मैहर २ जुलाई २६*मैहर में गोपनीय जानकारी लीक! आखिर जांच के दस्तावेज माफियाओं तक कैसे पहुंचे? कलेक्टर कार्यालय पर उठे बड़े सवाल*
*📝 शिवम पाठक प्रदेश उपाध्यक्ष राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा परिषद ((रजि.) एवं सह संपादक राष्ट्रीय दैनिक उज्जवल समाचार पत्र📝*
*मैहर।* जिले में अवैध खनन, स्टोन क्रेशर और खनिज परिवहन से जुड़े मामले ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायतकर्ता द्वारा कलेक्टर को सौंपे गए गोपनीय दस्तावेज और साक्ष्य कथित रूप से जांच शुरू होने के बाद संबंधित लोगों तक पहुंच गए। इसके बाद पत्रकार को धमकाने और शिकायत वापस लेने का दबाव बनाए जाने के आरोप लगे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब शिकायत, वीडियो और दस्तावेज केवल कलेक्टर कार्यालय और जांच टीम के पास थे, तो वे बाहर कैसे पहुंचे? आखिर वह कौन है जिसने गोपनीय जानकारी लीक की?
यदि जांच से जुड़े दस्तावेज वास्तव में बाहर पहुंचे हैं, तो यह केवल सूचना लीक होने का मामला नहीं, बल्कि पूरी जांच प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल है। क्या प्रशासन इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराएगा या फिर जिम्मेदार लोगों को बचाने की कोशिश होगी?
*मामले ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं—*
गोपनीय दस्तावेज बाहर किसके माध्यम से पहुंचे?
पत्रकार को धमकाने वालों तक जानकारी कैसे पहुंची?
क्या जांच प्रक्रिया की गोपनीयता की अनदेखी हुई?
यदि जानकारी प्रशासनिक स्तर से लीक हुई है, तो जिम्मेदार कौन है?
*अब निगाहें मैहर कलेक्टर और संभागीय प्रशासन पर हैं। जनता जानना चाहती है कि दोषियों पर कार्रवाई होगी या मामला फाइलों में दब जाएगा।*

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