नई दिल्ली13जुलाई26*भौतिक कामनाओं की पूर्ति का माध्यम है माँ मनोकामना मंदिर, अंतिम लक्ष्य आत्मिक उन्नति : माँ विजया
सद्गुरुदेव महात्मा सुशील कुमार के अवतरण दिवस पर उमड़ा श्रद्धा का सागर, 51 साधकों को मिली शक्तिपात-दीक्षा संवाददाता
नई दिल्ली, 13 जुलाई 26 । साकेत स्थित माँ मनोकामना देवी मंदिर सोमवार को श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा के अद्भुत संगम का साक्षी बना। अन्तर्राष्ट्रीय इस्सयोग समाज के तत्वावधान में ब्रह्मलीन सद्गुरुदेव महात्मा सुशील कुमार के 89वें अवतरण दिवस तथा माँ मनोकामना देवी की प्राण-प्रतिष्ठा वर्षगाँठ पर आयोजित समारोह में देश के विभिन्न राज्यों से आए सैकड़ों इस्सयोगियों ने गुरुचरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित की। अखंड संकीर्तन, मंत्रोच्चार, आरती और साधना से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा। सद्गुरू देव महात्मा सुशील कुमार जी के
महाअवतरण समारोह को संबोधित करते हुए संस्था की अध्यक्ष एवं ब्रह्मनिष्ठ सद्गुरुमाता माँ विजया ने अपने आर्शीबचन में कहा कि ब्रह्मलीन सद्गुरुदेव महात्मा सुशील कुमार ने माँ मनोकामना देवी की स्थापना मानव की भौतिक कामनाओं की पूर्ति के लिए की थी। श्रद्धा और विश्वास से यहाँ की गई प्रार्थना कभी निष्फल नहीं जाती, किंतु मनुष्य जीवन का परम लक्ष्य केवल इच्छापूर्ति नहीं, बल्कि आत्मिक जागरण और परम शांति की प्राप्ति है। यह मार्ग साधना, सद्गुरु-कृपा और आत्मसमर्पण से ही प्रशस्त होता है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य प्रत्येक क्षण परिवर्तनशील है। शरीर की कोशिकाएँ बदलती रहती हैं,परिस्थितियाँ बदलती हैं और जीवन की चुनौतियाँ भी बदलती रहती हैं। इन सबके बीच जो साधक गुरु से जुड़कर इस्सयोग की साधना करता है,वह मानसिक विकारों,भय,तनाव और मोह से ऊपर उठकर आंतरिक शांति का अनुभव करता है। उन्होंने कहा कि इस्सयोग केवल साधना-पद्धति नहीं, बल्कि मानवता को सद्गुरुदेव का अनुपम आध्यात्मिक उपहार है।
संस्था के संयुक्त सचिव डॉ. अनिल सुलभ ने बताया कि कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 10 बजे संयुक्त सचिव-सह-कोषाध्यक्ष ई. उमेश कुमार द्वारा दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। संस्था के सचिव कुमार सहाय वर्मा ने सद्गुरुदेव के चित्र पर माल्यार्पण किया। पंडित प्रभात झा के सस्वर ‘गुरु शतनाम स्तोत्र’ पाठ के साथ वातावरण पूर्णतः गुरुमय हो उठा। इसके बाद एक घंटे का अखंड संकीर्तन, आह्वान साधना, सद्गुरुदेव की आरती तथा माँ मनोकामना देवी का विधिवत पूजन-अर्चन संपन्न हुआ।पूरे मंदिर परिसर में भक्ति, अनुशासन और आध्यात्मिक एकाग्रता का अनूठा वातावरण बना रहा।इस अवसर पर लंदन से आए अभिषेक आनंद, लुधियाना के सुधांशु सुमन,ओडिशा के दुर्गादास पंडा, भुवनेश्वर की डॉ. गीता जेना,लखनऊ के दुष्यंत यादव, बोकारो के कैलाश सुहासरिया, बेंगलुरु के हरि पंडा, फरीदाबाद की वंदना कर्ण, बिहार की शैल कुमारी एवं ऋतुबाला, हरियाणा के श्रीकांत कुमार,मनीषा अग्रवाल, अल्पना श्रीवास्तव तथा सविता कुमारी सहित अनेक साधकों ने सद्गुरुदेव की कृपा और इस्सयोग साधना से जुड़े अपने अनुभव साझा किए।
संस्था के सचिव कुमार सहाय वर्मा ने माँ मनोकामना मंदिर की स्थापना का संक्षिप्त इतिहास प्रस्तुत करते हुए कहा कि यह मंदिर केवल मनोकामनाओं की पूर्ति का स्थल नहीं, बल्कि श्रद्धा, सेवा, साधना और आत्मबोध का आध्यात्मिक केंद्र है। उन्होंने सद्गुरुदेव एवं गुरुमाता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।
समारोह का प्रमुख आकर्षण शक्तिपात-दीक्षा रहा। माँ विजया ने 51 नव-जिज्ञासुओं को इस्सयोग की आंतरिक साधना के लिए शक्तिपात-दीक्षा प्रदान की। दीक्षा के इस आध्यात्मिक क्षण ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।श्रद्धालुओं ने इसे अपने जीवन की अमूल्य आध्यात्मिक उपलब्धि बताया।कार्यक्रम में संयुक्त सचिव लक्ष्मी प्रसाद साहू, संगीता झा, शिवम झा,सरोज गुटगुटिया, दीनानाथ शास्त्री, सी.एल. प्रसाद, वंदना वर्मा, डॉ. जेठानंद सोलंकी, डॉ. दार्शनिका पटेल, माया साहू,विजय मालिनी, योगेंद्र प्रसाद, राधेश्याम पांडेय, गिरिजेश गुप्ता, वीरेंद्र राय, ललन प्रसाद, आर.सी. तिवारी, विजय रंजन,ममता जमुआर, मंजिता अंजलि तथा वरिष्ठ पत्रकार विनोद तकियावाला सहित देश के विभिन्न राज्यों से आए सैकड़ों इस्सयोगियों ने इस महामहोत्सव में शामिल हुए
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