अयोध्या19अक्टूबर25*हे राम पिता! जो मुझमें ना हो*
*जग का ऐसा कोई दोष नहीं।*
हे मेरे प्यारे राम!
हे अनाथनाथ! हे अशरणशरण! हे पतितपावन!
हे दीनबन्धो! हे अनाथबन्धो! हे अरक्षितरक्षक!
हे आर्तत्राणपरायण! हे निराधार के आधार!
हे अकारणकरुणावरुणालय!
हे साधनहीन के एकमात्र साधन!
हे असहाय के सहायक! क्या आप मेरे को जानते नहीं, मैं कैसा भड़्गप्रतिज्ञ(भग्नप्रतिज्ञ), कैसा कृतघ्न, कैसा अपराधी, कैसा विपरीतगामी, कैसा अकरण-करणपरायण हूँ। अनंत दुःखों के कारणस्वरूप भोगों को भोगकर-जानकार भी आसक्त रहनेवाला, अहित को हितकर माननेवाला, बार-बार ठोकरें खाकर भी नहीं चेतनेवाला, आपसे विमुख होकर बार-बार दुःख पानेवाला, चेतकर भी न चेतनेवाला, जानकर भी न जाननेवाला मेरे सिवाय आपको ऐसा कौन मिलेगा? अर्थात कोई नहीं मिलेगा प्रभु।
😭😭😭😭😭
दया करो हे दया निधान!
मिटाईये दु:ख दोष संताप।
😭😭😭😭😭😭
जिन चरणों की सेविका महालक्ष्मी स्वयमेव।
जन्म जन्म मुझको मिले उन चरणों की सेव।।
🌹#शुभसंन्ध्यामंगलम्🌹
🙏#जयश्रीसीताराम🚩
🙏🏻🙏🏻🚩🚩🚩🚩🙏🏻🙏🏻

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