वाराणसी15सितम्बर24*वाराणसी समेत पूर्वांचल में बाढ़ से जन-जीवन अस्त* व्यस्त,
वाराणसी से प्राची राय की खास खबर यूपीआजतक*
वाराणसी । पूरे यूपी में गंगा ने अपना रौद्र रूप दिखाया है। गंगा के साथ ही वरुणा के जलस्तर में बढ़ाव प्रवाह ने पूर्वांचल के तटवर्ती इलाकों में हलचल पैदा कर दी है। तटवर्ती इलाकों के सैकड़ों घरों में गंगा वरुणा का पानी घुसने से अफरातफरी का माहौल है। लोग अपने घरों को छोड़कर राहत शिविरों और सुरक्षित ठिकानों को खोजने में लगे हुए हैं।
गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु पार, घाट डूबे
वाराणसी, चंदौली, जौनपुर, गाजीपुर, मऊ, बलिया, प्रयागराज, समेत यूपी के कई जिलों में बाढ़ से हालात बेकाबू हैं। वाराणसी में गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु पार कर गया है। बाढ़ का पानी काशी की गलियों में घुसने लगा है। दशाश्वमेध घाट की सीढ़ियों को पार करता हुआ पानी अब सड़क तक पहुंच गया है। काशी के महाश्मशान हरिश्चंद्र घाट और मणिकर्णिका घाट पर शवदाह के लिए लाइन लगी हुई है। यहां घाट को छोड़ गलियों और छतों पर शवदाह हो रहा है। लोग अपने जनों की बारी के लिए घंटों इंतज़ार कर रहे हैं। गंगा के बढ़ते जलस्तर के कारण अस्सी घाट सहित कई अन्य घाट जलमग्न हो गए
*शवदाह स्थल और गंगा आरती का जगह बदला*
गंगा के जलस्तर में वृद्धि के कारण शवदाह और गंगा आरती अब घाटों की बजाय गली और छतों पर हो रही है। पलट प्रवाह के कारण वरुणा नदी के किनारे स्थित निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है और वहां से लोगों का पलायन शुरू हो गया है। गंगा में नावों का संचालन भी बंद कर दिया गया है। नमो घाट पर बना “नमस्ते” का चिह्न भी पानी में डूब चुका है।
*बाढ़ मे घिरे लोंगो की चिंता बढी*
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गंगा और वरुणा के किनारे रहने वाले लोगों में चिंता बढ़ गई है। वाराणसी में लगभग 150 से अधिक लोगों ने अपने घर छोड़ दिए हैं और ऊंचाई वाले स्थानों पर शरण ले ली है। पांच हजार से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हो चुके हैं। तटवर्ती इलाकों के कई घरों में बाढ़ का पानी घुस चुका है, जिससे लोग किराए के मकानों में रह रहे हैं। वहीं कुछ लोग राहत शिविरों की शरण लिए हुए हैं।
2012 और 2020 में भी गंगा का जलस्तर 68 मीटर पार हुआ था
गंगा का जलस्तर इससे पहले 2012 में 17 सितंबर को 68.17 मीटर, 2015 में 68.79 मीटर, 2020 में 68.67 मीटर और 2023 में चार अगस्त को 68.30 मीटर तक पहुंचा था। केन्द्रीय जल आयोग के अनुसार, रविवार सुबह गंगा का जलस्तर 70.13 मीटर था, जबकि चेतावनी बिंदु 70.262 मीटर है। जलस्तर अभी भी काफी तेजी से बढ़ रहा है, जिससे जलस्तर चेतावनी बिंदु के पार हो गया है। वर्तमान में गंगा का जलस्तर 8 सेमी प्रति घंटे की रफ़्तार से बढ़ रहा है।
5000 हजार से ज्यादा की आबादी इस समय बाढ़ से प्रभावित है। अभी गंगा का पानी धीरे-धीरे कॉलोनियों में घुसने लगा है। करीब 200 परिवारों ने अपना घर छोड़ दिया है। जिला प्रशासन द्वारा राहत कैंप बनाए गए हैं। जिसमें लोगों की व्यवस्था की गई है। ।

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