October 10, 2026

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कुशीनगर10 अक्टूबर 26*एसपी केशव कुमार का बड़ा प्रशासनिक प्रयोग: परीक्षा पास कर थानेदार बने दरोगा,

कुशीनगर10 अक्टूबर 26*एसपी केशव कुमार का बड़ा प्रशासनिक प्रयोग: परीक्षा पास कर थानेदार बने दरोगा,

कुशीनगर10 अक्टूबर 26*एसपी केशव कुमार का बड़ा प्रशासनिक प्रयोग: परीक्षा पास कर थानेदार बने दरोगा, जुगाड़ तंत्र पर लगा ताला

​संजीव कुमार पाण्डेय | यूपीआजतक | कुशीनगर

​पडरौना:

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जनपद की कानून-व्यवस्था और पुलिसिंग व्यवस्था में एक नया और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है। अब तक थानों की कुर्सी पाने के लिए सिफारिश, पैरवी और जुगाड़ का जो खेल पर्दे के पीछे चलता था, उस पर पुलिस कप्तान केशव कुमार ने पूरी तरह से विराम लगा दिया है। जनपद के इतिहास में पहली बार पुलिस अधीक्षक केशव कुमार ने एक अनूठा और कड़ा प्रशासनिक प्रयोग करते हुए दरोगाओं की बाकायदा परीक्षा ली और मेरिट के आधार पर थानों और महत्वपूर्ण चौकियों की कमान सौंपी। इस फैसले ने न केवल विभाग के भीतर हलचल मचा दी है, बल्कि जनता के बीच भी पुलिस की कार्यशैली को लेकर एक सकारात्मक संदेश दिया है।

​सिफारिश नहीं, प्रतिभा बनेगी पैमाना: एसपी का सख्त संदेश

​आमतौर पर पुलिस महकमे में थानों की तैनाती को लेकर कई तरह की चर्चाएं आम रहती हैं। वरिष्ठता या रसूख के दम पर मलाईदार थाने हासिल करने की परंपरा को तोड़ते हुए एसपी केशव कुमार ने स्पष्ट कर दिया कि कुर्सी उसी को मिलेगी जो काबिल होगा। कप्तान के इस फैसले का सीधा असर महकमे के उन अफसरों पर पड़ा जो वर्षों से बिना किसी ठोस प्रदर्शन के मलाईदार पदों पर जमे हुए थे। परीक्षा में फेल होने या मानकों पर खरे न उतरने के कारण कई पुराने और बेअंदाज दरोगाओं को अपनी थानेदारी गंवानी पड़ी है। पुलिस अधीक्षक के इस कड़े कदम से महकमे में यह साफ संदेश चला गया है कि अब केवल काम और काबिलियत ही पद का आधार बनेगी।

​देवरिया मॉडल की तर्ज पर कुशीनगर में पहली बार पहल

​गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के जरिए थानेदारों की तैनाती का चर्चित प्रयोग सबसे पहले देवरिया के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक प्रभाकर चौधरी ने किया था। उस समय उनके इस फैसले की प्रदेश भर में जमकर सराहना हुई थी। उसी तर्ज पर अब कुशीनगर जनपद में एसपी केशव कुमार ने इसे अमलीजामा पहनाया है। इस अभिनव प्रयोग का मुख्य उद्देश्य निष्पक्ष, त्वरित और संवेदनशील पुलिसिंग को धरातल पर उतारना है, ताकि थानों पर आने वाले फरियादियों को न्याय मिल सके और अपराध नियंत्रण में तकनीकी व तार्किक सोच का इस्तेमाल हो सके।

​कड़े इम्तिहान में 25 दरोगा हुए शामिल, 6 को मिली थानेदारी

​इस विशेष चयन प्रक्रिया के तहत जिले के 25 दरोगाओं ने परीक्षा में हिस्सा लिया। इसमें पुलिस कार्यप्रणाली, केस डायरी के रख-रखाव, कानून की धाराओं की समझ, अपराध नियंत्रण की रणनीति और त्वरित निर्णय क्षमता जैसे बिंदुओं पर लिखित व मौखिक परीक्षण किया गया। कड़े मूल्यांकन के बाद मेरिट सूची तैयार की गई, जिसमें से उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छह पुलिस अधिकारियों को सीधे थाने की कमान सौंपी गई:

