July 12, 2026

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अयोध्या2जुलाई26*पलटू दास अखाड़े के महंत धर्मेंद्र दास ने लगाए गंभीर आरोप

अयोध्या2जुलाई26*पलटू दास अखाड़े के महंत धर्मेंद्र दास ने लगाए गंभीर आरोप

अयोध्या2जुलाई26*पलटू दास अखाड़े के महंत धर्मेंद्र दास ने लगाए गंभीर आरोप

शिवप्रकाश दास उर्फ फलाहारी बाबा की दावेदारी को बताया फर्जी

अयोध्या। रामनगरी अयोध्या के प्रतिष्ठित श्री पलटू दास जी महाराज अखाड़े के महंत धर्मेंद्र दास शास्त्री ने आजमगढ़ के शिवप्रकाश दास फलाहारी बाबा पर गंभीर आरोप लगाते हुए उनकी दावेदारी को पूरी तरह से फर्जी करार दिया है। महंत धर्मेंद्र दास ने प्रशासन से अपनी जान-माल की सुरक्षा की गुहार लगाते हुए इस पूरे प्रकरण के पीछे भूमि हड़पने की एक बड़ी साजिश का पर्दाफाश किया है।अखाड़े के नियमों और परंपराओं का हवाला देते हुए महंत धर्मेंद्र दास ने कहां कि सनातन पद्धति के अनुसार कोई भी संत या व्यक्ति एक समय में केवल एक ही स्थान का महंत रह सकता है, दो अलग-अलग जगहों का नहीं। चूंकि शिवप्रकाश दास उर्फ फलाहारी बाबा पहले से ही आजमगढ़ के लालगंज स्थित हनुमानगढ़ी कटघर के महंत हैं, इसलिए अयोध्या के अखाड़े पर उनका दावा पूरी तरह अवैध और नियमों के विरुद्ध है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि परंपरा के अनुसार कोई भी गृहस्थ व्यक्ति किसी अखाड़े या गद्दी का उत्तराधिकारी नहीं बन सकता, जबकि शिवप्रकाश दास ने जिसे अपना उत्तराधिकारी बताया है वह हंसनाथ सिंह गृहस्थ जीवन में रह रहे हैं और गृहस्थी हैं।महंत धर्मेंद्र दास ने इस पूरे विवाद को लेकर एक और बड़ा खुलासा किया। उन्होंने बताया कि जब अयोध्या में उन्हें महंत बनाया जा रहा था और महंति का पूरा कार्यक्रम चल रहा था, उस समय शिवप्रकाश दास स्वयं वहां उपस्थित नहीं थे। बल्कि उस महंति कार्यक्रम में शिवप्रकाश दास का वही चेला हंसनाथ सिंह मौजूद था जिसे वह आज अपना उत्तराधिकारी बता रहा है। अखाड़े के पास उस कार्यक्रम की तस्वीरें आज भी साक्ष्य के रूप में मौजूद हैं और सबसे बड़ी बात यह है कि उस समय उनकी तरफ से कोई भी आपत्ति दर्ज नहीं कराई गई थी। ऐसे में अब अचानक इतने समय बाद खुद को उत्तराधिकारी घोषित करना पूरी तरह से संदेहास्पद और मनगढ़ंत है।महंत धर्मेंद्र दास ने साफ तौर पर आरोप लगाया कि अखाड़े की कीमती संपत्ति और भूमि पर अवैध कब्जा करने के लिए एक सोची-समझी साजिश रची जा रही है। विपक्षी पक्ष द्वारा गांव के कुछ अराजक तत्वों को यह लालच दिया गया है कि कब्जा होने के बाद उन्हें भी मठ की जमीन का कुछ हिस्सा दे दिया जाएगा। इसी लालच और स्वार्थ के कारण गांव के कुछ अराजक तत्व इस फर्जी दावेदारी में उनका सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अखाड़े की व्यवस्था और भूमि पर साल 2020 से ही कार्यवाहक महंत के रूप में उनका स्वयं का भौतिक कब्जा है, जिसके प्रमाण के तौर पर नगर निगम के दस्तावेज, बिजली के कनेक्शन और बिल आज भी उन्हीं के नाम पर दर्ज हैं। विपक्षी पक्ष द्वारा की जा रही दावेदारी पूरी तरह कागजी है जिसके पीछे न तो कोई वैध महंतनामा है और न ही स्थानीय संतों के हस्ताक्षर।सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए महंत धर्मेंद्र दास ने जिला प्रशासन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और जिलाधिकारी को पत्र लिखकर मांग की है कि उन्हें शिवप्रकाश दास और उनके सहयोगियों राजकुमार यादव, प्रमोद यादव और अमरजीत यादव से जान-माल का गंभीर खतरा है। उन्होंने प्रशासन को चेताया कि यदि उनके या अखाड़े के साथ कोई अनहोनी होती है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी और जवाबदेही इन्हीं लोगों की होगी।दस्तावेजों अखाड़े के इतिहास और अदालती कार्यवाही का जिक्र करते हुए महंत धर्मेंद्र दास ने बताया कि यह पूरा मामला वर्तमान में माननीय न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है। इसके साथ ही इन अराजक तत्वों के खिलाफ पहले से ही पुलिस में मुकदमा भी पंजीकृत है जिससे इनके गलत इरादे और इतिहास साफ उजागर होते हैं। उन्होंने विसंगतियों को उजागर करते हुए कहा कि तत्कालीन महंत रामदास जी के जीवित रहते ही गुपचुप तरीके से एक अपंजीकृत महज्जरनामा तैयार कर लिया गया था जो कि नियमों के विपरीत है। महंत रामदास जी के साकेतवास के उपरान्त अखाड़े की स्थापित परंपरा के अनुसार महंत देवनारायण दास जी को सर्वसम्मति से महंत व सरबराहकार बनाया गया था। ऐसे में शिवप्रकाश दास द्वारा प्रस्तुत किया जा रहा पुराना महज्जरनामा स्वतः ही बेकार फर्जी और सोची-समझी रणनीति के तहत बाद में तैयार किया गया प्रतीत होता है। उन्होंने इस बात पर भी गहरा संदेह जताया कि इतने पुराने कथित दस्तावेज को लगभग कई वर्षों तक छुपा कर रखा गया और हाल ही में उसे पंजीकृत कराया गया जो इनके आचरण और नीयत पर गंभीर शंका पैदा करता है।

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