उज्जैन17अगस्त26*वर्ष में सिर्फ आज एक दिन के लिए खुलता है नागचंद्रेश्वर मंदिर, नागपंचमी पर उमड़ता है आस्था का सैलाब*
उज्जैन*👉विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर परिसर में स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर अपने आप में अनूठा और रहस्यमयी धार्मिक स्थल है। महाकाल मंदिर की तीसरी मंजिल पर विराजमान भगवान नागचंद्रेश्वर के कपाट वर्ष में केवल एक बार नागपंचमी के दिन श्रद्धालुओं के लिए खोले जाते हैं। कपाट खुलने के बाद भक्तों को करीब 24 घंटे तक भगवान के दर्शन का अवसर मिलता है। इसके बाद मंदिर के कपाट पुनः बंद कर दिए जाते हैं।
नागचंद्रेश्वर मंदिर में भगवान शिव और माता पार्वती की दुर्लभ प्रतिमा सात फनों वाले नाग के आसन पर विराजमान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह प्रतिमा अत्यंत प्राचीन है और इसका संबंध नागराज तक्षक से माना जाता है।
पौराणिक कथा के अनुसार नागराज तक्षक ने भगवान शिव की कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अमरत्व का वरदान दिया। इसके बाद तक्षक ने भगवान शिव के सान्निध्य में रहने की इच्छा व्यक्त की। मान्यता है कि इसी कारण नागचंद्रेश्वर मंदिर में भगवान शिव नाग के आसन पर विराजमान हैं।
मंदिर के वर्ष में केवल एक दिन खुलने को लेकर भी धार्मिक मान्यता जुड़ी हुई है। कहा जाता है कि नागराज तक्षक वर्षभर यहां तपस्या करते हैं और उनकी साधना में कोई व्यवधान न हो, इसलिए मंदिर के कपाट सामान्य दिनों में बंद रहते हैं। नागपंचमी के दिन ही श्रद्धालुओं को भगवान नागचंद्रेश्वर के दुर्लभ दर्शन प्राप्त होते हैं।
महाकाल मंदिर की बहुमंजिला संरचना में सबसे नीचे भगवान महाकालेश्वर, उसके ऊपर ओंकारेश्वर और सबसे ऊपरी मंजिल पर नागचंद्रेश्वर मंदिर स्थित है। नागपंचमी के अवसर पर देशभर से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं और दुर्लभ दर्शन कर भगवान नागचंद्रेश्वर से सुख, समृद्धि और परिवार की मंगलकामना करते हैं।
वर्ष में एक बार खुलने वाले इस मंदिर के दर्शन को श्रद्धालु अत्यंत सौभाग्य और पुण्य का अवसर मानते हैं।
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