April 17, 2026

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कानपुर नगर17अप्रैल26*कानपुर की केंद्र शासित फैक्ट्री में मजदूरों का शोषण!नौकरी दिलाने के नाम पर ₹10 हज़ार से ज़्यादा की वसूली

कानपुर नगर17अप्रैल26*कानपुर की केंद्र शासित फैक्ट्री में मजदूरों का शोषण!नौकरी दिलाने के नाम पर ₹10 हज़ार से ज़्यादा की वसूली

*Big Breaking News kanpur*

कानपुर नगर17अप्रैल26*कानपुर की केंद्र शासित फैक्ट्री में मजदूरों का शोषण!नौकरी दिलाने के नाम पर ₹10 हज़ार से ज़्यादा की वसूली

कानपुर नगर*प्राइवेट कर्मचारियों का बैंक खाता की कॉपी से लेकर एटीम कार्ड तक मुंशियों द्वारा कर लिया जाता है ज़ब्त, तनख्वाह के समय खातों से कर्मचारियों से पैसा निकलवाकर कटौती कर तय धनराशि देने का कालाबाजारी जारी*

*कानपुर की केंद्र शासित फैक्ट्री में मजदूरों का शोषण!नौकरी दिलाने के नाम पर ₹10 हज़ार से ज़्यादा की वसूली का भ्रष्टाचार उजागर करने वालों को बाहर निकालने का खेल!*

*कानपुर कालपी रोड स्थित केंद्र शासित फैक्ट्री में कार्यरत निजी फर्मों पर मजदूरों के शोषण, अवैध वसूली और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप सामने आए हैं।*

*आरोप है कि नौकरी दिलाने के नाम पर मजदूरों से ₹10 हज़ार से ज़्यादा तक की रकम वसूली जाती है, जबकि भ्रष्टाचार का विरोध करने वाले कर्मचारियों को धमकाकर बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है।*

*सूत्रों के अनुसार फैक्ट्री में ठेके पर काम कर रही कई फर्मों के मुंशी मजदूरों से उगाही कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि पीवीआर न बनवाने, नौकरी से निकालने और दोबारा काम पर न रखने की धमकी देकर बड़ी रकम वसूली जाती है।*

*कई प्राइवेट कर्मचारी वर्षों से इस शोषण का शिकार हैं, लेकिन शिकायतों के बावजूद अब तक फर्मों और मुंशियों पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई। बल्कि इन केंद्र शासित फैक्ट्रियों में ठेके लेने वाले फर्मों के भ्रष्टाचार पर निगरानी रखने वाले केंद्र स्तरीय अधिकारी भी आखिर इस भ्रष्टाचार पर मौन क्यों हैं?*

*मजदूरों के अनुसार दोषी फर्मों को ब्लैकलिस्ट क्यों नहीं किया जाता और उगाही करने वाले मुंशियों को जेल की सलाखों के पीछे क्यों नहीं भेजा जाता, जिन्होंने मनमानी कर लूट जारी रखी हुई है, बल्कि भ्रष्टाचार उजागर करने वालो को नौकरी से ज़बरन निकालने का काम भी कर रहे हैं और क्षेत्रीय थाना पुलिस से सांठ गांठ कर भ्रष्टाचार उजागर करने वालो को ही उल्टा फसाने की धमकी तक दी जा रही है।*

*डरे मजदूरो नौकरी जाने के डर से साधे हुए हैं चुप्पी, क्या भ्रष्ट मुंशियों और फर्मों पर कार्रवाई होगी या यूं ही चलता रहेगा मजदूरों का शोषण?*

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