरी तरफ घटना को प्रायोजित बताकर फंसाने की साजिश का दावा*

*सीसीटीवी, बैंक ट्रांजेक्शन और मोबाइल लोकेशन से खुलेगा राज, निष्पक्ष जांच पर टिकी निगाहें*

संवाददाता बस्ती। बस्ती जिले के हर्रैया थाना क्षेत्र के बड़हर खुर्द गांव स्थित भारत पेट्रोल पंप पर नीरज दूबे को कथित रूप से बंधक बनाकर लूटपाट और ऑनलाइन धनराशि ट्रांसफर कराने के आरोप का मामला अब सिर्फ शिकायत तक सीमित नहीं रह गया है। घटनाक्रम में सामने आए अलग-अलग दावों और रकम को लेकर अंतर ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ शंभूपुर निवासी नीरज दूबे कैमरे के सामने अपने बैग में करीब 46 से 50 हजार रुपये होने की बात कह रहे हैं, वहीं पुलिस के मुताबिक नकदी करीब 20 हजार रुपये बताई जा रही है। यही अंतर अब पूरे प्रकरण की जांच का अहम बिंदु बन गया है।

नीरज दूबे के मुताबिक वह महराजगंज की ओर से वापस आ रहे थे। सूरज मिश्रा के बुलाने पर वह बड़हर खुर्द स्थित भारत पेट्रोल पंप पहुंचे। आरोप है कि वहां से उन्हें कार में ले जाया गया और कथित तौर पर निर्वस्त्र कर वीडियो बनाया गया। इसके बाद डराने-धमकाने का आरोप लगाते हुए कहा गया कि उनके बैंक खाते से करीब एक लाख रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर कराए गए। पीड़ित ने अपने पास मौजूद नकदी भी ले जाने का आरोप लगाया है।

घटना के बाद डरे-सहमे नीरज दूबे ने पुलिस को सूचना दी। कथित घटनास्थल हर्रैया थाना क्षेत्र से संबंधित बताया जा रहा है, जबकि सूचना छावनी पुलिस को दिए जाने की बात सामने आई है। मामले की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने घटनाक्रम की जांच शुरू की।

पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल नकदी की रकम को लेकर है। पीड़ित यदि अपने बैग में 46 से 50 हजार रुपये होने की बात कह रहे हैं और पुलिस के मुताबिक रकम करीब 20 हजार रुपये थी, तो इस अंतर की वजह क्या है? क्या नकदी वास्तव में इतनी थी, इसका कोई स्वतंत्र प्रमाण है? क्या कथित रकम की पुष्टि किसी गवाह, सीसीटीवी फुटेज, बैंक रिकॉर्ड या अन्य साक्ष्य से होती है? जांच में इन सवालों का जवाब महत्वपूर्ण होगा।

इसके साथ यह सवाल भी उठता है कि नीरज दूबे अपने साथ इतनी बड़ी रकम लेकर किस काम से जा रहे थे। उनका व्यवसाय अथवा आय का स्रोत क्या है और कथित नकदी किस उद्देश्य से उनके पास थी? इन सवालों को लेकर भी पुलिस जांच में तथ्य सामने आना जरूरी है। हालांकि किसी व्यक्ति के पास नकदी होना अपने आप में अपराध नहीं है, लेकिन कथित लूट की रकम की पुष्टि के लिए उसका स्रोत और घटनाक्रम जांच का हिस्सा बन सकता है।

मामले में दूसरी कहानी भी सामने आ रही है। आरोप लगाने वाले पक्ष के विपरीत यह दावा किया जा रहा है कि घटनाक्रम को योजनाबद्ध तरीके से तैयार कर सूरज मिश्रा, मनीष तिवारी और सत्यम तिवारी को फंसाने की कोशिश की गई। इस दावे में नीरज दूबे की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि यह पक्ष अभी आरोप और प्रत्यारोप के स्तर पर है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

ऐसे में पुलिस के सामने चुनौती सिर्फ शिकायत के आरोपों की जांच करना नहीं, बल्कि कथित साजिश के दावे की भी निष्पक्षता से पड़ताल करना है। यदि बंधक बनाने और लूट का आरोप सही है तो साक्ष्यों के आधार पर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए और यदि आरोप गलत तरीके से किसी को फंसाने के लिए लगाए गए हैं तो उसकी वास्तविकता भी जांच में सामने आनी चाहिए।

मामले की तह तक पहुंचने के लिए पेट्रोल पंप और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, बैंक खाते में हुए कथित ऑनलाइन ट्रांजेक्शन, मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल, घटनास्थल पर मौजूद लोगों के बयान और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच अहम होगी। खासकर कथित एक लाख रुपये के ऑनलाइन ट्रांसफर की बैंकिंग पुष्टि पूरे मामले की दिशा तय कर सकती है।

फिलहाल बड़हर खुर्द पेट्रोल पंप प्रकरण में आरोपों और प्रत्यारोपों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि घटना वास्तव में वैसी ही हुई जैसी शिकायत में बताई जा रही है, या फिर किसी को फंसाने के लिए घटनाक्रम को अलग रूप दिया गया? इसका जवाब आरोपों से नहीं, बल्कि पुलिस जांच में सामने आने वाले ठोस साक्ष्यों से ही मिलेगा। पीड़ित को न्याय और निर्दोष को संरक्षण—दोनों के लिए निष्पक्ष जांच जरूरी है।