नई दिल्ली01मई23*अंतराष्ट्रीय मज़दूर दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं एवं मई दिवस की विरासत में अमर हुए सभी शहीदों को शत शत नमन!*
आज का मेहनकश वर्ग बहुत ही गम्भीर हमलों का सामना कर रहा है।
आइए हम सब इन मांगों को लेकर एकजुटता के साथ शसक्त आवाज़ उठाएं:-
*चार मजदूर विरोधी लेबर कोड (श्रम संहिता) को रद्द करो।*
*सभी ठेका, आउटसोर्सिंग, फिक्सडटर्म और योजना मजदूरों को नियमित करो।*
*सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों के निजीकरण को निरस्त करो।*
*₹- 26000 मासिक न्यूनतम वेतन की घोषणा करो।*
*तुरंत सरकार भारतीय श्रम सम्मेलन का आयोजन करें।*
*निर्माण मज़दूर कल्याण बोर्ड में राजनीतिकरण एवं गलत निर्णय लेना बंद करो।*
*निर्माण मज़दूर कल्याण बोर्ड में पंजीकृत मज़दूरों को तुरंत योजनाओं लंबित आवेदनों पर लाभ देना शरू करो।*
*निर्माण मज़दूर कल्याण बोर्ड/सलाहकार समिति को पुर्नगठित कर तुरंत बैठक बुलाई जाए।*
*कार्य स्थल पर सभी के लिए OHS एवं सामाजिक सुरक्षा लागू करो।*
*धर्म व जातिगत आधार पर मज़दूरों को बाँटना बंद करो।*
आइए, केंद्र की मोदी-भाजपा सरकार की फासीवादी, साम्प्रदायिक एवं श्रमिक विरोधी नीतियों का विरोध करें!
साथियों’
अमेरिकी मजदूर वर्ग ने मजदूरों को सूर्योदय से सूर्यास्त तक काम पर लगाकर किए जा रहे शोषण के खिलाफ 8 घंटे के कार्य दिवस के लिए संघर्ष किया।
मई 1883 के पहले सप्ताह में शिकागो के हेमार्केट चौक में हुए विरोध प्रदर्शनों में शामिल कुछ लोगों को पुलिस ने गोली मार दी थी और मजदूरों के नेताओं को हड़बड़ी में दिखावे का मुकदमा चला कर फांसी की सजा दी गई।
उन सभी शहीदों को सलाम व नमन करता हूँ जिन्होंने 8 घंटे के कार्य दिवस के लिए संघर्ष किया शिकागो के शहीदों के बलिदान से प्रेरित होकर भारत के मजदूर वर्ग ने लंबे समय तक संघर्ष किया है और मज़दूरों के हक में कई कानूनी अधिकार जीते हैं। आज हमें मोदी सरकार के कारपोरेट-परस्त हमले से इन अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करना होगा।
मोदी सरकार राष्ट्रवाद, देशभक्ति और स्वदेशी के नाम पर सार्वजनिक क्षेत्र के सभी संस्थाओं/उद्योगों को बेच रही है। अंतरिक्ष यान, बीमा, रेलवे, सड़कें, तेल, कोयला, बिजली उत्पादन, सेल, गेल, बीपीसीएल, एचपीसीएल एवं बीएसएनएल सभी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां हैं जो कॉर्पोरेट को बिक्री के लिए तैयार हैं। देश में एक भी सार्वजनिक क्षेत्र का उद्यम ऐसा नहीं है जिसे निजी क्षेत्र को बेचा नहीं जाना है।
कॉर्पोरेट श्रम कानून में संशोधन की मांग कर रहे हैं क्योंकि उनके निवेश के मुनाफे को बढ़ाने के लिए यह आवश्यक हैं।
मोदी सरकार ने कड़ी मेहनत से जीते गए 39 श्रम कानूनों को कोरोना काल में खत्म कर उनकी जगह चार लेबर कोड (श्रम संहिता) लाकर मजदूर वर्ग के अधिकारों पर हमला किया है।
इन 4 लेबर कोडो (सहिंता) को लागू किया गया तो करोड़ों कर्मचारी/श्रमिक व मजदूर श्रम कानूनों से वंचित एवं मालिको के शिकार हो जाएंगे, मालिको/ ठेकेदारों को मजदूरों को किसी भी समय कार्य से निकालने का अधिकार दिया गया है।
