*नई दिल्ली02जून2*बृजभूषण सिंह POCSO मामले में बरी, उनका विरोध कर एक बनी MLA… दूसरा किसान मोर्चा का अध्यक्ष: लेकिन उन महिलाओं की लड़ाई हो गई कठिन, जो सही में बनीं यौन उत्पीड़न का शिकार*
दिल्ली के जंतर-मंतर पर 18 जनवरी, 2023 को लगभग 30 एथलीट्स कुश्ती संघ अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह पर यौन शोषण के आरोप लगाते हुए धरने पर बैठते हैं। इस धरने की अगुवाई करते हैं पहलवान बजरंग पुनिया, विनेश फोगाट और साक्षी मलिक। यह वो चेहरे हैं जो अब तक भारत का प्रतिनिधित्व वैश्विक स्तर पर करते रहे हैं।
खेल के माध्यम से देश का नाम ऊँचा करने वाले यह एथलीट बृजभूषण शरण सिंह पर कड़ी कार्रवाई की माँग करते हैं। इनका साथ देने वालों में धीमे-धीमे कॉन्ग्रेस नेताओं से लेकर एंटी- भाजपा लॉबी जुड़ जाती है। यौन शोषण मामले में FIR करवाने के साथ ही बृजभूषण शरण सिंह पर 100 तरह के आरोप लगाए जाते हैं।
लेकिन मई, 2025 में इनमें से POCSO वाले मामले में बृजभूषण शरण सिंह निर्दोष साबित होते हैं। धरने की शुरुआत से लेकर धरने के परिणाम तक पर नजर डाले तो दिखाई देता है कि इस पूरे आंदोलन ने सभी आंदोलनकारियों को सेटल कर दिया, किसी को राजनीति में तो किसी को वापस कुश्ती में।
लेकिन इससे एक सवाल जरूर उठ गया। सवाल है कि क्या भविष्य में इस निराधार लड़ाई का खामियाजा सत्य आधार पर लड़ने वाली महिलाओं को भुगतना पड़ेगा? क्या अब उनके लिए कोई लड़ने आएगा? क्या किसी बड़ी शख्सियत पर लगाए आरोपों को कोई तुरंत स्वीकार कर पाएगा?
क्या था पूरा मामला ?
बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ धरने पर बैठे पहलवानों का आरोप था कि वह शरण कुश्ती संघ को गलत तरीके से चला रहें हैं और महिला पहलवानों के साथ यौन शोषण को अंजाम दिया जा रहा है। वहीं बृजभूषण धरने और आरोप दोनों को बेबुनियाद बताते हुए खुद को निर्दोष होने की बात कहते हैं।
धरने को बढ़ता देख खेल मंत्री अनुराग ठाकुर पहलवानों से मिलते हैं, जिसके बाद 21 जनवरी 2023 को धरना समाप्त किया जाता है। 23 जनवरी 2023 को पहलवानों की माँग के अनुसार जाँच के लिए समिति बनाई जाती है। इसके बाद सूत्रों से पता चलता है कि बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिले हैं।
23 अप्रैल को जाँच से नाखुश पहलवान वापस धरने पर बैठते हैं। अबकी बार इन्हें तमाम बड़े राजनीतिक हस्तियों का साथ मिलता है। अंत में नाबालिग लड़की के आरोप पर POCSO एक्ट के तहत बृजभूषण पर FIR पर दर्ज की जाती है। और एक अन्य FIR बाकी पहलवानों के आरोपों पर भी दर्ज होती है।
आरोप-प्रत्यारोप, नारेबाजी और ड्रामा
अगला आरोप पहलवानों ने दिल्ली पुलिस पर लगाया और कहा कि पुलिस उनके धरने में बाधा डाल रही है। आरोप ये भी था कि प्रदर्शन स्थल की बिजली और पानी की आपूर्ति भी बाधित की जा रही है। 28 मई 2023 को पहलवान विरोध प्रदर्शन करने के लिए नए संसद भवन की तरफ जा रहे थे।
इस दौरान पुलिस और पहलवानों के बीच झड़प हुई और दिल्ली पुलिस ने धरना कर रहे पहलवानों को हिरासत में ले लिया, लेकिन 28 मई की रात तक सभी को छोड़ दिया गया। इसके बाद अगले कदम के तहत विनेश फोगाट, साक्षी मलिक, बजरंग पुनिया जीतकर प्राप्त मेडल को गंगा में प्रवाहित करने हरिद्वार की यात्रा पर निकल गए।
