July 22, 2026

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सुल्तानपुर21जुलाई26*सिर पर धारदार हथियार से हमला, लाठी-डंडों से पीटने का आरोप; पीड़ित लखनऊ ट्रॉमा सेंटर के आईसीयू में भर्ती, 

सुल्तानपुर21जुलाई26*सिर पर धारदार हथियार से हमला, लाठी-डंडों से पीटने का आरोप; पीड़ित लखनऊ ट्रॉमा सेंटर के आईसीयू में भर्ती, 

सुल्तानपुर21जुलाई26*सिर पर धारदार हथियार से हमला, लाठी-डंडों से पीटने का आरोप; पीड़ित लखनऊ ट्रॉमा सेंटर के आईसीयू में भर्ती, 

*आईसीयू में जिंदगी की जंग लड़ रहा युवक,परिजनों का आरोप जानलेवा हमले को पुलिस ने सामान्य धाराओं में दर्ज कर किया कमजोर*

सिर पर धारदार हथियार से हमला, लाठी-डंडों से पीटने का आरोप; पीड़ित लखनऊ ट्रॉमा सेंटर के आईसीयू में भर्ती, उच्च अधिकारियों से न्याय की गुहार

सुल्तानपुर। कूरेभार थाना क्षेत्र के फूलपुर गांव में हुए कथित जानलेवा हमले ने पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़ित कालीदीन पाण्डेय के परिजनों का आरोप है कि आरोपियों ने पहले युवक को घर बुलाया, फिर विवाद के दौरान सिर पर धारदार हथियार से हमला कर लहूलुहान कर दिया। इसके बाद कई लोगों ने मिलकर लाठी-डंडों से बेरहमी से पिटाई की और घायल अवस्था में सड़क किनारे छोड़कर फरार हो गए। परिजनों के अनुसार, सुबह गंभीर हालत में घायल युवक को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल से उसे लखनऊ ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया, लेकिन पीड़ित की बहन अकेले होने के कारण सुल्तानपुर नेशनल हॉस्पिटल वापस लेकर चली आई जहा वह आईसीयू में भर्ती है और उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि घटना में जानलेवा हमला होने, सिर पर गंभीर चोट आने और युवक के आईसीयू में भर्ती होने के बावजूद पुलिस ने मामले को हल्की धाराओं में दर्ज कर दिया। उनका कहना है कि शिकायत में गंभीर हमले और जान से मारने की धमकी का स्पष्ट उल्लेख होने के बाद भी एफआईआर में ऐसी धाराएँ नहीं लगाई गईं, जो घटना की वास्तविक गंभीरता को दर्शाती हों। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया है कि शिकायत करने के बाद उन्हें लगातार धमकियां मिल रही हैं कि यदि उन्होंने मामले को आगे बढ़ाया तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। इससे पूरा परिवार भय और दहशत के माहौल में जी रहा है। पीड़ित परिवार ने पुलिस अधीक्षक और अन्य उच्च अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कर मेडिकल रिपोर्ट एवं अन्य साक्ष्यों के आधार पर उचित कानूनी कार्रवाई करने तथा दोषियों पर गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते न्याय नहीं मिला तो वे उच्च न्यायालय और मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाने को विवश होंगे।

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