लखनऊ23जून26*अलीगंज अग्निकांड ने जहां एक तरफ प्रशासनिक तैयारी को खोल कर रख दिया, वहीं कई मासूमों की सांसे भी छीन ली…*
लखनऊ
एलडीए वीसी पत्रकारों पर कार्यवाही करने की बात करते हैं, अब जब बिल्डिंग में खामियां निकल रही हैं तो उनके विभाग द्वारा दी गई NOC, मानचित्र स्वीकृति और निरीक्षण पर कितने फुर्तीले होकर कार्यवाही करते हैं, यह अब समय ही बताएगा। ऐसा ना हो सबसे पहले खानापूर्ति करने वाले एलडीए वीसी ही हों…
लखनऊ में अलीगंज अग्निकांड में 15 मौतों ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाएं हैं…?
लखनऊ में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। हादसे में 15 लोगों की दर्दनाक मौत हुई है, जिनमें 3 महिलाएं और 12 पुरुष शामिल हैं। यह केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सुरक्षा मानकों और प्रशासनिक सतर्कता पर बड़ा प्रश्नचिह्न है। हर बड़े हादसे के बाद जांच, मुआवजे और कार्यवाही के दावों में मामला खत्म कर दिया जाता है, लेकिन सवाल बनता है और जवाबदेही भी बनती है…?
*आखिर कितनी जानों के जाने के बाद सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा…?*
यदि अग्नि सुरक्षा व्यवस्थाएं समय रहते दुरुस्त होती और मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाता, तो शायद कई परिवार आज अपने प्रियजनों को खोते नहीं। यह त्रासदी चेतावनी है, लापरवाही की, भ्रष्टाचार की, प्रशासनिक सुस्तेपन की, जिसकी कीमत इंसानी जानों से चुकाई जा रही है….
अब जरूरत केवल संवेदना व्यक्त करने की नहीं, बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय कर भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने की है। अब जरूरत है जिम्मेदार विभाग के मुख्याओं से लेकर नीचे स्तर के कर्मचारियों पर कार्यवाही की। अब जरूरत है जिम्मेदारों को इंसानी जानों के जाने के भुगतान की कीमत को चुकाने की…
आजतक शिकायतों को एलडीए एवं अन्य विभाग ने टालमटोल व ढिलाई के साथ भ्रष्टाचार को अपनाया है। भ्रष्ट विभाग से मदद पाकर भवन स्वामी फायदा कमाने के लिए बेगुनाहों की बली भी चढ़ा रहे हैं और यह प्रशासन हंस रहा है, बेहद दुखद घटना में यदि कोई प्रशासन या एलडीए या पुलिस विभाग के उच्च अधिकारी के बच्चे या प्रियजन होते तो समझते परिवार में सदस्य के जाने का दर्द….

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