September 26, 2026

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पूर्णिया बिहार 25 सितंबर 26 13 करोड़ वोटर्स के नाम गायब! CEC ज्ञानेश कुमार घेरे में, कांग्रेस नेता इन्तेखाब आलम ने की सुप्रीम कोर्ट जांच की मांग*

पूर्णिया बिहार 25 सितंबर 26 13 करोड़ वोटर्स के नाम गायब! CEC ज्ञानेश कुमार घेरे में, कांग्रेस नेता इन्तेखाब आलम ने की सुप्रीम कोर्ट जांच की मांग*

पूर्णिया बिहार 25 सितंबर 26 13 करोड़ वोटर्स के नाम गायब! CEC ज्ञानेश कुमार घेरे में, कांग्रेस नेता इन्तेखाब आलम ने की सुप्रीम कोर्ट जांच की मांग*

मोहम्मद इरफान कामिल यूपी आज़तक न्यूज़ चैनल पूर्णिया डिविजन बिहार

*पूर्णिया बिहार ।* देश की चुनावी व्यवस्था पर अब तक का सबसे बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। The Indian Express की सनसनीखेज जांच रिपोर्ट के बाद अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य और सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता इन्तेखाब आलम ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को सीधे कटघरे में खड़ा कर दिया है। उन्होंने 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट लिस्ट से हटाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र जांच की मांग की है।

1. आयोग के अंदर ही बगावत, दो आयुक्तों ने 14 बार जताई आपत्ति
इन्तेखाब आलम ने खुलासा करते हुए कहा कि यह मामला सिर्फ विपक्ष का आरोप नहीं है। चुनाव आयोग के दो आयुक्तों – सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार आयोग के फैसलों पर लिखित आपत्ति दर्ज कराई है। रिपोर्ट में कुछ फैसलों को तो “unauthorised” और “illegal” तक कहा गया है। जब बिहार से शुरू हुई SIR की प्रक्रिया ने 30 राज्यों में करोड़ों लोगों को प्रभावित किया है, तो अंदरूनी विरोध गंभीर चिंता का विषय है।

2. CEC ज्ञानेश कुमार दें जवाब, क्यों उठे सवाल?
कांग्रेस नेता ने सीधा सवाल उठाया कि आखिर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को बताना होगा कि अगर आयोग के सारे फैसले पारदर्शी और नियम के तहत थे, तो उनके ही दो साथी आयुक्तों ने बार-बार आपत्ति क्यों दर्ज की? मतदाता सूची से नाम हटना किसी की नागरिकता नहीं, बल्कि उसके लोकतांत्रिक अधिकार पर सीधा हमला है। यह लड़ाई किसी पार्टी के लिए नहीं, बल्कि हर भारतीय के वोट के अधिकार के लिए है।

3. सुप्रीम कोर्ट करे निगरानी, जवाबदेही से कोई न बचे
इन्तेखाब आलम ने मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट को इस पूरे मामले का स्वतः संज्ञान लेकर जांच की निगरानी करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर जांच के दौरान किसी जिम्मेदार अधिकारी के देश से बाहर जाने की आशंका हो तो कानून के तहत रोक लगाई जाए, ताकि कोई भी जवाबदेही से बच न सके। लोकतंत्र में सरकारें आती-जाती रहेंगी, लेकिन संविधान और मतदाता का अधिकार स्थायी है, इसकी रक्षा के लिए कांग्रेस का आंदोलन बिहार से बंगाल, असम, दिल्ली और महाराष्ट्र तक जारी रहेगा।

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