अयोध्या30अप्रैल26*19 दिन बाद लौटा बेटा… पिता की आंखें दरवाज़े पर ही ठहर गई थीं
सऊदी में रुका रहा पार्थिव शरीर
गांव में हर दिन उम्मीद और बेबसी की लड़ाई चलती रही
पूर्व विधायक अब्बास अली जैदी ‘रुश्दी मियां’ बने सहारा
भेलसर(अयोध्या)रुदौली क्षेत्र के परसन पुरवा मजरे बारी का वो घर पिछले 19 दिनों से जैसे ठहर सा गया था। दरवाज़े पर बैठा एक बूढ़ा पिता हर आहट पर चौंक जाता… शायद इस बार उसका बेटा आ गया हो। लेकिन हर बार उम्मीद टूटती रही।
सुरेंद्र लोधी, जो सऊदी अरब में मेहनत-मजदूरी कर अपने परिवार का सहारा बने हुए थे, उनके निधन की खबर 5 अप्रैल को जैसे ही घर पहुंची, पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। लेकिन असली दर्द तो तब शुरू हुआ, जब उनका पार्थिव शरीर भी अपने वतन नहीं लौट सका।
बुजुर्ग पिता अपने बेटे को आखिरी बार देखने के लिए दर-दर भटकते रहे। कभी अधिकारियों के दफ्तर, कभी जनप्रतिनिधियों के दरवाजे… लेकिन हर जगह सिर्फ आश्वासन मिला, समाधान नहीं।
9 अप्रैल को पवन राजपूत द्वारा सोशल मीडिया पर वीडियो जारी किए जाने के बाद मामला धीरे-धीरे लोगों की नजरों में आया और हलचल बढ़ी लेकिन इंतजार की घड़ियां कम नहीं हुईं।
उधर घर के आंगन में हर दिन एक ही सवाल गूंजता रहा “क्या हमारा बेटा कभी घर लौटेगा?”
इसी बीच जब मामला समाजवादी पार्टी सांसद अवधेश प्रसाद एवं रुदौली के पूर्व विधायक, पूर्व मंत्री अब्बास अली जैदी उर्फ रुश्दी मियां तक पहुंचा, तो उन्होंने इसे सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि एक परिवार का दर्द समझा। वह खुद पीड़ित परिवार के घर पहुंचे, उनके आंसू पोंछे और मदद का भरोसा दिया।
सांसद अवधेश प्रसाद एवं रुश्दी मियां ने न सिर्फ आर्थिक सहायता दी, बल्कि संबंधित अधिकारियों से लगातार संपर्क में रहकर पूरी प्रक्रिया को तेज कराया। उन्होंने यहां तक कहा कि जरूरत पड़ी तो पार्थिव शरीर को भारत लाने का पूरा खर्च खुद उठाएंगे और उन्होंने अपना वादा निभाया भी।
सऊदी में जहां सुरेंद्र का पार्थिव शरीर रखा गया था, वहां मेराज अंसारी को भेजा गया। उन्होंने अल बिसा में रुककर जावेद तेली की मदद से जरूरी कागजी प्रक्रिया पूरी करवाई। इस पूरे दौरान हर कदम पर रुश्दी मियां की नजर और प्रयास जुड़े रहे।
आखिरकार 19 दिनों की लंबी, थकाऊ और दर्दभरी लड़ाई के बाद आज वह पल आया… जब सुरेंद्र अपने घर लौटे लेकिन इस बार खामोश।
लखनऊ एयरपोर्ट पर खुद रुश्दी मियां अपने साथियों और मृतक के पिता रामदेव लोधी के साथ मौजूद रहे। जब पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, तो पूरे इलाके में सन्नाटा और सिसकियां एक साथ गूंज उठीं।
जिस बेटे के लौटने की आस में पिता हर दिन दरवाजे तक आते थे… आज वही बेटा आया, लेकिन कंधों पर।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक ओर सिस्टम की धीमी रफ्तार को उजागर किया, तो दूसरी ओर इंसानियत की एक मिसाल भी पेश की जहां एक इंसान ने दूसरे के दर्द को अपना समझा। उनके साथ हंसराज लोधी, कमलेश यादव, बाबा फरीद अहमद, सुरजीत लोधी, अमरेश निषाद, नरेंद्र लोधी, डॉ प्रवेश लोधी, ब्लॉक अध्यक्ष विंध्याचल सिंह, सुरजीत चौहान, इकबाल, साजिद राइन, रंजीत विश्वकर्मा, राजित राम रावत, शाबान खान, ललई यादव, ब्लॉक प्रमुख अंकुर सेन यादव जी, सांसद प्रतिनिधि सरफराज नसरुल्लाह जी, अमरनाथ यादव, नितिन यदुवंशी जगदीश लोधी, शाह मसूद हयात गजाली मियां, विपिन यादव,चेयरमैन जब्बार अली, एडवोकेट विनोद कुमार लोधी व मृतक के पिता रामदेव लोधी लखनऊ एयरपोर्ट डेड बॉडी रिसीव करने पहुंचे।
आज परसन पुरवा में हर जुबान पर एक ही बात है “देर से सही, लेकिन बेटे को घर लाने वाला कोई तो था…”

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