सिरोही राजस्थान 18 अप्रैल 26*भाजपा का लक्ष्य इमोशनील ड्रामा करके चुनाव में महिलाओं का वोट भुनाना – डिम्पल सिंदल
सिरोही *मैं बस इतना कहनी चाहती हूं कि BJP का महिलाओं को आरक्षण देने का तो सिर्फ बहाना था, असल में भाजपा का लक्ष्य इमोशनील ड्रामा करके चुनाव में महिलाओं का वोट भुनाना था।*
🔴देश की एक आम महिला होने के कारण मैं ये सवाल सरकार से पूछ रही हूं कि जब नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 में पास हो गया था, तो इसे तत्काल लागू क्यों नहीं किया गया ? जबकि उस समय कांग्रेस सहित पूरा विपक्ष चिल्ला रहा था कि महिलाओं को न्याय तभी मिलेगा, जब इस कानून को तुरंत लागू किया जाएगा। मगर तब भाजपा ने कहा कि ये जनगणना के बाद लागू होगा।
👉मगर अब बंगाल और तमिलनाडु चुनाव से पहले इन्हें महिलाओं को फिर याद आ गई…!!
😢ये कितने दुख की बात है न!…. कि BJP देश की महिलाओं को बेवकूफ समझती है!! जबकि देश की महिलाएं समझती हैं कि अगर वाकई सरकार महिलाओं को आरक्षण देना ही चाहती तो इसमें डिलिमिटेशन को न जोड़ा जाता……क्या सरकार को ये बात पता नहीं थी कि डिलिमिटेशन का मुद्दा देश के फेडरल स्ट्रक्चर से जुड़ा है, इस मुद्दे पर लंबी चर्चा किए बिना कुछ नहीं हो सकता।
🔴एक बात और कि अगर ये बिल पास भी हो गया होता तो गारंटी नहीं थी कि महिलाओं को आरक्षण मिल ही जाता। क्योंकि बिना डिलिमिटेशन के ये होगा नहीं। और किसी को पता ही नहीं है कि डिलिमिटेशन कब पूरा होगा ? भारत में आखिरी बार डिलिमिटेशन 2008 में हुआ था और अगला कब होगा, यह खुद सरकार को नहीं पता। अगर सरकार की नीयत साफ होती, तो इसे डिलिमिटेशन से नहीं जोड़ा जाता।
🔴2014 से देश में मोदी और BJP की सरकार है। इतने लंबे समय में यह बिल पहले भी लाया और लागू किया जा सकता था, क्योंकि 2010 में भाजपा द्वारा विरोध करने के बाद भी UPA सरकार में यह राज्यसभा से पास भी हो चुका था। मगर अभी तक इसे क्यों नहीं लाया और लागू किया गया, किसी के पास इसका जवाब है ?
👉सबसे बड़ी बात ये कि अगर सरकार महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना ही चाहती तो ये बिल केवल लोकसभा और विधानसभाओं पर ही क्यों लागू किया जाना था, आखिर महिलाओं को उच्च सदनों (Upper Houses) में प्रतिनिधित्व क्यों नहीं दिया गया?
और तो और आपको ये भी पता होगा कि भाजपा अपने कितनी महिला कार्यकर्ताओं को टिकट देती है……कितनों को सांसद-विधायक बनाती है
✅✅अगर BJP सच में महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाना चाहती तो अपनी पार्टी में टिकट वितरण से शुरुआत कर सकती थी।
🔴इस बिल में 33% आरक्षण के भीतर ओबीसी महिलाओं के लिए अलग से कोटा की कोई बात ही नहीं की गई। जबकि सबको पता है कि इसके बिना केवल उच्च वर्ग की महिलाओं को ही लाभ मिलेगा और पिछड़ी महिलाएं पीछे रह जाएंगी।
👉एक सबसे बड़ी बात अगर आपने ध्यान दिया होगा तो इस सरकार को महिलाओं की याद तभी आती है, जब-जब चुनाव नजदीक होता है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम सितंबर 2023 में तब लाया था, जब 2024 के चुनाव नजदीक थे। और अब जब महिलाओं की चिंता फिर से भाजपा को सताने लगी, जब तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के चुनाव सर पर हैं।
❌❌मैं बार-बार कह रही हूं कि जो लोग बिलकिस बानों के दरिंदो को माला पहनाते हैं, जो लोग IIT-BHU की लड़की के दुराचारियों का स्वागत केक काटकर करते हैं, जो लोग अंकिता भंडारी की तरह न जाने कितनी फूल जैसी बेटियों के कातिल हैं, जो लोग कुलदीप सेंगरों, बृजभूषणों, रामरहीमों और आसारामों जैसे वहशी दरिंदों को पालते हैं, वो लोग बेटियों-महिलाओं को न्याय कभी नहीं दे सकते।
🔴जो लोग मणिपुर की बेटियों को न्याय नहीं दे पाए, जो लोग अपनी पार्टी की कमान आज तक कभी किसी महिला को नहीं दे पाए……..उन लोगों से महिलाओं को न्याय की उम्मीद नहीं करना चाहिए, वर्ना धोखा और पाखंड के अलावा कुछ नहीं हासिल होगा!!
*निवेदक*
*देश की एक जागरूक नारी*

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