October 30, 2026

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पूर्णिया बिहार 30 अक्टूबर 26 *पूर्णिया में बच्चों की सुरक्षा को लेकर चला 'सुरक्षित बचपन अभियान',

पूर्णिया बिहार 30 अक्टूबर 26 *पूर्णिया में बच्चों की सुरक्षा को लेकर चला ‘सुरक्षित बचपन अभियान’,

पूर्णिया बिहार 30 अक्टूबर 26 *पूर्णिया में बच्चों की सुरक्षा को लेकर चला ‘सुरक्षित बचपन अभियान’,

विद्या विहार में बच्चों को बताए गए अधिकार और सुरक्षा के गुर*

मोहम्मद इरफान कामिल ब्यूरो चीफ़ यूपी आज़तक न्यूज़ चैनल पूर्णिया डीवीजन बिहार

*पूर्णियां बिहार :* राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली एवं बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, पटना के निर्देश तथा प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार, पूर्णिया *श्री अनुराग* के निर्देशानुसार जिले में बच्चों की सुरक्षा को लेकर ‘सुरक्षित बचपन अभियान’ चलाया जा रहा है। यह अभियान 26 से 31 अक्टूबर 2026 तक जिले के विभिन्न विद्यालयों में चल रहा है।
इसी कड़ी में अभियान के चौथे दिन 30 अक्टूबर को विद्या विहार रेसिडेंशियल विद्यालय, परोरा, पूर्णिया में एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

*बड़े अधिकारी रहे मौजूद, बच्चों को बताए अधिकार*

कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकार, पूर्णिया के अवर न्यायाधीश-सह-सचिव *श्री सुनील कुमार*, बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष श्री सुमित प्रकाश तथा एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन के जिला समन्वयक-सह-चाइल्ड राइट एसोसिएट मोहम्मद सज्जाद आलम मौजूद रहे। इस दौरान विद्यालय की प्रधानाध्यापक एवं सभी शिक्षक-शिक्षिकाएं भी उपस्थित रहीं।
वक्ताओं ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित बचपन, शिक्षा और सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार है। उन्हें शोषण, हिंसा और दुर्व्यवहार से मुक्त वातावरण मिलना चाहिए।

*गुड टच-बैड टच और POCSO एक्ट की दी जानकारी*
अभियान के तहत विद्यार्थियों को बाल अधिकारों, व्यक्तिगत सुरक्षा, बाल यौन शोषण की रोकथाम तथा *पॉक्सो एक्ट-2012 (लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम)* के प्रावधानों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
बच्चों को सुरक्षित और असुरक्षित व्यवहार के बीच का अंतर समझाया गया, अनुचित व्यवहार की पहचान कैसे करें, अपनी बात निडर होकर कैसे रखें, इस बारे में प्रेरित किया गया। वक्ताओं ने अपील की कि किसी भी प्रकार के अनुचित व्यवहार या असुरक्षा की स्थिति में बच्चे बिना डरे अपने माता-पिता, शिक्षकों या संबंधित अधिकारियों को तुरंत बताएं और सहायता लें। अभियान का मुख्य उद्देश्य बच्चों में आत्मविश्वास जगाना और उन्हें उनके अधिकारों के प्रति जागरूक बनाना है।

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