June 25, 2026

UPAAJTAK

TEZ KHABAR, AAP KI KHABAR

औरैया19अप्रैल*खलिहान को लेकर किसान ने यादों को किया तरोताजा*

औरैया19अप्रैल*खलिहान को लेकर किसान ने यादों को किया तरोताजा*

औरैया19अप्रैल*खलिहान को लेकर किसान ने यादों को किया तरोताजा*

*किसान के मुख से किया गया खलिहान का वर्णन, दी जानकारियां*

*औरैया।* भारतीय संस्कृति में खलियान का बड़ा ही महत्व है। किसान के लिए यह मंदिर के समान पवित्र स्थान होता है। जहां किसान साल भर की गई मेहनत की फसल को बड़े ही संभाल सजोकर रखता है। बीते समय में खेती किसानी की बातों को तरो ताजा करते हुए किसानों ने खलिहान की व्यापक तौर पर चर्चा की है।
विकासखंड औरैया क्षेत्र के ग्राम मानपुर निवासी किसान विनोद त्रिशरण का कहना है कि खलियान में जो क्लेऊ, और भोजन करने में आनंद और सुख प्राप्त होता है। उतना किसी फाइव स्टार होटल में नही मिल सकता है। क्योंकि यहां खून और पसीने से मेहनत करने के बाद जो अन्न पैदा होता है, उसकी रोटी का स्वाद एक किसान या देश की रक्षा करने वाला सैनिक ही जानता है। किसान के लिए खलियान पर रखा हुआ जल भी गंगाजल के समान है, क्योंकि इस जल में भी मेहनत की सुगंध आती है। आज हमारा देश किसानों और जवानों पर निर्भर है।इसलिए हम किसान अपने खलियानों को पवित्र मानते हैं, क्योंकि इन्ही खलियानों का दाना देश के अमीर- गरीब आदि सभी वर्गों के लोग दाल रोटी के रूप में ग्रहण करते है। एक समय ऐसा भी था जब किसान अपनी फसल की उठाई करने के लिए बैलों से के गेहूँ , बेझर , चना, मटर के अलावा खरीफ की फसल बाजरा , ज्वार आदि फसल की उठाई करने के लिए दांय चलाते थे। बदलाव होने के साथ दांतुवा वाली मशीन आई , जिसे फसल के पैर पर घुमा कर फसल की मड़ाई की जाती थी। इसके बाद हवा का इंतजार होता था, और पर्याप्त हवा मिलने पर मडी हुई फसल से भूसा आदि अलग करके अनाज का संग्रह किया जाता था। तराजू-बाट से खेतों पर ही तौल होती थी। बैलगाड़ी अथवा सिर पर लादकर खाद्यान्न एवं भूसा घर पर पहुंचाया जाता था। समय में परिवर्तन हुआ वैज्ञानिक खेती का शुभारंभ हुआ, जिसके तहत कटाई एवं उठाई मशीनें (थ्रेसर) आदि आ गए, जिससे किसानों को कटाई एवं मडाई में बड़ी सहूलियत हो गई है। भूसा व खाद्यान्न भी अब सिर पर नहीं ट्रैक्टर व लोडर आदि से घरों तक पहुंचने लगा है। लेकिन तत्समय के खलिहान की मिट्टी की खुशबू जहन से नहीं उतरती है। इसी तरह से विकासखंड सहार निवासी किसान जीतपाल ने खलिहान बनाते समय अपनी पुरानी याददाश्त को सार्वजनिक कर तरोताजा किया है।

Taza Khabar