वही दूसरी तरफ केंद्र की मोदी- भाजपा सरकार द्वारा पिछले 8 वर्षो से भारतीय श्रम सम्मेलन का आयोजन न करना सरकार की सोच साफ तौर पर मज़दूर विरोधी दर्षाता है।
पहले से ही सार्वजनिक और निजी प्रबंधनों ने स्थायी मजदूरों को कम कर दिया है और ठेका, फिक्सडटर्म और आउटसोर्सिंग मजदूरों की संख्या को बढ़ा दिया है। इस प्रकार, ये चार लेबर कोड (श्रम संहिता) यूनियन बनाने के अधिकार पर हमले और सामूहिक सौदेबाजी की शक्ति और अधिकार को कमजोर करने के लिए मालिकों के हथियार हैं।
ये 4 लेबर कोड मजदूर वर्ग के लिए मौत की सजा व फिर से गुलामी के समान हैं। देश में 97% से अधिक श्रमिक वर्ग असंगठित क्षेत्र में है, हमाली, निर्माण, आशा, हॉकर्स, रेहड़ी पटरी, खोमचा, रिक्सा चालक, आंगनवाड़ी, केजीबीवी, मध्याह्न भोजन योजना आदि जैसे असंगठित मजदूरों के लिए न्यूनतम मजदूरी लागू नहीं की जा रही है। ईएसआई, पीएफ, पेंशन और अन्य वैधानिक अधिकारों को लागू नहीं किया जा रहा है।
केंद्र, राज्य सरकार के विभागों, ग्राम पंचायत कर्मियों, नगर निगम कर्मियों, योजना कर्मियों को स्थायी करने के लिए केंद्र व राज्य सरकार द्वारा दिए गए आश्वासनों पर अमल नहीं किया गया है। निर्माण मजदूरों को छोड़कर किसी भी क्षेत्र के असंगठित मजदूरों के लिए कोई त्रिपक्षीय कल्याण बोर्ड नहीं है।
कोरोना काल से सभी प्रकार की आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में 100% की वृद्धि हुई है। पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस की कीमतें बढ़ गई हैं और बढ़ती कीमतों के अनुरूप न्यूनतम वेतन को बढ़ाया नहीं जा रहा है।
न्यूनतम वेतन 27,000 रुपये प्रति माह करने की ट्रेड यूनियनों की मांग पर सरकारें ध्यान नहीं दे रही हैं।
भाजपा सरकार पिछले नौ साल से सत्ता में है लेकिन जनता से किए गए वादों को उसने लागू नहीं किया है। संसद में एक भी कानून ऐसा नहीं बनाया गया है जो मजदूरों, आम लोगों या किसानों के हित में हो, लेकिन इस अवधि के दौरान, संसद ने कानूनों में संशोधन किया है ताकि देश के धन और प्राकृतिक संसाधनों को कॉर्पोरेट, मुख्य रूप से विदेशी को सौंप दिया जा सके।
यह सरकार उसकी नीतियों का विरोध करने वाले दलों, व्यक्तियों और ताकतों पर दमन करती है। कार्यकर्ताओं को एनआईए द्वारा शहरी नक्सली और ‘देशद्रोही’ करार दिया जा रहा है, यूएपीए के तहत गिरफ्तार किया जा रहा है और जेल भेजा जा रहा है।
आरएसएस और उसके फ्रंटल संगठन अल्पसंख्यकों, दलितों, बुद्धिजीवियों, श्रमिक नेताओं, अम्बेडकरवादियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं पर लगातार हमले कर रही है।
विविधता वाले देश में एक धर्म, एक भाषा, एक शिक्षा, एक भोजन, एक ड्रेस कोड आदि आदि के नारे लगाते हुए, शासन मजदूर वर्ग के बीच विभाजन पैदा कर रहा है।
