[10/23, 7:33 PM] Ram Prakash Upaajtak: *दीपावली पर आतिशबाजी से पटे बाजार निर्धारित नियमों का हो रहा उल्लंघन*
*विस्फोट की आशंका से लोग भयभीत संबंधित अधिकारी अपनी सुविधा शुल्क से खुश*
*बिधूना,औरैया।* दीपावली के त्यौहार पर आतिशबाजी से मनमाना मुनाफा कमाने को लेकर नियमों को धता बताते हुए रिहायशी इलाकोंं के साथ भीड़ भाड़ वाले बाजारों में आतिशबाजी का व्यापार सरेआम होता नजर आ रहा है। नगर क्षेत्र के बारूद के ढेर पर बैठे होने के बावजूद संबंधित अधिकारी आतिशबाजी माफियाओं से सुविधा शुल्कलेकर खुश नजर आ रहे हैं, जिससे क्षेत्रीय बुद्धिजीवी बेहद चिंतित हैं।
दीपावली के त्यौहार पर मनमाना मुनाफा कमाने की मंशा से कुछ आतिशबाजी माफियाओं द्वारा अपनी तीन तिकड़म एवं सुविधा शुल्क के बलबूते आनन-फानन आतिशबाजी बिक्री के अस्थाई लाइसेंस हासिल कर लिए गए हैं, किंतु बिक्री के अस्थाई लाइसेंस के निर्धारित अग्निशमन संबंधी नियमों का सरेआम उल्लंघन होता नजर आ रहा है। आतिशबाजी विक्रेताओं के पास आतिशबाजी बारूद का बड़े पैमाने पर भंडारण तो है, लेकिन अग्निशमन उपकरण बालू बाल्टियों व पानी की उपलब्धता नहीं है। यही नहीं आतिशबाजी दुकानों के दो दो मीटर की दूरी पर लगाए जाने का भी नियम निर्धारित है, किंतु इस नियम की भी सरेआम धज्जियां उड़ रही है। इतना ही नहीं बिधूना नगर के साथ ही बेला अछल्दा, वैवाह, याकूबपुर, सहार, नेवलगंज, उमरैन, एरवाकटरा, मल्हौसी, कैथावा, कुदरकोट, रुरुगंज, रामगढ़ आदि कस्बों में बिना लाइसेंस के भी तमाम आतिशबाजी विक्रेता रिहायशी आबादी व भीड़भाड़ वाले बाजार के बीच जगह-जगह आतिशबाजी की दुकानें सजाए हुए हैं। जिससे किसी भी समय किसी बड़े विस्फोट एवं हादसे की आशंका से लोग भयभीत हैं इसके बावजूद संबंधित अधिकारी अनजान बने हुए हैं। इस संबंध में जनचर्चा तो आम यह है कि इस पर अंकुश लगाने वाले अधिकारी आतिशबाजी माफियाओं से मोटी सुविधा शुल्क वसूल रहे हैं। शायद इसी कारण इस पर अंकुश नहीं लगा रहे हैं, जिससे समूचा क्षेत्र बारूद के मुहाने पर बैठा हुआ है।
[10/23, 7:33 PM] Ram Prakash Upaajtak: *सीएम शिकायत पोर्टल से नहीं निस्तारित हो रही शिकायतें*
*बिना जांच पड़ताल संबंधित अधिकारी घर बैठे कर देते शिकायतें निस्तारित*
*औरैया।* मुख्यमंत्री शिकायत पोर्टल पर शिकायतें दर्ज होने के बाद बिना जांच पड़ताल घर बैठे संबंधित अधिकारी कर रहे शिकायतें निस्तारित जिससे मुख्यमंत्री शिकायत पोर्टल का जनता को नहीं मिल रहा लाभ। शिकायत पोर्टल हो रहा सफेद हाथी साबित। यूं तो जनता की ऑनलाइन शिकायत के निस्तारण के लिए मुख्यमंत्री शिकायत पोर्टल बनाया गया है मुख्यमंत्री शिकायत पोर्टल से आसानी से न्याय मिलने की संभावना से पोर्टल पर प्रतिदिन पीड़ित शिकायतकर्ता अपनी शिकायतें भी ऑनलाइन दर्ज कराते हैं।
यही नहीं शिकायत दर्ज होने के कुछ दिन बाद शिकायतकर्ता के मोबाइल पर शिकायत के संबंध में पूछताछ भी की जाती है किंतु विडंबना देखने में यह आ रही है कि शिकायत से संबंधित अधिकारियों द्वारा पीड़ित से उसकी शिकायत के संबंध में पूछताछ किए बिना घर बैठे ही शिकायत का निस्तारण कर मुख्यमंत्री शिकायत पोर्टल पर निस्तारण की रिपोर्ट भी ऑनलाइन दर्ज करा देते हैं जबकि पीड़ितों को इसकी जानकारी बाद में जब पता चलती है जब वह ऑनलाइन शिकायत का परिणाम पोर्टल पर देखते हैं कि संबंधित अधिकारियों ने बिना जांच पड़ताल शिकायत निस्तारित कर दी है तो वह अपने दुर्भाग्य पर आंसू बहाते हुए मुख्यमंत्री शिकायत पोर्टल को कोसते हुए मन मसोसकर बैठ जाने को मजबूर हो जाते है। सबसे दिलचस्प और गौरतलब बात तो यह है कि जिले में आज तक शायद ही ऐसा कोई मामला हो जो मुख्यमंत्री शिकायत पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने जाने के बाद शिकायतकर्ता को संतुष्ट कर शिकायत का निस्तारण किया गया हो। संबंधित अधिकारियों द्वारा बिना जांच पड़ताल लगातार शिकायतों का घर बैठे मनमाने तरीके से निस्तारण की फर्जी रिपोर्ट ही नहीं भेजी जा रही है बल्कि शत प्रतिशत शिकायतों के निस्तारण के नाम पर जिले में अब्बल स्थान पाने का दावा कर खूब वाहवाही भी लूटी जा रही है। जबकि मुख्यमंत्री शिकायत पोर्टल शिकायतकर्ताओं के लिए जिले में सफेद हाथी साबित होता नजर आ रहा है और अब हालत यह है कि अधिकांश पीड़ित शिकायतकर्ता बुद्धिजीवियों का मुख्यमंत्री शिकायत पोर्टल के प्रति रुझान भी घटता जा रहा है।

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