नैनीताल15जून26*वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर ‘जस्टिस फॉर नेचर एंड लाइफ फाउंडेशन’ ने राज्यपाल को भेजा ज्ञापन
रिपोर्टर जफर अंसारी
लालकुआं (उत्तराखंड)। उत्तराखंड के राष्ट्रीय और राज्यीय राजमार्गों सहित वन क्षेत्रों से गुजरने वाली सड़कों पर आए दिन हो रही वन्यजीवों की दर्दनाक सड़क दुर्घटनाओं को लेकर सामाजिक संस्था ‘जस्टिस फॉर नेचर एंड लाइफ फाउंडेशन ट्रस्ट’ ने गहरी चिंता व्यक्त की है। इस गंभीर मुद्दे पर लगाम लगाने के लिए संस्था ने सोमवार को लालकुआं तहसीलदार के माध्यम से उत्तराखंड के महामहिम राज्यपाल को एक मांग पत्र (ज्ञापन) प्रेषित किया।
फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने शासन-प्रशासन और वन विभाग से सड़कों पर दम तोड़ते बेजुबान वन्यजीवों के संरक्षण के लिए तत्काल ठोस और प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।
दुर्घटनाओं का ग्राफ बढ़ने पर जताई चिंता
राज्यपाल को भेजे गए ज्ञापन में संस्था ने बताया कि उत्तराखंड राज्य के विभिन्न राजमार्गों और जंगलों के बीच से गुजरने वाली सड़कों पर आए दिन सैकड़ों निर्दोष वन्यजीव तेज रफ्तार वाहनों का शिकार होकर अकाल मृत्यु को प्राप्त हो रहे हैं। यह स्थिति प्रकृति और पर्यावरण संतुलन के लिहाज से अत्यंत चिंताजनक और दुखद है। संस्था का आरोप है कि वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर धरातल पर अपेक्षित स्तर पर कोई प्रभावी इंतजाम या कड़े प्रबंध दिखाई नहीं दे रहे हैं।
सुरक्षा उपायों और बुनियादी ढांचे का अभाव
फाउंडेशन ने मुख्य रूप से इन कमियों को दुर्घटनाओं का बड़ा कारण माना है:
संकेतकों की कमी: वन क्षेत्रों से गुजरने वाले मार्गों पर पर्याप्त चेतावनी बोर्ड और साइनबोर्ड नहीं हैं।
गति नियंत्रण की अनदेखी: तेज रफ्तार वाहनों पर अंकुश लगाने के लिए गति नियंत्रण की कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं है।
वाइल्डलाइफ क्रॉसिंग का न होना: वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन के लिए पर्याप्त कॉरिडोर या सुरक्षित पारगमन (Wildlife Crossing) की व्यवस्था नहीं की गई है।
संस्था द्वारा प्रमुखता से उठाई गई मांगें:
’जस्टिस फॉर नेचर एंड लाइफ फाउंडेशन’ ने महामहिम राज्यपाल के माध्यम से राज्य सरकार और वन विभाग के सामने निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
विशेष कार्ययोजना: वन क्षेत्रों से गुजरने वाले सभी प्रमुख मार्गों पर वन्यजीव सुरक्षा हेतु एक विशेष एक्शन प्लान लागू किया जाए।
सख्त स्पीड लिमिट: दुर्घटना संभावित (ब्लैक स्पॉट) क्षेत्रों में वाहनों की गति सीमा (स्पीड लिमिट) का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराया जाए।
अंडरपास और ओवरपास का निर्माण: वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन के लिए संवेदनशील रास्तों पर अंडरपास, ओवरपास और सुरक्षित क्रॉसिंग कॉरिडोर विकसित किए जाएं।
आधुनिक उपकरणों की स्थापना: संवेदनशील वन क्षेत्रों में चेतावनी बोर्ड, रिफ्लेक्टर और स्पीड मॉनिटरिंग (राडार) उपकरण लगाए जाएं।
डेटा संकलन: सड़क हादसों में मरने वाले वन्यजीवों के आंकड़ों का नियमित संकलन किया जाए और सार्वजनिक निगरानी की व्यवस्था हो।
संयुक्त विशेष अभियान: वन विभाग, परिवहन विभाग और संबंधित अन्य एजेंसियों के बीच आपसी समन्वय बनाकर दुर्घटनाओं को रोकने के लिए एक बड़ा संयुक्त अभियान चलाया जाए।
बेजुबानों की रक्षा के लिए त्वरित कार्रवाई की अपील
ज्ञापन के अंत में फाउंडेशन ने महामहिम राज्यपाल से विनम्र अनुरोध किया है कि इस अत्यंत गंभीर विषय पर तत्काल संज्ञान लेते हुए संबंधित विभागों को कड़े और आवश्यक निर्देश जारी करने की कृपा करें, ताकि समय रहते इन बेजुबान वन्यजीवों के जीवन की रक्षा हो सके और देवभूमि का पर्यावरण संतुलन सुरक्षित बना रहे।
इस दौरान ज्ञापन सौंपते समय फाउंडेशन के अध्यक्ष दीपक सैनी, सचिव सईद अहमद, नरेश चौधरी, भुवन बिष्ट,मनोज दिवाकर, भुवन रूवाली,समेत संस्था के अन्य सदस्य और स्थानीय पर्यावरण प्रेमी मौजूद रहे।

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