May 11, 2026

UPAAJTAK

TEZ KHABAR, AAP KI KHABAR

पूर्णिया बिहार11मई26* आइए, पूर्णिया की गोद में बसे इतिहास और आस्था को निहारिए*

पूर्णिया बिहार11मई26* आइए, पूर्णिया की गोद में बसे इतिहास और आस्था को निहारिए*

पूर्णिया बिहार11मई26* आइए, पूर्णिया की गोद में बसे इतिहास और आस्था को निहारिए*

मोहम्मद इरफान कामिल यूपी आज तक न्यूज़ चैनल पूर्णिया डीवीजन बिहार

पूर्णिया*जहां मां कामाख्या का आशीष है, वहां जलालगढ़ की फिजाओं में परिंदों का तराना है*

पूर्णिया बिहार । धरती के इस कोने में बिहार का एक ऐसा शहर बसा है जो _आस्था, आज़ादी और सुकून तीनों का संगम_ है – _हमारा पूर्णिया_।

यहां _मां कामाख्या शक्तिपीठ_ के दर पर शीश झुकाते ही मन को अजीब सी शांति मिलती है। मंदिर की घंटियों के साथ बहती _सौरा नदी_ की लहरें जैसे सारे तनाव धो देती हैं। कुछ ही दूरी पर _जलालगढ़ का किला_ _सदियों का इतिहास समेटे खड़ा है_, जहां सुबह-शाम देसी-परदेसी पंछियों की चहचहाहट कानों में मिश्री घोल देती है।

पूर्णिया सिर्फ मंदिर और किले का शहर नहीं है। यहां _रानीपतरा का सर्वोदय आश्रम_ _बापू के विचारों को आज भी जिंदा रखे हुए है_। _प्राकृतिक चिकित्सालय_ में मिट्टी-पानी-हवा से इलाज की खुशबू है, तो _खादी ग्राम उद्योग_ में चरखे की घर-घर घूमती वो आवाज़ है जिसे सुनकर _राष्ट्रपिता महात्मा गांधी_ ने यहां वक्त गुज़ारा था। उसी आंगन में _विनोबा भावे_ और _लोकनायक जयप्रकाश नारायण_ के कदमों के निशान आज भी महसूस होते हैं।

_मां पूर्णदेवी_ और _कालीबाड़ी शक्तिपीठ_ के परिसर की हरी-भरी छांव, मंदिर की सीढ़ियों पर बैठकर सौरा का किनारा निहारना – _ये वो लम्हे हैं जो कैमरे में नहीं, दिल में कैद होते हैं_।

_और हां, पूर्णिया सिटी से एक रास्ता सीधे चिमनी बाजार को जाता है_ जहां बरसों से *एक बहुत बड़े बुजुर्ग का मुकद्दस मजार* है। यहां _हर साल उर्स के मौके पर मेला लगता है_। उस दिन _मज़हब की दीवारें गिर जाती हैं_ – हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, सभी अकीदतमंद एक साथ मजार पर हाज़िरी देते हैं, चादरपोशी करते हैं और अपनी मुरादें मांगते हैं। _कहते हैं, सच्चे दिल से मांगी हर दुआ यहां कुबूल होती है_।

चाहे चिलचिलाती धूप हो या रिमझिम फुहार, _पूर्णिया हर मौसम में आपको बुलाता है_। तो फिर देर किस बात की? बैग उठाइए और चले आइए उस शहर में _जहां हर गली इतिहास बोलती है, हर मंदिर आस्था जगाता है और हर मजार इंसानियत का पैगाम देता है_।

_आइए ना हमरा पूर्णिया में… यहां मिट्टी भी मेहमाननवाज़ी करती है।

Taza Khabar