पूर्णिया बिहार 11 मई 26 *कलाभवन में टैगोर जयंती पर संगोष्ठी*
*कविताओं-व्याख्यान से गूंजा साहित्यिक मंच*
पूर्णिया बिहार से मोहम्मद इरफान कामिल यूपी आज तक न्यूज़ चैनल पूर्णिया डिविजन
_पूर्णिया बिहार ।_ कलाभवन साहित्य विभाग की ओर से रविवार को गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की याद में स्मृति व्याख्यान और काव्य समागम आयोजित हुआ। मासिक साहित्यिक श्रृंखला के तहत हुए इस कार्यक्रम की कमान बीएन मंडल विवि के प्रथम लोकपाल डॉ. शिवमुनि यादव ने संभाली।
साहित्य अकादमी दिल्ली से आए डॉ. देवेंद्र कुमार देवेश मुख्य मेहमान रहे। हिंदी के पूर्व विभाग प्रमुख डॉ. कामेश्वर पंकज, शिक्षाविद डॉ. प्रभात नारायण झा, प्राचार्य डॉ. शंभू लाल वर्मा कुशाग्र और अंग्रेजी विभाग की प्रमुख डॉ. उषा शरण विशेष रूप से मौजूद रहीं। कार्यक्रम की शुरुआत दीप जलाने और टैगोर के चित्र पर फूल चढ़ाने से हुई।
संयोजिका डॉ. निरुपमा राय ने गीतांजलि की शुरुआती रचना सुनाकर सबका स्वागत किया। उन्होंने बताया कि इस दिन मातृ दिवस और टैगोर जयंती का संयोग है। साथ ही टैगोर पर शोध कर चुके डॉ. देवेश और उनके शोध-निर्देशक डॉ. पंकज की मौजूदगी इस आयोजन को खास बनाती है। मातृ दिवस पर महिला रचनाकारों ने केक भी काटा।
डॉ. शिवमुनि यादव ने टैगोर को महान इंसान बताते हुए कहा कि उनकी रचनाओं में इंसानियत, प्रकृति और नारी-चेतना एक साथ मिलती है। गीतांजलि को उन्होंने मानव और प्रकृति के प्रति टैगोर की गहरी संवेदना कहा। गोरा उपन्यास में भारतीय संस्कृति के मेल को उकेरने की बात भी रखी।
डॉ. देवेंद्र कुमार देवेश ने कहा कि गीतांजलि का दस साल में सौ भाषाओं में अनुवाद होना ही इसकी ताकत है। टैगोर सिर्फ लेखक नहीं, चित्रकार, गायक और नृत्य-संगीत के जानकार भी थे। शांतिनिकेतन और श्रीनिकेतन की स्थापना कर उन्होंने शिक्षा को नई दिशा दी। काबुलीवाला जैसी कहानी आज भी लोगों के दिलों में है।
डॉ. कामेश्वर पंकज ने कहा कि बंगाल के नवजागरण ने देश को नई सोच दी। टैगोर की कहानी ‘अपरिचित’ और ‘स्त्री पत्र’ 125 साल पहले भी महिला साहस की मिसाल थी। गोरा उपन्यास समाज के लिए धरोहर है।
डॉ. शंभू लाल वर्मा ने ‘द चाइल्ड’ कविता सुनाई और कहा कि टैगोर का दर्शन इंसानियत का रास्ता दिखाता है। डॉ. उषा शरण ने कहा कि टैगोर की कविताओं में आध्यात्मिकता के साथ मानवीय संवेदना झलकती है। डॉ. प्रभात नारायण झा ने टैगोर को ईश्वर, प्रकृति और इंसानियत का उपासक बताया और ‘आम का अचार’ कविता सुनाकर सबको भावुक कर दिया।
डॉ. केके चौधरी ने टैगोर को भारतीय संस्कृति में नई ऊर्जा भरने वाला युगद्रष्टा कहा। प्रो. विजयारानी ने माँ पर कविता सुनाई। स्थानीय कवियों ने मातृ शक्ति और टैगोर की रचनाओं पर काव्य पाठ किया। रीता सिन्हा, डॉ. सरिता झा, रानी सिंह, वंदना कुमारी, नीतू कुमारी, रजनी कुमारी, विनायक रंजन, भारत भूषण, मनोज कुमार राय, यमुना प्रसाद बसाक, बबीता चौधरी, सुनील समदर्शी, महेश विद्रोही, पंकज कुमार सिंह, मंजुला उपाध्याय, रणजीत तिवारी, कुमार दिवाकर, गिरीश कुमार सिंह, विमल कुमार, मुकेश कुमार, अजय कुमार सिंह, मलय कुमार झा और बाल कवि प्रीतम कुमार समेत कई साहित्य प्रेमी शामिल हुए।
अंत में डॉ. निरुपमा राय ने सभी का आभार जताया और बताया कि अगली मासिक गोष्ठी जून के पहले रविवार को होगी।

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