नई दिल्ली15मई25*सेना की वर्दी ‘जातिवादी चश्मे’ से नहीं देखी जाती है!
*🔯भारतीय सेना का प्रत्येक सैनिक ‘राष्ट्रधर्म’ निभाता है, न कि किसी जाति या मजहब का प्रतिनिधि होता है..!*
1. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव द्वारा एक वीरांगना बेटी को जाति की परिधि में बांधना न केवल उनकी पार्टी की संकुचित सोच का प्रदर्शन है, बल्कि सेना के शौर्य और देश की अस्मिता का भी घोर अपमान है।
2. यह वही मानसिकता है, जो तुष्टिकरण और वोट बैंक की राजनीति में राष्ट्रभक्ति तक को बांटने का दुस्साहस करती है।
*इस विकृत जातिवादी सोच को जनता फिर जवाब देगी।*
: योगी आदित्यनाथ

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