झाँसी7मई26*23 करोड़ के सौंदर्यीकरण में गुम हो गया नारायण बाग का अस्तित्व
झांसी का ऐतिहासिक एवं प्राकृतिक धरोहर स्थल नारायण बाग इन दिनों अपने अस्तित्व और पर्यावरणीय संतुलन को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों का आरोप है कि लगभग 23 करोड़ रुपये की लागत से किए गए “सौंदर्यीकरण” कार्यों ने बाग की प्राकृतिक पहचान को गंभीर नुकसान पहुंचाया है।
झांसी के पर्यावरण कार्यकर्ता नरेन्द्र कुशवाहा ने झांसी के नागरिकों, जनप्रतिनिधियों तथा मीडिया से अपील की है कि वे स्वयं नारायण बाग पहुंचकर वहां की वर्तमान स्थिति का निरीक्षण करें। उनका कहना है कि कुछ वर्ष पूर्व तक यह स्थल हरियाली, प्राकृतिक सुगंध और जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध था। यहां लगभग 200 वर्ष पुराना केवड़ा बाग मौजूद था, जिसकी खुशबू पूरे क्षेत्र को महका देती थी।
स्थानीय लोगों के अनुसार नारायण बाग में मोर, खरगोश, अजगर सहित कई वन्य जीव दिखाई देते थे। यहां औषधीय पौधों की नर्सरी भी विकसित थी, जिसमें सर्पगंधा, मुलैठी और शंखपुष्पी जैसी प्रजातियां संरक्षित थीं। पुराने विशाल वृक्ष, फूल-फल प्रदर्शनी तथा मॉर्निंग वॉक, योग और व्यायाम के लिए आने वाले लोगों की चहल-पहल इस स्थल की विशेष पहचान मानी जाती थी।
हालांकि अब स्थिति बदल चुकी है। आरोप है कि सौंदर्यीकरण कार्यों के दौरान हजारों पेड़ और ऐतिहासिक केवड़ा बाग नष्ट कर दिए गए तथा प्राकृतिक मिट्टी वाले क्षेत्र की जगह लगभग दो किलोमीटर लंबा पक्का पाथवे बना दिया गया। इसके अतिरिक्त शहर के गंदे नालों का पानी बाग क्षेत्र में छोड़े जाने से दलदल और दुर्गंध की समस्या उत्पन्न हो गई है, जिससे बड़ी मात्रा में हरियाली प्रभावित हुई है।
पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि यदि समय रहते संरक्षण के प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो झांसी अपनी एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक धरोहर खो सकता है। नागरिकों ने प्रशासन से नारायण बाग की पर्यावरणीय स्थिति की निष्पक्ष जांच, हरियाली पुनर्स्थापन और प्रदूषित जल निकासी रोकने की मांग की है।

More Stories
बांदा 6 मई 26*अपहरण मामले में आरोपियों को गिरफ्तार करने गए जवान हुए शहीद*
बांदा6 मई 26*में समाजवादी पार्टी ने किया जोरदार प्रदर्शन*
मथुरा 7मई26*सट्टा करते हुए 01 अभियुक्त सट्टा पर्ची,डायरी,पैन व 1850/- रुपये के साथ गिरफ्तार