औरैया29मई*माहवारी पर खुलकर बात करने की है जरूरत-डॉ पुरी*
*थीम ‘एक ऐसी दुनिया बनाना जहां 2030 तक कोई महिला या लड़की मासिक धर्म के कारण पीछे न रहे ‘*
*बिधूना सीएचसी में किशोरियों को बांटे सेनेटरी पैड* *माहवारी स्वच्छता दिवस पर हुआ आयोजन*
*औरैया।* माहवारी के दौरान स्वच्छता और साफ-सफाई के प्रति सजग और जागरूकता लाने के लिए हर वर्ष 28 मई को विश्व माहवारी स्वच्छता दिवस मनाया जाता है जिससे उन्हें झिझक छोड़ने और इस बारे में खुलकर बात रखने का मौका मिल सके | इस वर्ष इसकी थीम ‘एक ऐसी दुनिया बनाना जहां 2030 तक कोई महिला या लड़की मासिक धर्म के कारण पीछे न रहे’ है । इसी क्रम में शनिवार को राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरकेएसके) के तहत मासिक धर्म स्वच्छता दिवस के मौके पर जनपद के मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में गोष्ठी का आयोजन किया गया। साथ ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिधूना में महिलाओं और किशोरियों को मासिक धर्म के बारे में जानकारी दी गई। सभी को निशुल्क सेनेटरी पैड भी दिए गए।
गोष्ठी में अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ शिशिर पुरी ने कहा कि माहवारी को लेकर ग्रामीण अंचल में आज भी तरह-तरह की धारणाएं हैं। जागरूकता के अभाव में किशोरियां व महिलाएं संक्रमण का शिकार हो रही हैं, जबकि इस पर खुलकर बात करने की जरूरत है। किशोरियां परिवार में मां, बड़ी बहन, भाभी से माहवारी पर खुलकर बात करें। माहवारी में संक्रमण के खतरे से बचने के लिए सूती कपड़े या फिर ब्रांडेड सेनेटरी पैड का इस्तेमाल करें, नहीं तो खतरा बढ़ सकता है।
इस मौके पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिधूना में अस्पताल अधीक्षक डॉ. सिद्धार्थ वर्मा ने माहवारी स्वच्छता दिवस पर महिलाओं एवं किशोरियों को जागरूक किया। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने स्वच्छता को बढ़ावा देने और महिलाओं को नौकरी के अवसर प्रदान करने के लिए उज्ज्वला सैनिटरी नैपकिन योजना शुरू की है। डॉ. मनीषा त्रिपाठी ने किशोरियों और महिलाओं से माहवारी में स्वच्छता बनाये रखने की बात कही। उन्होंने साबुन से हाथ धोने के साथ ही सैनिटरी नैपकिन का प्रयोग करने के लिए सभी किशोरियों को सुझाव दिया। उन्होंने बताया कि आज उन्हें जो पैक दिए गए हैं उनमें प्रत्येक पैक में 8 सैनिटरी पैड हैं।
माहवारी का प्रबंधन व निपटान के विषय में कहा कि माहवारी में सूती कपड़े के पैड का उपयोग सबसे अच्छा रहता है। अगर कपड़े का पैड नहीं है तो सूती मुलायम कपड़े को पैड की तरह मोड़कर उपयोग करना चाहिए। हर दो घंटे में पैड बदलना चाहिए। पैड बदलने के समय जननांग को पानी से धोकर सुखा ले। उपयोग किये हुए पैड को साबुन व ठंडे पानी से धोना चाहिए व तेज धूप में सुखाना चाहिए। ऐसा करने से कीटाणु नष्ट हो जाते हैं। सूख जाने के बाद पैड को एक साफ़ धुली कपड़े की थैली में मोड़कर रखें। माहवारी में उपयोग किये गए पैड या कपड़े को खुले में नहीं फेंकना चाहिये क्योंकि ऐसा करने से उठाने वाले व्यक्ति में संक्रमण का खतरा हो सकता है। हमेशा पैड को पेपर या पुराने अखबार में लपेटकर फेंकना चाहिये या पैड को जमीन में गड्ढा खोदकर गाड़ भी सकते है।
आगे कहा कि इन बातों का ख्याल रखे कि घर में रखे पुराने गंदे कपड़े का प्रयोग नही करें। इससे संक्रमण का खतरा रहता है। छह घंटे के अंतराल पर सैनिटरी नैपकिन बदलना चाहिए। समय-समय पर अपने प्राइवेट पार्ट की सफाई करती रहें।पीरियड्स के समय कई बार शरीर में दर्द होता है। इसलिए गर्म पानी से नहाएं। अपने बिस्तर की सफाई का ध्यान रखना चाहिए। समय-समय पर बेडशीट बदलती रहें। अगर यात्रा पर हैं और शौचालय जाना हो तो सफाई वाली जगह पर जाएं। खान-पान का रखें ख्याल। सुपाच्य आहार का सेवन करें।

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