138 वें मई दिवस के अवसर पर, शिकागो शहीदों की भावना में, हम अपने अधिकारों की रक्षा के लिए, चार लेबर कोडो (श्रम संहिता) को निरस्त कराने के लिए, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों के निजीकरण के खिलाफ, ठेका, आउटसोर्सिंग एवं योजना कर्मियों के नियमितीकरण के लिए, समान काम के लिए समान वेतन के लिए, पुरानी पेंशन योजना की बहाली के लिए व्यापक और निरंतर संघर्ष करने का संकल्प लें।
केंद्र की मोदी-भाजपा सरकार आदेश या अध्यादेश के माध्यम से श्रमिक वर्ग के विरुद्ध श्रम कानूनों का संहिताकरण (लेबर कोड) प्रक्रिया को पूरा कर मजदूर वर्ग के मूल अधिकारों पर हमला कर रही है। सरकार और उसके साथी यानि बड़े उद्योगपति जाहिर तौर पर चाहते हैं कि मजदूरों को परिस्थितियों का गुलाम बना दिया जाए।
सरकार ने कॉरपोरेट्स को कर रियायतों देकर, लाभ कमाने वाले सार्वजनिक उपक्रमों की बिक्री करके, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में एनपीए की वसूली ना करने आदि के आदेश देकर देश के खजाने को खाली कर दिया है। हमारे सकल घरेलू उत्पाद का 73% का उपभोग केवल शीर्ष 1% आबादी कर लेती है। आज हमारे देश के टॉप 1% अमीरों की संपत्ति हमारे सबसे कम 70% लोगों की कुल संपत्ति के 4 गुना से भी ज्यादा है।
63 भारतीय अरबपतियों की संयुक्त कुल संपत्ति वित्त वर्ष 2018-19 के कुल केंद्रीय बजट से अधिक है जो 24,42,200 करोड़ रुपये थी। हमारे देश में 953 अरबपतियों के परिवारों के पास औसतन 5278 करोड़ रुपये की संपत्ति है।
आठ घंटे के कार्य दिवस के अधिकार, जिस पर हमला हो रहा है, की रक्षा के लिए लड़ने के लिए एकजुट हों।
नियोक्ताओं के पक्ष में श्रमिकों के अधिकारों के दमन के लिए 44 श्रम कानूनों को 4 संहिताओं में विलय के खिलाफ एकजुट हों।
मौजूदा सामाजिक सुरक्षा, व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य सुरक्षा के उपायों की रक्षा करने और सार्वभौमिक कवरेज के लिए समावेशी बनवाने के लिए एकजुट हों।
सार्वजनिक उपक्रमों को बेचने व निजीकरण के खिलाफ लड़ने के लिए एकजुट हों।
मज़दूरों के अर्जित लाभ, अधिकार और धन की रक्षा करते हुए हम पूँजीपतियों और सरकारों के ऐसे तुच्छ प्रयासों के विरुद्ध लड़ने के लिए एकजुट हों और उन्हें उनके अधिकारों से वंचित करने का विरोध करते हैं मज़दूर वर्ग और मेहनतकश लोगों द्वारा उत्पन्न मुनाफे और धन की रक्षा करने के लिए हमे एकजुट होना पड़ेगा।
मजदूर वर्ग व सभी मेहनतकशों की एकता को बाधित करने और उन्हें धर्म, क्षेत्र, नस्ल, जाति, जातीयता और लिंग के आधार पर विभाजित करने के सभी प्रयासों को विफल करने के लिए एकजुट होकर हमे लड़ने के जरूरत है।
शोषणकारी पूंजीवादी व्यवस्था के खात्मे के संघर्ष के लिए एकजुट हो और नए शोषण मुक्त समाज, समाजिक व्यवस्था कायम करने के लिए एकजुट हों।
*मई दिवस जिंदाबाद!*
*मजदूर वर्ग की एकता जिंदाबाद!*
*मजदूरो किसानों की एकता! जिंदाबाद!*
*देश के मजदूरों एक हो!*
आपका
*अमज़द हसन*
महासचिव: दिल्ली असंगठित निर्माण मज़दूर यूनियन (INTUC/BWI)

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