नई दिल्ली 8दिसम्बर 25*केन्द्र की सरकार द्वारा किसान मजदूर विरोधी फैसले लेने के विरोध में मांग
नई दिल्ली *केन्द्र की मौजूदा सरकार कार्पोरेट को फायदा पहुंचाने के लिए किसान मजदूर व आमजन विरोधी फैसले ले रही है जिनका भारतीय किसान युनियन नैन, हरियाणा कड़े शब्दों में निंदा करती है और माननीय सांसद महोदय जी से अनुरोध करते है कि केन्द्र सरकार द्वारा लिये गये गलत फैसलों के विरोध में किसान मजदूर संगठनों का समर्थन करें व सरकार के द्वारा लिये गये गलत फैसलो के विरोध में संराद में आवाज उठाये और इन गलत फैसलों पर रोक लगवाने में हमारा सहयोग करें। केन्द्र सरकार द्वारा लिये गये फैसले इस प्रकार है –
1. केन्द्र सरकार द्वारा नई बीज निति कानून बनाया गया है जोकि किसानों के विरोध में है इस पर रोक लगाई जाये।
2. केन्द्र सरकार की नई कृषि कान्ति निति जो लेकर आई है वह किसान व मजदूर के हित में नहीं है।
(ए.) इस निति के लागू होने से जंहा रोवोट, AI ड्रोन से खेती की जायेगी तो बेतहाशा ग्रामीण मजदूरों को बेरोजगार बना दिया जायेगा जो पहले से ही मनरेगा के कार्यदिवस की कटौती से परेशान चले आ रहे है।
(बी) जिनएडिटिंग वा परिसीजन फार्मिंग से जेनेटिक मॉडिफाइड उत्पादन करके सभी जीव जन्तुओं के स्वास्थ्य को खराब करने का ओर प्राकृति विरोधी भोजन उपलब्ध कराने का एक षडयन्त्र है।
(सी) ब्लॉक चैन निति से साईलो जैसे बडे-बडे धन्ना सेठों के गोदाम बनेगें और इससे मण्डी व्यवस्था समाप्त हो जायेगी। यह नई कृषि कान्ति एकदम से पंजीपत्ति वर्ग व कार्पोरेट हाउस को मजबूत करने के लिए है ना की किसान मजदूर को मजबूत करने के लिए। इसको तुरन्त प्रभाव से वापिस लिया जाये।
3. केन्द्र सरकार द्वारा पुराने लेबर कानून को बदलकर चार नये लेबर कानून बनाये गये है जोकि मजदूर और आमजन विरोधी है इससे कार्पोरेट का लाभ होगा और बेरोजगारी बढेगी, जैसे
(1) इस कानून में रोजगार की सुरक्षा नही है, मजदूर एकता कमजोर हो जायेगी।
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(2) हडताल के अधिकार पर चोट है लगभग यह अधिकार समाप्त करनांकृया गया है।
(3) महिलाओं के विरूध शोषण व लजा भंग जैसे अपराध बढने का खतरा है।
(4) रोजगार फिक्स टाईम के लिए निर्धारित किया गया है। पक्की नौकरी की कोई गारन्टी नही है।
(5) बोनस समाप्त करने का षडयन्त्र है और दैनिक वेतनभोगी मजदूरों का इसमें कोई खयाल नहीं है।
4. केन्द्र सरकार द्वारा जो बिजली संसोधन विधेयक 2020 लागू किया गया है उसको वापिस लिया जाये, और बिजली निजिकरण और समार्ट मीटर पर पुर्ण रोक लगाई जाये।
5. हरियाणा प्रदेश में धान के सीजन में लगभग 5000/- करोड़ रूपये का धान घोटाला हुआ है जिससे किसानों व सरकार को नुकसान हुआ है इसमें शामिल उच्च अधिकारियों व प्रभावशाली व्यक्तियों का पर्दाफाश करके इराकी निष्पक्ष जांच करवाकर दोषीयों को सजा दी जाये।
6. देश में किसानों को फसल बिजाई के समय खाद ना मिलने के कारण बार-बार लाईनों में लगकर व धरने प्रदर्शन करने पर मजबूर होना पडता है इसलिए केन्द्र सरकार से अनुरोध है कि पुरे भारत में खाद का समय पर उचित प्रबन्ध किया जाये। 7.
पुरे हरियाणा प्रदेश में अत्याधिक वर्षा के कारण जलभराव व बाढ़ से हुये नुकसान की तुरन्त गिरदावरी करवाकर किसानों को उचित मुआवजा दिलवाया जाये।
8. धान की फसल में नमी प्रतिशत को 17 प्रतिशत की बजाये 22 प्रतिशत किया जाये और पैकिंग के समय 37 किलो की बजाये 50 किलो की भर्ती की जाये।
9. आवादकार किसानों को उनकी जमीनों का मालिकाना हक दिया जाये।
10. यह कि पराली के नाम पर किसानों पर बनाये जा रहे मुकदमें तुरन्त प्रभाव से रद्ध किये जाये और पराली प्रबन्धन का जिम्मा सरकार स्वंय ले या किसानों को 200/- रूपये प्रति क्विटल या 7000/- रूपये प्रति एकड का मुआवजा किसानों को दिया जाये, किसानों का पराली प्रबन्धन का पिछले वर्ष का 1200/- रूपये प्रति एकड और धान की सीधी बिजाई का 4500/- रूपये प्रति एकड जो बकाया है वह जल्द दिया जाये।
11. यह कि गन्ने का रेट 500/- रूपये प्रति क्विटल किया जाये और गन्ने की बकाया पैमन्ट जल्दी से जल्दी जारी की जाये।
12. यह कि हरियाणा प्रदेश में जो लम्बित बिजली ट्यूब्बैल कनैक्शन है उनको तुरन्त जीरी किया जाये।
अतः आप जी से अनुरोध है कि उपरोक्त मांगों का उचित समाधान करवाने की कृपा करें।
धन्यवाद।
निवेदक
भारतीय किसान युनियन नैन, हरियाणा ।

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