लखनऊ23जुलाई26*केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण की एडवाइजरी पर तत्काल कार्रवाई करे पॉवर कॉरपोरेशन प्रबन्धन : संघर्ष समिति*
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*लखनऊ।* विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण द्वारा आगामी पीक सीजन में निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु जारी विस्तृत एडवाइजरी को गंभीरता से लेते हुए ऊर्जा निगमों में व्याप्त भारी मैनपावर की कमी को दूर करने के लिए पॉवर कॉरपोरेशन प्रबन्धन को तत्काल प्रभावी कार्रवाई का निर्देश दिया जाए। संघर्ष समिति ने कहा कि यदि पर्याप्त संख्या में नियमित एवं कुशल तकनीकी कर्मचारियों की भर्ती नहीं की गई तो केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के निर्देशों का पालन करना भी संभव नहीं होगा और भविष्य में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने वाली बिजली की मांग का सुरक्षित एवं विश्वसनीय प्रबंधन भी कठिन हो जाएगा।
संघर्ष समिति ने कहा कि विगत दोनों केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने अपनी एडवाइजरी में स्पष्ट रूप से निर्देश दिए हैं कि सभी वितरण कंपनियां 80 प्रतिशत से अधिक लोड वाले फीडरों एवं वितरण ट्रांसफार्मरों की पहचान करें, 75 प्रतिशत से अधिक लोड वाले पावर ट्रांसफार्मरों की समीक्षा करें, 90 प्रतिशत से अधिक लोड वाले ट्रांसफार्मरों की क्षमता तत्काल बढ़ाई जाए, लो-वोल्टेज क्षेत्रों की पहचान कर सुधार किया जाए, सब-स्टेशनों, फीडरों एवं ट्रांसफार्मरों का समय से पूर्व निवारक अनुरक्षण (Preventive Maintenance) किया जाए, मोबाइल ट्रांसफार्मर एवं आवश्यक स्पेयर उपलब्ध रखे जाएं, स्मार्ट मीटर डाटा एवं जी आई एस (GIS) आधारित नेटवर्क प्लानिंग अपनाई जाए तथा आपदा प्रबंधन एवं त्वरित बहाली की व्यवस्था मजबूत की जाए।
संघर्ष समिति ने कहा कि केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की यह एडवाइजरी पूरी तरह व्यावहारिक है, किंतु उत्तर प्रदेश में इसे लागू करने के लिए आवश्यक मैनपावर उपलब्ध ही नहीं है। प्रदेश में अब लगभग 3 करोड़ 73 लाख विद्युत उपभोक्ता हैं। लाखों किलोमीटर लंबा वितरण नेटवर्क, हजारों बिजलीघर (सब-स्टेशन), लाखों वितरण ट्रांसफार्मर तथा विशाल विद्युत तंत्र के संचालन एवं अनुरक्षण का दायित्व ऊर्जा निगमों पर है, जबकि कर्मचारियों की संख्या लगातार घटते-घटते 30 हजार से भी कम रह गई है।
संघर्ष समिति ने कहा कि पिछले वर्षों में बड़े पैमाने पर अनुभवी एवं कुशल संविदा कर्मचारियों को सेवा से हटाया गया है। नियमित पदों पर लंबे समय से भर्ती नहीं हुई है। परिणामस्वरूप फील्ड स्तर पर अनुरक्षण, दोष निवारण, लाइन पेट्रोलिंग, ट्रांसफार्मर बदलने, ओवरलोड फीडरों के सुदृढ़ीकरण तथा आपातकालीन मरम्मत जैसे कार्य गंभीर रूप से प्रभावित हो रहे हैं।
संघर्ष समिति ने कहा कि जब पर्याप्त तकनीकी कर्मचारी ही उपलब्ध नहीं हैं, तब केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुसार प्रत्येक फीडर, ट्रांसफार्मर एवं सब-स्टेशन की समयबद्ध समीक्षा, निवारक अनुरक्षण तथा क्षमता वृद्धि का कार्य व्यवहारिक रूप से संभव नहीं है। इसका सीधा असर आगामी पीक सीजन में विद्युत आपूर्ति की विश्वसनीयता पर पड़ेगा।
संघर्ष समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश में हर वर्ष बिजली की अधिकतम मांग नया रिकॉर्ड बना रही है और आने वाले समय में यह मांग अब तक के सर्वोच्च स्तर पर पहुंचने की संभावना है। इसके बावजूद ऊर्जा निगम प्रबंधन मैनपावर की गंभीर समस्या की ओर आंखें मूंदे हुए है। केवल आदेश जारी कर देने से बिजली व्यवस्था नहीं चल सकती; इसके लिए पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित इंजीनियरों, तकनीशियनों एवं कर्मचारियों की उपलब्धता अनिवार्य है।
संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री से मांग की कि ऊर्जा निगमों में सभी रिक्त पदों पर तत्काल नियमित भर्ती की जाए, हटाए गए कुशल संविदा कर्मियों को पुनः कार्य पर लिया जाए, फील्ड स्टाफ की संख्या बढ़ाई जाए तथा वितरण तंत्र को मजबूत करने के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं।
तभी केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की एडवाइजरी का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित होगा और प्रदेश के उपभोक्ताओं को आगामी पीक सीजन में निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराई जा सकेगी।

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