*पूर्णिया बिहार 31 मई 26 गरीबों के मसीहा” संजीव मिश्रा: इंसानियत की मिसाल, हर धर्म-हर वर्ग के हमदर्द*
मोहम्मद इरफान कामिल यूपी आज तक न्यूज़ चैनल पूर्णिया डीवीजन बिहार
*पूर्णिया मनोरमा गुरु के संस्थापक संजीव मिश्रा: सेवा ही धर्म, सम्मान ही कर्म*
मोहम्मद इरफान कामिल यूपी आज तक न्यूज़ चैनल पूर्णिया बीवीएन बिहार
पूर्णिया बिहार : पूर्णिया के जाने-माने समाजसेवी और मनोरमा गुरु के संस्थापक संजीव मिश्रा एक बार फिर अपनी इंसानियत और सेवा भावना के लिए चर्चा में हैं। उन्हें लोग प्यार से “गरीबों का मसीहा” और “मुसलमानों का हमदर्द” भी कहते हैं।
*सेवा ही फितरत*
संजीव मिश्रा की सबसे बड़ी खासियत है उनका सबके लिए एक जैसा भाव। उनके लिए न कोई छोटा है न बड़ा, न गरीब न अमीर, न हिंदू न मुस्लिम न ईसाई। उनका मानना है कि दुख-सुख में इंसान को इंसान का साथ देना ही सबसे बड़ा धर्म है।
वे हर किसी के दुख-सुख में हाथ बंटाते हैं। खासतौर पर गरीब बेटियों की शादी में शिरकत कर खुद आर्थिक मदद करते हैं, ताकि किसी गरीब के घर खुशियां रुकने न पाएं।
*रात को सोने से पहले दिन का लेखा-जोखा*
संजीव मिश्रा का जीवन दर्शन भी प्रेरणादायक है। उनका कहना है: “प्रतिदिन रात को बिस्तर पर सोने जाने से पहले अपना दिन भर का मूल्यांकन जरूर करें। देखें की आज मैंने क्या अच्छा किया और क्या मुझसे गलती हुई।”
उनका मानना है कि इससे वो गलती अगली बार करने की संभावना कम होगी और अच्छे किए गए कार्य से मनोबल बढ़ेगा। यही आत्म-मंथन उन्हें रोज बेहतर इंसान बनाता है।
*सम्मान सबका, सेवा सबकी*
स्थानीय लोगों का कहना है कि संजीव मिश्रा सिर्फ बोलते नहीं, करके दिखाते हैं। ईद हो या दिवाली, गरीब की बेटी की शादी हो या किसी बीमार का इलाज – वे बिना भेदभाव हर जगह पहुंचते हैं। उनके इसी स्वभाव ने उन्हें पूर्णिया में हर दिल अजीज बना दिया है।
समाजसेवा को अपना धर्म मानने वाले संजीव मिश्रा आज कई युवाओं के लिए प्रेरणा हैं कि निस्वार्थ सेवा से बड़ा कोई पुण्य नहीं।

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