September 7, 2026

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अयोध्या 7 सितंबर 26**अयोध्या में सिस्टम की बेरुखी: 90 साल की बुजुर्ग 5 साल से खंडहर में रहने को मजबूर

अयोध्या 7 सितंबर 26**अयोध्या में सिस्टम की बेरुखी: 90 साल की बुजुर्ग 5 साल से खंडहर में रहने को मजबूर

अयोध्या 7 सितंबर 26**अयोध्या में सिस्टम की बेरुखी: 90 वर्षीय ब्रद्धा 5 साल से खंडहर में रहने को मजबूर, गुहार सुनने वाला कोई नहीं*

अयोध्या। उत्तर प्रदेश सरकार जहां गरीबों को पक्का मकान और शौचालय देने का दावा करती है, वहीं अयोध्या जनपद के रामनगर तिवारीपुर ग्राम पंचायत से एक ऐसी मार्मिक तस्वीर सामने आई है जो सभी सरकारी दावों की पोल खोलती है। यहां की 90 वर्षीय वृद्धा “राजपति तिवारी” पिछले 5 वर्षों से एक जर्जर खंडहर में जिंदगी काटने को मजबूर हैं। तस्वीर में साफ देखा जा सकता है कि उनका मिट्टी का मकान पूरी तरह टूट चुका है, छत टपकती है, दीवारें कभी भी गिर सकती हैं। बरसात में इस घर में रहना मौत को दावत देने जैसा है।
*चार बेटे, फिर भी बेसहारा:*
राजपति देवी के चार बेटे और बहुएं हैं, लेकिन सभी अलग रहते हैं। बूढ़े पति की तबीयत खराब रहती है और यह बुजुर्ग दंपति इसी असुरक्षित झोपड़ी में अकेले रहने को विवश है।
*5 साल से लगा रहीं दफ्तरों के चक्कर:*
बुजुर्ग का आरोप है कि प्रधानमंत्री आवास योजना और इज्जत घर (शौचालय) के लिए उन्होंने ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव, रोजगार सेवक से लेकर तहसील तक हर जगह गुहार लगाई, लेकिन सिर्फ आश्वासन मिला। 90 साल की उम्र में घर में शौचालय तक नहीं है, खुले में जाने को मजबूर हैं। कोटेदार से 9 किलो राशन मिलता है जिससे दो वक्त की रोटी भी मुश्किल है।
थक हार कर अब उन्होंने सीधे जिलाधिकारी अयोध्या को पत्र लिखकर मानवीय आधार पर जांच और आवास दिलाने की गुहार लगाई है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर प्रशासन ने जल्द ध्यान नहीं दिया तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। अब देखना होगा कि खबर वायरल होने के बाद जिला प्रशासन की नींद खुलती है या नहीं।

अयोध्या 7 सितंबर 26**अयोध्या में सिस्टम की बेरुखी: 90 वर्षीय ब्रद्धा 5 साल से खंडहर में रहने को मजबूर, गुहार सुनने वाला कोई नहीं*

अयोध्या। उत्तर प्रदेश सरकार जहां गरीबों को पक्का मकान और शौचालय देने का दावा करती है, वहीं अयोध्या जनपद के रामनगर तिवारीपुर ग्राम पंचायत से एक ऐसी मार्मिक तस्वीर सामने आई है जो सभी सरकारी दावों की पोल खोलती है। यहां की 90 वर्षीय वृद्धा “राजपति तिवारी” पिछले 5 वर्षों से एक जर्जर खंडहर में जिंदगी काटने को मजबूर हैं। तस्वीर में साफ देखा जा सकता है कि उनका मिट्टी का मकान पूरी तरह टूट चुका है, छत टपकती है, दीवारें कभी भी गिर सकती हैं। बरसात में इस घर में रहना मौत को दावत देने जैसा है।
*चार बेटे, फिर भी बेसहारा:*
राजपति देवी के चार बेटे और बहुएं हैं, लेकिन सभी अलग रहते हैं। बूढ़े पति की तबीयत खराब रहती है और यह बुजुर्ग दंपति इसी असुरक्षित झोपड़ी में अकेले रहने को विवश है।
*5 साल से लगा रहीं दफ्तरों के चक्कर:*
बुजुर्ग का आरोप है कि प्रधानमंत्री आवास योजना और इज्जत घर (शौचालय) के लिए उन्होंने ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव, रोजगार सेवक से लेकर तहसील तक हर जगह गुहार लगाई, लेकिन सिर्फ आश्वासन मिला। 90 साल की उम्र में घर में शौचालय तक नहीं है, खुले में जाने को मजबूर हैं। कोटेदार से 9 किलो राशन मिलता है जिससे दो वक्त की रोटी भी मुश्किल है।
थक हार कर अब उन्होंने सीधे जिलाधिकारी अयोध्या को पत्र लिखकर मानवीय आधार पर जांच और आवास दिलाने की गुहार लगाई है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर प्रशासन ने जल्द ध्यान नहीं दिया तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। अब देखना होगा कि खबर वायरल होने के बाद जिला प्रशासन की नींद खुलती है या नहीं।

अयोध्या। उत्तर प्रदेश सरकार जहां गरीबों को पक्का मकान और शौचालय देने का दावा करती है, वहीं अयोध्या जनपद के रामनगर तिवारीपुर ग्राम पंचायत से एक ऐसी मार्मिक तस्वीर सामने आई है जो सभी सरकारी दावों की पोल खोलती है। यहां की 90 वर्षीय वृद्धा “राजपति तिवारी” पिछले 5 वर्षों से एक जर्जर खंडहर में जिंदगी काटने को मजबूर हैं। तस्वीर में साफ देखा जा सकता है कि उनका मिट्टी का मकान पूरी तरह टूट चुका है, छत टपकती है, दीवारें कभी भी गिर सकती हैं। बरसात में इस घर में रहना मौत को दावत देने जैसा है।
*चार बेटे, फिर भी बेसहारा:*
राजपति देवी के चार बेटे और बहुएं हैं, लेकिन सभी अलग रहते हैं। बूढ़े पति की तबीयत खराब रहती है और यह बुजुर्ग दंपति इसी असुरक्षित झोपड़ी में अकेले रहने को विवश है।
*5 साल से लगा रहीं दफ्तरों के चक्कर:*
बुजुर्ग का आरोप है कि प्रधानमंत्री आवास योजना और इज्जत घर (शौचालय) के लिए उन्होंने ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव, रोजगार सेवक से लेकर तहसील तक हर जगह गुहार लगाई, लेकिन सिर्फ आश्वासन मिला। 90 साल की उम्र में घर में शौचालय तक नहीं है, खुले में जाने को मजबूर हैं। कोटेदार से 9 किलो राशन मिलता है जिससे दो वक्त की रोटी भी मुश्किल है।
थक हार कर अब उन्होंने सीधे जिलाधिकारी अयोध्या को पत्र लिखकर मानवीय आधार पर जांच और आवास दिलाने की गुहार लगाई है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर प्रशासन ने जल्द ध्यान नहीं दिया तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। अब देखना होगा कि खबर वायरल होने के बाद जिला प्रशासन की नींद खुलती है या नहीं।

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