कौशाम्बी28अगस्त25*सहकारी समितियों में भी मची है उर्वरक के लिए मारामारी जिम्मेदार वसूल रहे अधिक कीमत*
*उर्वरक की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए मीटिंग करके बनाई जाने वाली योजनाएं पूरी तरह से सफल नहीं हो रही है*
कौशांबी धान के सीजन में यूरिया उर्वरक की कीमत में जहां प्राइवेट दुकानों में 50 रुपए प्रति बोरी दुकानदार खुले आम अधिक वसूल रहे हैं वही सहकारी समितितो में भी यूरिया उर्वरक की बिक्री में कीमत अधिक वसूली जा रही है 266 रुपए 50 पैसे की कीमत में मिलने वाली यूरिया की कीमत सहकारी समितियां में खुलेआम 270 वसूला जाता है तमाम समितियों के जिम्मेदार द्वारा यूरिया की कीमत 275 रुपए 280 रुपए तक वसूली की जा रही है इसके अलावा गुपचुप तरीके से भी अधिक कीमत लेकर सहकारी समितियां से उर्वरक की बिक्री हो रही है जिसका नतीजा यह है कि दिन में यूरिया की कमी होती है और भीड़ के बीच धीरे-धीरे बिक्री करके रात में बेची गई खाद का कोटा अभिलेख में पूरा कर लिया जाता है जिससे किसानों के सामने यूरिया खाद की समस्या उत्पन्न होती है और कभी-कभी कड़ी धूप तो कभी बारिश के बीच किसानों को पूरे दिन लाइन में खड़े रहना पड़ता है लाइन में कई घंटे खड़े रहने के बाद कुछ किसानों को उर्वरक मिल जाती है और तमाम किसानों को पूरे दिन लाइन में खड़े रहने के बाद खाद नहीं मिल पाती है शाम हो जाती है समितियां को बंद करके कर्मचारी चले जाते हैं और शाम होने के बाद किसानों से समितियां के जिम्मेदारों द्वारा कहा जाता है कि कल फिर आना दूसरे दिन भी सहकारी समितियां की यही स्थिति बनी रहती है समितियां से उर्वरक लेने के लिए किसानों की पूरे दिन भारी भीड़ लगी रहती है रेलवे स्टेशन के टिकट खिड़की से ज्यादा सहकारी समितियां में उर्वरक के लिए भीड़ लगती है भीड़ समाप्त करने का प्रयास समितियां के जिम्मेदार नहीं कर पाते हैं खाद की आपूर्ति सुनिश्चित करने और समस्या समाप्त करने के लिए पूरे साल मीटिंग बैठक करके योजनाएं बनाई जाती है लेकिन योजनाएं पूरी तरह से सफल नहीं हो रही है जिसका खामियाजा किसान भुगत रहा है कई कई घंटे तक लाइन में किसान खड़े रहते हैं आधार कार्ड खतौनी देने के बाद भी किसानों को पूरे पूरे दिन उर्वरक लेने के लिए लाइन में खड़ा रहना पड़ता है जिससे किसानों के सामने समस्या खड़ी हुई है जिसका समाधान होता नहीं दिख रहा है जिले के एक दो समितियां नहीं लगभग सभी समितियां में उर्वरक की बिक्री के लिए मारामारी मची है और किसान परेशान है लेकिन योजना और मीटिंग करने वाले अधिकारी उर्वरक की पूरी उपलब्धता सुनिश्चित नहीं करवा पा रहे हैं

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