  • ​इंस्पेक्टर धर्मेंद्र सिंह: अपराध शाखा से स्थानांतरित कर प्रभारी निरीक्षक, कोतवाली हाटा बनाया गया।
  • ​इंस्पेक्टर महेंद्र प्रजापति: अपराध शाखा से स्थानांतरित कर प्रभारी निरीक्षक, चौरा खास की जिम्मेदारी दी गई।
  • ​उपनिरीक्षक स्वतंत्र सिंह: स्वाट टीम प्रभारी के पद से पदोन्नत करते हुए थानाध्यक्ष रामकोला नियुक्त किया गया।
  • ​उपनिरीक्षक अमित सिंह: चौकी प्रभारी सुभाष चौक (पडरौना) से पदोन्नत कर थानाध्यक्ष रविंद्रनगर धूस बनाया गया।
  • ​उपनिरीक्षक महेश कुमार चौबे: उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर थानाध्यक्ष खड्डा की जिम्मेदारी सौंपी गई।
  • ​उपनिरीक्षक अरुण सिंह: परीक्षा में सफलता हासिल कर थानाध्यक्ष पटहेरवा बनाए गए।

​चौकी प्रभारियों की भी मेरिट से हुई ताजपोशी

​परीक्षा में बेहतर अंक लाने वाले अन्य उपनिरीक्षकों को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं। इनमें उपनिरीक्षक ब्रह्म उपाध्याय, राम प्रवेश सिंह, अनुराग यादव और शिवम द्विवेदी को महत्वपूर्ण पुलिस चौकियों का प्रभारी बनाया गया है। विभागीय नियमों के अनुसार, इन अधिकारियों को डीआईजी स्तर से अभी औपचारिक अनुमोदन प्राप्त होना शेष है, जिसके चलते इन्हें फिलहाल चौकी स्तर पर महत्वपूर्ण दायित्व सौंपे गए हैं। अनुमोदन की प्रक्रिया पूरी होते ही भविष्य में इन्हें भी बड़े दायित्व दिए जा सकते हैं।

​”जनता की उम्मीदों पर खरा उतरना अनिवार्य”: पुलिस कप्तान

​एसपी केशव कुमार ने इस पूरी चयन प्रक्रिया पर अपना दृष्टिकोण साझा करते हुए स्पष्ट कहा कि पुलिसिंग का सीधा सरोकार आम जनता की सुरक्षा और विश्वास से है। उन्होंने कहा:

​”थानेदार बनने के इच्छुक अधिकारियों से पारदर्शी तरीके से आवेदन आमंत्रित किए गए थे। पुलिस लाइन में मौजूद कई वरिष्ठ दरोगाओं को पूर्व में पर्याप्त अवसर दिए गए, लेकिन उनमें से कई जनता और शासन की प्राथमिकताओं और अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतर सके। किसी भी थाने की कमान संभालना बेहद संवेदनशील काम है। इसके लिए तार्किक क्षमता, बुद्धिलब्धि, सामान्य ज्ञान और निष्पक्ष कार्यसंस्कृति बेहद जरूरी है। यह परीक्षा इसी मूल्यांकन की शुरुआत है। हमारा लक्ष्य केवल स्वच्छ और पारदर्शी प्रशासन देना है, जिसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह व्यवस्था आगे भी नियमित रूप से जारी रहेगी।”

 

​महकमे में बढ़ी किताबों और कानूनों की पूछ

​एसपी के इस ऐतिहासिक फैसले के बाद जिले के पुलिस महकमे में एक नया माहौल देखने को मिल रहा है। जो दरोगा पहले फील्ड में केवल रसूख के सहारे टिके रहने की रणनीति बनाते थे, वे अब पुलिस मैनुअल, नए कानूनों और कानूनी प्रक्रियाओं की किताबें पलटते नजर आ रहे हैं। जिले के अन्य उपनिरीक्षक भी आगामी परीक्षाओं की तैयारी में जुट गए हैं ताकि भविष्य में होने वाले इम्तिहान को पास कर थानेदारी की जिम्मेदारी हासिल कर सकें। कुशीनगर पुलिस का यह नवाचार पूरे प्रदेश में एक नजीर के रूप में देखा जा रहा है।

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