जालौन,
रिपोर्ट- देवेश कुमार स्वर्णकार
जालौन03दिसम्बर* विश्व दिव्यांग दिवस
आज़ विश्व दिव्यांग दिवस है
समूचे विश्व में इसे 3 दिसंबर को मनाया जाता है
आज़ विश्व दिव्यांग दिवस पर में शुभकामनाएं तो नही दे सकता पर हमेशा प्रार्थना करूँगा कि ईश्वर किसी को दिव्यांग ना बनाये, क्योकि जो दिव्यांग है उनसे पूछो दिव्यांगता क्या होती है
मगर दिव्यांगता कोई अभिश्राप नही है, बस इसे सही सोच के साथ देखा जाए, क्योकि *ईश्वर का नियम है* यदि ईश्वर किसी मे कोई कमी देता है तो उसे एक विशेष गुण भी देता है,
इसी विशेष गुण के कारण उसे *दिव्यांग* शब्द दिया गया।
दिव्यांग साथी अपने आपको कमजोर न समझे, किसी की मदद के आदी न बने, मेरे साथी जो जिस विधा में निपुण है, उसका उपयोग करे अपना सहारा खुद बने।
ऐसे अनेक *उदाहरण* है जिसमे दिव्यांगजनों ने अपनी कला से न केवल अपने नाम का परचम लहराया है बल्कि दूसरे लोगो के प्रेरणा के स्रोत भी बने
आज़ हम आपको रुबरु करानें जा रहें हैं जनपद जालौन के जालौन नगर क्षेत्र की रहने वाली दिव्यांग छात्रा चारु ताम्रकार से
जिन्होंने दिवयांगता को कभी अपनी कमज़ोरी नहीं बनने दिया
हमेशा अपने इरादे बुलंद रखे और विभिन्न कलाओं जैसे मेंहदी लगाना, चित्रकारी करना, तथा गोबर से दिए तथा विभिन्न देवी-देवताओं के चित्र बनाना
चारू ताम्रकार ने बी टी सी प्रशिक्षण पूर्ण कर लिया है और शिक्षिका बनकर समाज को नई दिशा दिखाने का प्रयास करना चाहतीं हैं
इसीलिए तो कहा गया है कि ****खुदी को कर बुलंद इतना के हर तकदीर से पहले खुदा बन्दे से खुद पूछे के बता तेरी रज़ा क्या है***

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