नई दिल्ली6अगस्त26**FCRA Amendment Bill: केंद्र सरकार अब एफसीआरए संशोधन विधेयक पेश करने की तैयारी कर रही है.*
नई दिल्ली*भारत के प्रस्तावित FCRA संशोधन पर अब अमेरिकी राजनीति से भी प्रतिक्रिया आने लगी है. रिपब्लिकन सांसद राइली मूर ने इसे ईसाई समुदाय पर ‘सीधा हमला’ बताते हुए चेतावनी दी कि यह भारत-अमेरिका संबंधों में विवाद का मुद्दा बन सकता है.*
* वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि बदलावों का मकसद विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है.
*FCRA Amendment Bill: केंद्र सरकार अब एफसीआरए संशोधन विधेयक पेश करने की तैयारी कर रही है.*
* केंद्र सरकार मानसून सत्र में FCRA संशोधन विधेयक लाएगी।
* विदेशी धन के दुरुपयोग से लोकतांत्रिक संस्थानों को खतरा है।
* धर्म परिवर्तन, राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों हेतु विदेशी धन प्रतिबंधित।
* चुनाव उम्मीदवार, राजनेता, पत्रकार विदेशी अंशदान स्वीकार नहीं कर सकते।
*विदेश से आया कौन-सा पैसा FCRA के दायरे में नहीं आता?*
● हर विदेशी लेन-देन को विदेशी अनुदान या Foreign Contribution नहीं माना जाता।
● यदि कोई भारतीय नागरिक विदेश में नौकरी करता है और अपनी वैध कमाई अपने माता-पिता या परिवार को भेजता है, तो यह सामान्यतः FCRA के अंतर्गत Foreign Contribution नहीं है।
● किसी भारतीय कंपनी को विदेश से माल या सेवाओं के बदले प्राप्त व्यावसायिक भुगतान भी FCRA नहीं माना जाता।
● विदेश में कार्यरत भारतीय द्वारा भेजा गया व्यक्तिगत उपहार या पारिवारिक सहायता, यदि वह विदेशी स्रोत की कानूनी परिभाषा में नहीं आता, तो सामान्य बैंकिंग नियमों के अधीन रहेगा।
● किसी कर्मचारी को विदेशी कंपनी से उसके रोजगार के बदले मिलने वाला वेतन भी सामान्यतः Foreign Contribution नहीं होता।
● विदेशी निवेश, जो संबंधित भारतीय कानूनों जैसे FEMA और कंपनी कानून के तहत आता है, उसकी अलग कानूनी व्यवस्था है।
● इसलिए केवल ‘विदेश से पैसा आया’ यह तथ्य पर्याप्त नहीं है; उसकी प्रकृति और स्रोत तय करते हैं कि FCRA लागू होगा या नहीं।
*कब विदेशी धन Foreign Contribution बन जाता है?*
● यदि कोई विदेशी सरकार, विदेशी कंपनी, विदेशी ट्रस्ट, विदेशी फाउंडेशन या अन्य ‘Foreign Source’ किसी भारतीय संस्था या पात्र व्यक्ति को दान, अनुदान या सहायता देता है, तो वह सामान्यतः Foreign Contribution माना जाएगा।
● यदि किसी भारतीय NGO को किसी विदेशी चैरिटेबल फाउंडेशन से शिक्षा परियोजना के लिए अनुदान मिलता है, तो वह FCRA के अधीन होगा।
● इसी प्रकार किसी विदेशी संगठन द्वारा सामाजिक विकास, स्वास्थ्य या पर्यावरण परियोजनाओं के लिए दिया गया फंड भी FCRA की परिधि में आएगा।
● यदि किसी संस्था के पास वैध FCRA पंजीकरण या पूर्व अनुमति नहीं है, तो ऐसा धन स्वीकार करना कानूनी समस्या पैदा कर सकता है।
● FCRA केवल नकद राशि ही नहीं, बल्कि विदेशी प्रतिभूतियों और कुछ परिस्थितियों में विदेशी वस्तुओं के दान को भी कवर करता है।
● कानून में ‘Foreign Source’ की विस्तृत परिभाषा दी गई है, जिससे यह तय किया जाता है कि कौन सा स्रोत विदेशी माना जाएगा।
