लखनऊ23अप्रैल24*ऐसा क्यों है कि कुछ पुलिसकर्मियों की वजह से पूरा पुलिस महकमा बदनाम हो रहा है…?*
लखनऊ*राजधानी लखनऊ में पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ के पूर्वी जोन की बात की जाए, तो कुछ पुलिसकर्मी जैसे थाना गोमतीनगर के विराम खंड चौकी में तैनात उप निरीक्षक राजन केसरी, थाना विभूति खंड के विशेष खंड चौकी में तैनात उप निरीक्षक श्वेता सिंह और उप निरीक्षक राजू पाण्डेय आदि कार्यवाही करने में फायदा ढूंढना और विवेचना करना हो तो सिर्फ फायदा ढूंढना, ऐसे कर्मयोगी पुलिसकर्मियों की वजह से बाकी पुलिसकर्मियों को भी उसी नज़र से देखा जा रहा है। क्या उच्च अधिकारी इनसे वाकिफ नहीं हैं…
अक्सर देखा है करता कोई है और भरता कोई है। वैसे ही पीड़ित उम्मीद करता है न्याय की और न्याय को बेचने वाले ऐसे पुलिसकर्मी क्यों ना कोसे जाएं, क्या कार्यशैली रखते होंगे, क्या गुड वर्क में सत्यता होगी…?
ज्यादातर पूर्वी के पत्रकार पुलिसकर्मियों से उम्मीद करते हैं कि जिम्मेदारी और कर्तव्य भरा कार्य कर अच्छा व्यवहार रखें। पत्रकारों की नज़र में सम्मान दीजिए और सम्मान लीजिए, पर जो पुलिसकर्मी सम्मान छोड़िए पत्रकारों के सामने से कटने लगे, आरोपियों के साथ कोना पकड़ लें, तो उन पुलिसकर्मियों की कमाई का ठिकाना नहीं, उम्मीद नहीं कर सकते, कितना और कैसे कैसे कमाई का जरिया ढूंढ रहे होंगे। कब किसको आरोपी बना दें, कब किसको आरोपों से मुक्त करा दें…
गंध फैलाने वाले ऐसे पुलिसकर्मी क्या वर्दी की गरिमा बनाए रखेंगे जो अवैध, आरोपी और अन्याय के आगे नीलाम कर रहे हैं वर्दी की जिम्मेदारी और कर्तव्य। न्याय और कार्यशैली को दूषित करते ऐसे पुलिसकर्मियों की वजह से पूरा पुलिस महकमा बदनाम हो रहा है। ऐसे पुलिसकर्मियों के साथ बैठने उठने वाले पुलिसकर्मी भी कहीं इनकी तरह न हो जाएं या हो रहे हों। वहीं पत्रकारों से अच्छा व्यवहार पुलिसकर्मियों को नई पहचान ही प्रदान करता है। तो पुलिस विभाग को ऐसे लज्जित पुलिसकर्मियों की क्या आवश्यकता…?

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