इंदौर23अप्रैल*अहंकारी खोखले पुरुष को ठेस लगने के परिणाम रेखांकित करता नाटक सखाराम बाइंडर।
इंदौर से सिटी रिपोर्टर प्रतिभा तोमर की रिपोर्ट यूपीआजतक
सखाराम बाइंडर*** वह नाटक जो अपने बोल्ड कंटेंट के चलते 1974 में महाराष्ट्र सरकार द्वारा बैन कर दिया गया था। जिसे लिखने के लिए नाटककार विजय तेंदुलकर पर हमले हुए। इस सारे विरोध और प्रतिकार की वजह भी वही थी जो इस नाटक के अंत की वजह है “अहं । अहं को ठेस लगी तो कई महिलाओं से बड़ी बेबाकी से संबंध बना लेने वाला सखाराम अपनी साथी चम्पा का कत्ल कर देता है। वजह – चम्पा सखाराम के मित्र दाऊद के संपर्क में आ जाती है।नाटक में लक्ष्मी का किरदार प्रतिभा तोमर ने निभाया। नाटक में लक्ष्मी के किरदार को प्रतिभा तोमर ने बखूबी निभाया, जिसकी सारे शहर में लोगो ने सराहना की। नाटक उसी मानसिकता तो उघाड़ता है जो बरसों से हमारे सिस्टम में पैठ बनाए हुए है कि पुरुष का चारित्रिक हनन उसका शौक है, पर महिलाएं अपनी मर्जी से किसी और को चुन लें, तो वह तमाम अपशब्दों की ही नहीं, बल्कि मृत्यु की अधिकारी बन जाती है। रंगमंच आर्ट ऑफ ड्रामा ग्रुप ने शनिवार शाम रवींद्र नाट्यगृह में संदीप दुबे के निर्देशन में यह नाटक खेला।
आमंत्रण पत्र पर लिखने के बावजूद साथ ले आए बच्चों को
नाटक में सखाराम कई जगह महिलाओं के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल करता है। पृष्ठभूमि ही वयस्कों की है इसलिए नाटक के आमंत्रण पत्र पर लिखा गया था कि यह सिर्फ वयस्कों के लिए है। बावजूद इसके दर्शक अपने बच्चों को लेकर पहुंच गए। अभिनय पक्ष संयत रहा। सखाराम के किरदार में संदीप दुबे का अनुभव और तैयारी नजर आई।

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