लखनऊ3जुलाई26*निजीकरण की प्रक्रिया वापस ली जाए :संघर्ष समिति*
___,_____________________
*लखनऊ।* विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) द्वारा लगातार सातवें वर्ष बिजली की दरों में कोई वृद्धि न किए जाने के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा है कि यह प्रदेश के विद्युत कर्मचारियों, अभियंताओं एवं अधिकारियों की अथक मेहनत, समर्पण और बेहतर कार्य संस्कृति का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
संघर्ष समिति ने कहा कि नियामक आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से स्वीकार किया है कि विद्युत वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है तथा 11,602.24 करोड़ रुपये के नियामकीय सरप्लस (Regulatory Surplus) के कारण वर्ष 2026-27 में बिजली की दरें बढ़ाने की कोई आवश्यकता नहीं रही। प्रदेश में एटी एंड सी (AT&C) हानियों में लगातार कमी आई है, राजस्व संग्रह में अभूतपूर्व सुधार हुआ है, उपभोक्ता सेवाओं में उल्लेखनीय प्रगति हुई है तथा विद्युत व्यवस्था पहले की अपेक्षा कहीं अधिक सुदृढ़ हुई है। यही कारण है कि लगातार सात वर्षों से प्रदेश के उपभोक्ताओं पर बिजली दरों का कोई अतिरिक्त बोझ नहीं डाला गया।
संघर्ष समिति ने कहा कि जब प्रदेश सरकार स्वयं यह स्वीकार कर रही है कि विद्युत क्षेत्र की वित्तीय एवं परिचालन स्थिति में व्यापक सुधार हुआ है, बिजली दरें बढ़ाने की आवश्यकता नहीं पड़ी है और ऊर्जा निगमों का प्रदर्शन लगातार बेहतर हुआ है, तो फिर निजीकरण के नाम पर पिछले दो वर्षों से ऊर्जा निगमों में औद्योगिक अशांति का वातावरण बनाए रखने का कोई औचित्य नहीं रह जाता।
संघर्ष समिति ने कहा कि इन सभी उपलब्धियों के पीछे बिजली कर्मचारियों और अभियंताओं की निष्ठा, कठिन परिश्रम और जनसेवा की भावना है। कर्मचारियों ने हर परिस्थिति में प्रदेश की जनता को निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की है। इसलिए कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाने के बजाय उन पर निजीकरण का संकट और दमनात्मक कार्रवाई थोपना न केवल अन्यायपूर्ण है बल्कि ऊर्जा क्षेत्र के हितों के भी प्रतिकूल है।
संघर्ष समिति ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि, ऊर्जा निगमों में व्याप्त औद्योगिक अशांति का वातावरण तत्काल समाप्त किया जाए। निजीकरण की प्रक्रिया एवं उससे संबंधित सभी कार्रवाई वापस ली जाए। मार्च 2023 के आंदोलन के दौरान विद्युत कर्मचारियों एवं अभियंताओं पर की गई सभी अनुशासनात्मक, दंडात्मक एवं उत्पीड़नात्मक कार्रवाई तत्काल वापस ली जाए। ऊर्जा निगमों में सौहार्दपूर्ण औद्योगिक संबंध स्थापित कर कर्मचारियों के साथ सम्मानजनक संवाद की प्रक्रिया प्रारंभ की जाए।
संघर्ष समिति ने विश्वास व्यक्त किया कि यदि सरकार कर्मचारियों और अभियंताओं के अनुभव, समर्पण और सहयोग पर भरोसा बनाए रखेगी, तो उत्तर प्रदेश का विद्युत क्षेत्र आने वाले वर्षों में भी देश के लिए उत्कृष्ट प्रदर्शन का उदाहरण बना रहेगा।

More Stories
भागलपुर23अगस्त26*श्रावणी मेला 2026 : धांधी बेलारी महा शिविर में शिव भक्ति के रंग में रंगे श्रद्धालु,
रायबरेली23अगस्त26*रायबरेली को 879 करोड़ रुपये की विकास योजनाओं की सौगात देंगे मुख्यमंत्री*
पूर्णिया23अगस्त26*कसबा में पहली बार महिला आयोग का ऐतिहासिक जनता दरबार