March 5, 2026

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लखनऊ15दिसम्बर23*जातीय जनगणना और जिसकी जितनी संख्या उसका उतना हक-सुभाष मौर्य

लखनऊ15दिसम्बर23*जातीय जनगणना और जिसकी जितनी संख्या उसका उतना हक-सुभाष मौर्य

लखनऊ15दिसम्बर23*जातीय जनगणना और जिसकी जितनी संख्या उसका उतना हक-सुभाष मौर्य

*गारंटी है जी एक बिहार प्रदेश की जातीय जनगणना से खलबली मच गई सभी पार्टियों को सामाजिक गोटी फिट करनी पड रही है किसी को जातीय जनगणना और जिसकी जितनी संख्या उसका उतना हक,का राग अलापना पड रहा है कहीं यादव कहीं आदिवासी कहीं अनुसूचित सी एम डिप्टी सी एम बनाना पड़ रहा अगर ओबीसी महासंघ (हिन्दू+मुस्लिम पसमांदा) जिसकी संख्या गांव से लेकर प्रदेश स्तर तक 60-62%से कम हो ऐसा कौन सा गांव ब्लाक तहसील तालुका जिला है जहां ओबीसी 60% से कम हो का संगठन ग्रामसभा स्तर तक बनकर सक्रिय हो जाय जिस समाज की आबादी अकेले 100करोड़ हो उसे फिर आरक्षण मांगना नहीं पड़ेगा स्वतः पार्टियां/सरकारें बुलाकर आबादी के अनुपात में संगठन और टिकट वितरण सहित सभी क्षेत्रों में हिस्सेदारी निर्धारित करेंगी इसलिये समस्त ओबीसी समाज को एकजुट होकर संख्याबल दिखाने की आवश्यकता है शायद किसान आंदोलन याद होगा जिसकी ताकत एवं एकजुटता की वजह से इतने बहुमत वाली केंद्र सरकार को भी तीनो किसान कानून वापस लेने पर मजबूर होना पड़ा था सभी ओबीसी समाज के लोग जितनी उपलब्ध जातियां हो ग्रामसभा से लेकर जिला स्तर प्रदेश स्तर पर प्रत्येक समाज का एक एक सदस्य सम्मिलित कर संयोजक मण्डल का गठन करे जिससे महासंघ का मूल नारा “जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी”का नाम और कार्य सार्थक हो सके!* *जिस दिन महासंघ का संगठन खड़ा हो गया सभी पार्टियों को आपकी आबादी के अनुपात में हिस्सेदारी देने के लिये मजबूर होना पड़ेगा कहते हैं संघे शक्ति कलयुगे इसलिये सक्रिय होकर अपनी अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करना पड़ेगा!इसलिये UNITY OF OBC जिस दिन ओबीसी समाज एकजुट होकर sc,st समाज को अहसास करा पाया उसी दिन समस्त 85%आपके समाज की अगुवाई में क्रांति कर देगा!*