● इसलिए किसी भी विदेशी फंड को स्वीकार करने से पहले उसकी कानूनी स्थिति की जांच करना आवश्यक है।
*🇮🇳 केंद्र सरकार संसद के मानसून सत्र में विदेशी अंशदान (संशोधन) विधेयक लाने की तैयारी कर रही है।*
● सरकार का कहना है कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में विदेशी धन के माध्यम से भारत के लोकतांत्रिक संस्थानों, चुनावी प्रक्रिया और सार्वजनिक विमर्श को प्रभावित करने की आशंका बढ़ी है।
● प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य विदेशी फंड की निगरानी मजबूत करना और मौजूदा कानूनी व्यवस्था को और प्रभावी बनाना है।
*FCRA क्या है?*
● Foreign Contribution (Regulation) Act (FCRA) भारत में विदेशी दान, फंड और संपत्ति की प्राप्ति एवं उपयोग को नियंत्रित करने वाला कानून है।
● इसका संचालन गृह मंत्रालय (MHA) करता है।
● इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विदेशी धन का उपयोग भारत की संप्रभुता, आंतरिक सुरक्षा, लोकतंत्र और राष्ट्रीय हितों के विरुद्ध न हो।
● विदेशी अंशदान प्राप्त करने के लिए संस्थाओं को सामान्यतः FCRA पंजीकरण या पूर्व अनुमति लेनी होती है।
● विदेशी धन के लिए अलग बैंक खाता और निर्धारित रिकॉर्ड रखना अनिवार्य है।
*किन गतिविधियों के लिए विदेशी फंड प्रतिबंधित है?*
● बल, प्रलोभन या धोखे से धार्मिक धर्मांतरण (Religious Conversion) के लिए।
● राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों या हिंसक आंदोलनों को बढ़ावा देने के लिए।
● सरकारी परियोजनाओं में बाधा डालने या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले कार्यों के लिए।
● भारत के चुनाव, राजनीतिक प्रक्रिया या सरकारी नीतियों को विदेशी धन से प्रभावित करने के लिए।
● संदिग्ध, अपारदर्शी या बिना हिसाब वाले विदेशी फंड।
● सामाजिक कल्याण के नाम पर प्राप्त धन का कथित रूप से राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों में उपयोग।
*कौन विदेशी अंशदान स्वीकार नहीं कर सकता?*
● चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार।
● सांसद (MP) और विधायक (MLA)।
● राजनीतिक दल और उनके पदाधिकारी।
● न्यायाधीश एवं न्यायिक अधिकारी।
● सरकारी कर्मचारी।
● सार्वजनिक क्षेत्र (PSU) के कर्मचारी।
● पत्रकार, समाचार संपादक, प्रकाशक और कार्टूनिस्ट (कानून में निर्धारित श्रेणियों के अनुसार)।
*सरकार का उद्देश्य*
● विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता बढ़ाना।
● राष्ट्रीय सुरक्षा और लोकतांत्रिक संस्थाओं की रक्षा करना।
● विदेशी धन के दुरुपयोग को रोकना।
● वैध सामाजिक एवं विकास कार्यों के लिए स्पष्ट और जवाबदेह व्यवस्था सुनिश्चित करना।
*दरअसल, ऐसे मामलों को लेकर सबसे बड़ा भ्रम यही है कि विदेश से आने वाला हर पैसा FCRA के अधीन होता है, जबकि कानून ऐसा नहीं कहता। इसलिए किसी भी विदेशी राशि को स्वीकार करने से पहले उसके स्रोत, उद्देश्य और लागू कानून की जांच करना आवश्यक है। सही कानूनी जानकारी न केवल अनुपालन सुनिश्चित करती है, बल्कि अनावश्यक विवाद और दंडात्मक कार्रवाई से भी बचाती है।*

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