यहाँ भारतीय किसान यूनियन टिकैत के राष्ट्रीय प्रवक्ता नरेश टिकैत ने पहलवानों को बढ़ावा दिया। पहलवानों ने अपने इस समर्थक को ही अपना मेडल भी सौंप दिया और आगे बढ़े। 7 जून 2023 को केंद्रीय खेल मंत्री अनुराग ठाकुर अपने आवास पर पहलवानों के साथ फिर बैठक करते हैं।
छह घंटे की इस बैठक के बाद अनुराग ठाकुर ने बैठक के बाद बयान आता है, “पहलवानों के साथ सकरात्मक बातचीत बहुत संवेदनशील मुद्दे पर हुई है। लगभग छह घंटे चली इस बैठक में जिन मुद्दे पर चर्चा हुई है उसमें जो आरोप लगाए गए हैं उन आरोपों की जाँच पूरी करके 15 जून तक चार्जशीट दायर की जाए और रेसलिंग फेडरेशन का चुनाव 30 जून तक किया जाए। रेसलिंग फेडरेशन की आंतरिक शिकायत समिति बनाई जाए और उसकी अध्यक्षता कोई महिला करे।”
कोर्ट का फैसला और कैंसिलेशन रिपोर्ट दाखिल
15 जून 2023 को पुलिस की तरफ से राउज एवेन्यू के जिला अदालत में 1000 पन्ने की चार्जशीट दाखिल की गई। इसी दिन दिल्ली पुलिस नाबालिग पहलवान के मामले में पटियाला हाउस के जिला अदालत में आरोपों को निराधार और झूठा बताते हुए क्लोजर रिपोर्ट भी दाखिल करती है।
18 जुलाई 2023 को जो कि बृजभूषण के हक में होता है और उन्हें अंतरिम जमानत मिल जाती है। आरोप प्रत्यारोप का ये सिलसिला तब खतम हुआ, जब कोर्ट ने 26 मई 2025 को पुलिस द्वारा दी गई क्लोजर रिपोर्ट के बाद मामले को बंद कर दिया।
पहलवानों को मिली लाइमलाइट तो खेल छोड़ शुरू की नेतागिरी –
इस पूरे आंदोलन को हवा देने वाली कॉन्ग्रेस से पहलवानों को खूब लाइमलाईट मिली। भले ही यह आरोप साबित ना हो पाए हों लेकिन इस बीच कॉन्ग्रेस ने इस भुनाने का पूरा प्रयास हरियाणा विधानसभा चुनाव में किया।
कॉन्ग्रेस ने हरियाणा विधानसभा चुनाव में जुलाना सीट से विनेश फोगाट को टिकट दिया और प्रतिद्वंदी योगेश बैरागी को 6015 वोटों से हराते हुए वह जीत गई। इसी तरह बजरंग पुनिया ने भी खेल से अधिक रुचि राजनीति करने में दिखाई, तो उन्हें भी भारतीय किसान कॉन्ग्रेस का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त कर दिया गया।
सवाल हर स्त्री का
बृजभूषण शरण सिंह पर लगाया नाबालिग का आरोप नहीं साबित हो सका। इस बीच बृजभूषण के बेटे करण भूषण सांसद हो गए। बृज भूषण के करीबी संजय सिंह कुश्ती संघ के नए मुखिया हो गए। विनेश और बाकी पहलवान राजनीति में सेटल हो गए तो बाकी अपने खेल की तरफ लौट गए। लेकिन सब एक सवाल छोड़ गए।
बड़े पदों को पाने के बाद इन लोगों को उस नाबालिग बच्ची से भी इनका मतलब नहीं रह गया, जिसके कैरियर का अभी आगाज भी नहीं हुआ था। कोर्ट में नाबालिग बच्ची के पिता ने अपना बयान कुछ ही महीनों के बाद बदल लिया था। उन्होंने बताया था कि ‘गलत बयान’ उन्होंने बृजभूषण के विरुद्ध दिया था।
सवाल उठता है कि POCSO का यह मामला गलत साबित होने के बाद उन महिलाओं पर इसका क्या असर पड़ेगा, जिनके साथ सच में यौन शोषण की घटनाएँ होती हैं। अगर उस पीड़ित महिला का हर आरोप सत्य होगा फिर भी ये तो जरूर याद रखा जाएगा कि किस तरह इस मामले में आरोपों को इस्तेमाल किया गया।
साथ ही, वह बच्ची अब अपने साथियों और खेल जगत समेत बाकी जगह कैसे लोगों का सामना करेगी। कैसे वह पिता लोगों को बताएगा कि उसने यह आरोप शुरू में क्यों लगाए और बाद में वापस क्यों लिए? जो सत्यता

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