चित्तूर5जुलाई26*यह तस्वीर आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में स्थित गुडीमल्लम परशुरामेश्वर मंदिर के अद्वितीय और अत्यंत प्राचीन शिवलिंग की है।
यहाँ इस ऐतिहासिक शिवलिंग के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है,
गुडीमल्लम शिवलिंग का अद्वितीय इतिहास
सबसे प्राचीन प्रमाण: यह दुनिया भर में खोजे गए भगवान शिव से जुड़े सबसे पुराने क्रियाशील शिवलिंगों में से एक माना जाता है। पुरातात्विक साक्ष्यों के अनुसार, यह शिवलिंग ईसा पूर्व तीसरी से दूसरी शताब्दी (3rd–1st Century BC) का है, यानी लगभग 2300 साल पुराना।
मानवाकृति उत्कीर्ण: सामान्य शिवलिंगों के विपरीत, इस शिवलिंग की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके सामने के भाग पर भगवान शिव की पूरी लंबाई वाली खड़ी हुई आकृति (man-sized relief figure) उकेरी गई है।
अनूठा रूप: इसमें शिव जी एक द्विज (बौने यक्ष – जो अज्ञानता का प्रतीक है) के कंधों पर खड़े हैं। उनके एक हाथ में त्रिशूल जैसा अस्त्र, दूसरे में एक बर्तन है, और सिर पर जटाएं हैं। यह रूप शिव के आदिरूप और उस समय की कला का एक अनूठा उदाहरण है।
संरक्षण: यह मंदिर 1954 से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित है।
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