August 19, 2026

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पूर्णिया बिहार19मई26 *कसबा में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के साथ धोखा

पूर्णिया बिहार19मई26 *कसबा में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के साथ धोखा

पूर्णिया बिहार19मई26 *कसबा में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के साथ धोखा, आवंटित दुकानों पर दबंगों का कब्ज़ा*

मोहम्मद इरफान कामिल यूपीआजतकन्यूज़ चैनल पूर्णिया डीवीजन बिहार

पूर्णिया*प्रखंड परिसर में महिलाओं के लिए बने 4 कमरों पर असामाजिक तत्वों का कब्जा, खुद का कारोबार कर रहे_
_4 महिलाओं के नाम से हुआ है एग्रीमेंट, फिर भी दुकान चलाने से वंचित, प्रशासन से कार्रवाई की मांग_

महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की सरकारी योजना को कसबा में पलीता लगाया जा रहा है। प्रखंड परिसर में महिला स्वयं सहायता समूह के लिए आवंटित चार कमरों पर कुछ असामाजिक तत्वों ने जबरन कब्जा कर लिया है। जिन महिलाओं के नाम से दुकान का एग्रीमेंट हुआ है, उन्हें ही दुकान से बेदखल कर दिया गया है।
*पूर्णिया बिहार :* सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के तहत कसबा प्रखंड परिसर में महिला स्वयं सहायता समूह के लिए कुल चार कमरों का निर्माण कराया गया था। मकसद था कि समूह की महिलाएं खुद दुकान चलाकर आत्मनिर्भर बनें। चार महिलाओं के नाम से विधिवत एग्रीमेंट भी किया गया।

*दबंगों ने कर लिया कब्जा*
लेकिन हकीकत इससे उलट है। आरोप है कि कुछ असामाजिक तत्वों ने महिलाओं को धमका कर चारों कमरों पर जबरन कब्जा कर लिया है। अब उन कमरों में महिलाएं नहीं, बल्कि कब्जा करने वाले लोग अपना निजी कारोबार चला रहे हैं।

*महिलाओं में आक्रोश*
स्वयं सहायता समूह की पीड़ित महिलाओं का कहना है, _”ये दुकानें हमारे रोजगार के लिए बनाई गई थीं। कागज पर एग्रीमेंट भी हमारे नाम से है, लेकिन हमें दुकान तक नहीं चलाने दिया जा रहा। हम कई बार अधिकारियों से गुहार लगा चुकी हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही।_

*मामला गंभीर, प्रशासन मौन*
यह मामला बेहद गंभीर है क्योंकि यह सीधे तौर पर महिला सशक्तिकरण योजना को फेल करने जैसा है। जिन महिलाओं को सरकार मुख्यधारा से जोड़ना चाहती है, उन्हें ही दबंगों के कारण बेरोजगार बैठना पड़ रहा है।
*क्या है मांग?*
समूह की महिलाओं ने जिला प्रशासन से मांग की है कि चारों कमरों को कब्जामुक्त कराकर उन्हें सौंपा जाए, ताकि वे नियमानुसार दुकान चला सकें। महिलाओं ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे प्रखंड कार्यालय पर धरना देंगी।
फिलहाल इस मामले में प्रखंड प्रशासन की चुप्पी सवालों के घेरे में है। अब देखना होगा कि महिलाओं को न्याय कब मिलता है।

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