April 24, 2026

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औरैया 11 अगस्त *आजादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष में वीजीएम महाविद्यालय में व्याख्यानमाला का हुआ आयोजन*

औरैया 11 अगस्त *आजादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष में वीजीएम महाविद्यालय में व्याख्यानमाला का हुआ आयोजन*

औरैया 11 अगस्त *आजादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष में वीजीएम महाविद्यालय में व्याख्यानमाला का हुआ आयोजन*

*दिबियापुर,औरैया।* विवेकानंद ग्रामोद्योग स्नातकोत्तर महाविद्यालय दिबियापुर में प्राचार्य डॉ इकरार अहमद की अध्यक्षता में एक दिवसीय व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। सभा का संचालन डॉ राकेश तिवारी ने करते हुए कहा की आजादी का अमृत महोत्सव में सभी को बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए क्योंकि वीर शहीदों को श्रद्धांजलि देने का यह सबसे अच्छा अवसर है। प्रमुख वक्ता प्रोफेसर डॉक्टर इफ्तिखार हसन ने कहा कि कहा कि अपरिमित बलिदानों का प्रतिफल है हमारीआजादी। देश की आजादी के लिए जहां महान क्रांतिकारियों ने अपने प्राणों की आहुति देकर अपना बहुमूल्य सहयोग प्रदान किया। वही महान नेताओं राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस ,पंडित जवाहरलाल नेहरू ,सरदार वल्लभभाई पटेल मौलाना अबुल कलाम आजाद, डॉक्टर भीमराव अंबेडकर सभी ने देशवासियों को नेतृत्व प्रदान किया एवं डॉ आलोक यादव ने अपने विचार व्यक्त किएबीए प्रथम वर्ष की छात्रा हनी ने वीर शहीदों को श्रद्धांजलि एक राष्ट्रीय गीत के माध्यम से अर्पित की।
प्राचार्य डॉक्टर इकरार अहमद अहमद ने कहा की आजादी का अमृत महोत्सव सही मायने में वीर शहीदों के बलिदानों के समीक्षा एवं उनके प्रति अपने श्रद्धा सुमन अर्पित करने का महोत्सव है। उन्होंने विद्यार्थियों का आवाहन करते हुए कहा कि सतत जागरूकता ही स्वतंत्रता का मूल्य है। सभी विद्यार्थी सच्चे मन से यदि भविष्य में एवं वर्तमान में यदि देश सेवा का व्रत लेंगे तो यह उन वीर शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने अमर सेनानी बहादुर शाह जफर को याद करते हुए कहा की अंग्रेजों ने भूख में जब अमर सेनानी बहादुर शाह जफर ने भोजन की मांग की तो अंग्रेजों ने थाल में सजाकर उनके बेटों के कटे हुए सिर देकर उन्हें अपमानित किया। उन्हें काला पानी की सजा के तौर पर म्यांमार में रंगून के अज्ञात वीरान स्थान पर रखा जहां पर उनकी समाधि स्थित है। उनकी दिली इच्छा थी कि उन्हें उनकी जन्मभूमि हिंदुस्तान में दफनाया जाए लेकिन अंग्रेजों ने उन्हें वहीं रंगून में सुपुर्द ए खाक कर दिया।उन्होंने अमर सेनानी बहादुर शाह जफर के इस शेर के माध्यम से उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की कि 2 गज जमीन भी ना मिली कूचे यार मे। महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने प्रतिभागता कर अमर सेनानियों को अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किए। इस अवसर पर डॉक्टर विनीत त्रिपाठी ,डॉ महेंद्र तिवारी , रमेश दोहरे आदि महाविद्यालय परिवार ने भाग लिया।