हरदोई8जुलाई26*बाप जहरखुरान,बेटा साइबर शातिर! हरदोई के दाताराम और हर्षित का खेल बेनकाब बेहोश कर खाते तक साफ…
हरदोई पिहानी*रोडवेज बस में सफर कर रहे मुसाफिरों को पहले मीठी बातों में फंसाना, फिर नशीला-जहरीला पदार्थ सुंघाकर बेहोश करना, मोबाइल-पर्स-एटीएम कार्ड उड़ाना और उसके बाद बैंक खातों तक रकम साफ कर देना—फतेहपुर पुलिस ने ऐसे ही एक खतरनाक बाप-बेटे के अपराध मॉडल का पर्दाफाश किया है। इस मामले में #हरदोई के पिहानी थाना क्षेत्र के मोहल्ला मिश्राना निवासी हर्षित कुमार जोशी को गिरफ्तार किया गया है। उसके कब्जे से दो मोबाइल फोन और 1 लाख 25 हजार रुपये नकद बरामद किए गए हैं। लेकिन इस कहानी का असली और ज्यादा खतरनाक किरदार है उसका पिता दाताराम जोशी उर्फ जेंटर, जो पुलिस के मुताबिक जहरखुरानी का पुराना खिलाड़ी, पिहानी थाने का हिस्ट्रीशीटर और कई मुकदमों में नामजद अपराधी है।
#फतेहपुर पुलिस की जांच में जो तस्वीर उभरी, वह चौंकाने वाली है। आरोप है कि दाताराम उर्फ जेंटर रोडवेज बसों में अकेले सफर कर रहे ऐसे यात्रियों को चिन्हित करता था, जिनके पास मोबाइल, पर्स, एटीएम कार्ड, आधार कार्ड और नकदी हो। पहले दोस्ताना अंदाज में बातचीत, फिर भरोसा, और मौका मिलते ही नशीला या जहरीला पदार्थ सुंघाकर शिकार को अचेत—यही इस गिरोह का तरीका था। इसके बाद यात्रियों का मोबाइल, पर्स, एटीएम कार्ड और जरूरी कागजात पार कर दिए जाते थे। यानी सफर कर रहा मुसाफिर समझता था कि सामने बैठा शख्स हमसफर है, जबकि हकीकत में वह उसकी जेब ही नहीं, उसका बैंक बैलेंस भी नाप चुका होता था।
यहीं से इस गिरोह की दूसरी परत शुरू होती थी, जहां मैदान में उतरता था बेटा हर्षित। पुलिस पूछताछ के मुताबिक, दाताराम चोरी किए गए मोबाइल, एटीएम कार्ड और आधार कार्ड उसे सौंप देता था। इसके बाद हर्षित फर्रुखाबाद, शाहजहांपुर और लखनऊ जैसे शहरों में जाकर बैंक कस्टमर केयर के जरिए एटीएम पिन रीसेट कराता, मोबाइल पर आए ओटीपी से नया पिन जनरेट करता और खातों से रकम निकाल लेता था। एटीएम की सीमा पूरी होने पर मॉल और दुकानों पर खरीदारी, फिर चोरी किए गए मोबाइल में यूपीआई आईडी चलाकर खातों से पैसे ट्रांसफर करना—यानी बस में जहरखुरानी से शुरू हुआ खेल सीधे डिजिटल बैंक फ्रॉड तक पहुंचता था।
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ, जब फतेहपुर के कुलदीप कुमार और विवेक कुमार ने रोडवेज बस यात्रा के दौरान जहरखुरानी कर सामान चोरी और बैंक खातों से रकम उड़ाए जाने की शिकायत दर्ज कराई। जांच में सामने आया कि दोनों पीड़ितों के खातों से 98,500 रुपये और 1.44 लाख रुपये निकाले गए। इसके बाद साइबर क्राइम थाना और क्राइम डिटेक्शन टीम ने इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर जाल बिछाया और 1 जुलाई की रात ज्वालागंज बस स्टैंड से हर्षित को दबोच लिया।
अब पुलिस की नजर इस पूरे खेल के बड़े चेहरे दाताराम उर्फ जेंटर और गिरोह के बाकी सदस्यों पर है। साफ है, यह कोई साधारण चोरी नहीं थी; यह बाप की जहरखुरानी और बेटे की साइबर चालाकी से चलने वाला ऐसा गिरोह था, जो मुसाफिर को सीट पर बेहोश कर उसके बैंक खाते तक साफ कर देता था।

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