अनूपपुर म0प्र003अप्रैल24*स्वामी रामानुजाचार्य की दृष्टि भारतीय दर्शन एवं संस्कृति में प्रतिबिंबित होती है…
प्रो. श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी (कुलपति)
अनूपपुर( मध्यप्रदेश राजेश शिवहरे) इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय अमरकंटक में आयोजित ‘विद्यमान परिवेश में विशिष्टाद्वैत की सार्थकता’ विषयक विशेष व्याख्यान में मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए पद्मभूषण से सम्मानित त्रिडण्डी चिन्ना श्रीमन्ननारायण जेवर स्वामी ने कहा कि स्थावर हो अथवा जंगम, समस्त सृष्टि का निर्माण सर्वशक्तिमान सत्ता अथवा ईश्वर ने किया है. हर कण को संचालित करने वाली एक ही शक्ति है. यह हम सभी का दायित्व है कि हम ईश्वर की बनाई सृष्टि का संरक्षण करें, उसके सौंदर्य को बनाए रखें, यही जनसेवा, जीव सेवा, नारायण सेवा है. उन्होंने कहा कि स्वामी रामानुजाचार्य का विशिष्टाद्वैत दर्शन संसार में भ्रम के लिए स्थान नहीं है बल्कि सबकुछ सत्य है। उन्होंने विशिष्टाद्वैत को सहज रूप में परिभाषित करते हुए कहा कि अनेक इकाइयों से एक की निर्मिति होती है जो समग्र होती है। यह समग्र रूप में निर्मित एक ही विशिष्टाद्वैत है.उन्होंने विशिष्टाद्वैत की प्रासंगिकता पर चर्चा करते हुए कहा कि यह दर्शन हमें यह सीख देता है कि हम सृष्टि के सभी तत्वों का सम्मान तथा संरक्षण करें. यह दर्शन सभी को प्रकृति के सम्मान एवं संवर्धन के लिए प्रेरित करता है. उन्होंने आगे कहा कि हमको दूसरों का मत परिवर्तन कर उनके विश्वास को बदलना नहीं चाहिए. स्वामी ने कहा कि विशिष्टाद्वैत दर्शन आने वाले समय में भी विश्व का मार्गदर्शन करता रहेगा। स्वामी ने अपने व्याख्यान का आरंभ करते हुए कहा कि यह मोनोलॉग नहीं बल्कि डायलाग होना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को समझाते हुए कहा कि यदि समर्पित होकर प्रयत्न किया जाय तो कोई भी स्वप्न असंभव नहीं होता। अपने व्याख्यान के अंत में स्वामी जी ने लोगों की शंकाओं का समाधान किया और उन्हें सही रास्ता सुझाया. स्वामी जी का विश्वविद्यालय में स्वागत करते हुए प्रो. श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी ने कहा कि बहुत सौभाग्य से संतों का दर्शन प्राप्त होता है। उन्होंने कहा त्रिडण्डी चिन्ना श्रीमन्ननारायण जेवर स्वामी जी का आगमन तथा आशीर्वाद हम सभी को लाभान्वित करेगा। उन्होंने आगे कहा कि विशिष्टाद्वैत दर्शन आत्मा-परमात्मा, लोक-परलोक सभी के समन्वय की दृष्टि से हमको संपन्न करता है। उन्होंने आगे कहा कि स्वामी रामानुजाचार्य की दृष्टि भारतीय दर्शन एवं संस्कृति हेतु समन्वयकारी और संवर्धनकारी रही है। कार्यक्रम का संचालन प्रो. प्रबुद्ध मिश्रा ने किया और धन्यवाद ज्ञापन दर्शन शास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. गोविंद मिश्रा ने किया। कार्यक्रम का आयोजन लक्ष्मण हावानुर सभागार में आयोजित किया गया जिसमें अध्यापकों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों और संत समाज ने भागीदारी की।

More Stories
बागपत2अगस्त26*कबड्डी खिलाड़ी मोनू की आज शामली में गोली मारकर हत्या कर दी गई।
लखनऊ2अगस्त26*बिजली समाधान योजना अंतर्गत 1 अगस्त से 31 अगस्त 2026 तक प्रदेशभर में विशेष समाधान शिविर लगाए जा रहे हैं।
नई दिल्ली*रविवार, 02 अगस्त 2026 पर यूपीआजतक न्यूज चैनल के मुख्य समाचार*