May 29, 2026

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चंडीगढ़ 29 मई 2026 * यूपीआजतक न्यूज चैनल पर हरियाणा की टॉप-20 बड़ी खबरें

पूर्णिया29मई26*पूर्णिया विवि*परीक्षा परिणाम में गड़बड़ी की उच्चस्तरीय जांच हो*

पूर्णिया29मई26*पूर्णिया विवि*परीक्षा परिणाम में गड़बड़ी की उच्चस्तरीय जांच हो*

– छात्रों के मानसिक व शैक्षणिक शोषण की ओर कराया ध्यान आकृष्ट

– राज्यपाल को आवेदन देकर परीक्षा विभाग की खामियां की उजागर

*पूर्णिया, बिहार।*

पूर्णिया विश्वविद्यालय में परीक्षा परिणाम में हुई गड़बड़ियों की उच्चस्तरीय जांच की मांग को लेकर राज्यपाल को आवेदन भेजा गया है।

विश्वविद्यालय बनाओं संघर्ष समिति ने आवेदन भेज छात्रों के मानसिक व शैक्षणिक शोषण की ओर राज्यपाल सह कुलाधिपति का ध्यान आकृष्ट कराया है।

साथ ही इस मामले में विशेष सतर्कता इकाई से जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई कराने की मांग मुखर की है।

विश्वविद्यालय बनाओं संघर्ष समिति के संस्थापक *डॉ. आलोक राज* ने पूर्णिया विश्वविद्यालय में डिग्री एवं प्रमाण पत्र सत्यापन को लेकर हुए अनियमितता को लेकर कुलाधिपति सह राज्यपाल को आवेदन भेजकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।

आवेदन में आरोप लगाया गया है कि विश्वविद्यालय से उत्तीर्ण छात्रों के प्रमाण पत्र जब विभिन्न विभागों द्वारा सत्यापन हेतु विश्वविद्यालय भेजे जा रहे हैं,

तब विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा कई प्रमाण पत्रों को यह कहकर संदिग्ध अथवा अवैध बताया जा रहा है कि टीआर में अंक परिवर्तन वाले स्थान पर टेबुलेटर के हस्ताक्षर नहीं हैं।

डॉ. आलोक राज ने कहा है कि जिन छात्रों को विश्वविद्यालय द्वारा अंकपत्र एवं प्रमाण पत्र निर्गत किए गए हैं, उन पर विश्वविद्यालय के सक्षम पदाधिकारियों के हस्ताक्षर मौजूद हैं।

इन्हीं प्रमाण पत्रों के आधार पर अनेक छात्र नौकरी कर रहे हैं तथा उच्च शिक्षा भी प्राप्त कर चुके हैं।

ऐसे में वर्षों बाद छात्रों के परीक्षा परिणाम को अवैध बताना छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।

डॉ. आलोक राज ने आरोप लगाया कि यदि टीआर में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है, तो इसकी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन एवं परीक्षा विभाग की बनती है।

छात्रों द्वारा स्वयं टीआर में अंक परिवर्तन किया जाना संभव नहीं है।

साथ ही, जिन मामलों में अंक संशोधन हुए, उनसे संबंधित संशोधन पत्र भी विश्वविद्यालय द्वारा महाविद्यालयों को जारी किए गए थे।

आवेदन में यह भी कहा गया है कि केवल टेबुलेटर के हस्ताक्षर नहीं होने के आधार पर छात्रों की डिग्री को फर्जी या अवैध घोषित करना न तो न्यायोचित है और न ही विधिसम्मत।

इससे छात्रों का मानसिक शोषण हो रहा।

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