भारत02फरवरी*विनिवेश के जरिये 51,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य, 39,000 से अधिक प्रक्रियाएं कीं खत्म
सरकार ने 2023-24 में विनिवेश के जरिये 51,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है। यह पिछली बार की तुलना में कम है। सरकार के स्वामित्व वाली फर्मों में विनिवेश राजस्व बढ़ाने का एक प्रमुख उपाय है, जिसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को बुनियादी ढांचे के निर्माण पर रिकॉर्ड राशि खर्च करने में मदद की है।
मौजूदा वित्त वर्ष में सरकार का विनिवेश लक्ष्य पहले 65,000 करोड़ था, जिसे बाद में संशोधित कर 50,000 करोड़ रुपये कर दिया गया, क्योंकि राज्य के स्वामित्व वाली फर्मों के नियोजित निजीकरण अगले वित्तीय वर्ष के लिए टल गए। बीईएमएल और शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के निजीकरण की प्रक्रिया में कानूनी पेच फंसने के बाद अब सितंबर, 2023 तक आईडीबीआई बैंक के विनिवेश से 82,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य है।
राष्ट्रीय वित्तीय सूचना रजिस्ट्री की स्थापना
सरकार ने वित्तीय और सूचना के केंद्रीय भंडार के रूप में काम करने के लिए राष्ट्रीय वित्तीय सूचना रजिस्ट्री स्थापित करने का फैसला भी लिया है। इससे ऋण का कुशल प्रवाह संभव होगा और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, वित्तीय स्थिरता भी बढ़ेगी। एक नई विधायी रूपरेखा इस क्रेडिट पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को विनियमित करेगी और इसे आरबीआई के साथ परामर्श कर डिजाइन किया जाएगा।
39,000 से अधिक प्रक्रियाएं कीं खत्म
वित्तीय क्षेत्र में अनुपालना को सरल बनाने, आसान करने और इसकी लागत को कम करने के लिए विनियामकों से व्यापक समीक्षा करने का अनुरोध किया जाएगा। इसके लिए आम लोगों और विनियमित संस्थाओं से प्राप्त सुझावों पर विचार किया जाएगा। वहीं, व्यापारिक सुगमता को बढ़ावा देने के लिए 39,000 से अधिक अनुपालनों को कम किया गया है और 3400 से अधिक विधिक प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से हटाया गया है।
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