लखनऊ 31दिसम्बर 25*नववर्ष संदेश-2026-डीजीपी उत्तर प्रदेश
प्रिय साथियों,
लखनऊ *नववर्ष का नवप्रभात आप सभी के जीवन में स्वास्थ्य, संतुलन और स्थिरता तथा आपके कर्तव्य में साहस, संयम और सफलता लेकर आए—इसी मंगलकामना के साथ मैं उत्तर प्रदेश पुलिस के प्रत्येक अधिकारी, कर्मचारी एवं उनके परिवारजनों को हृदय से शुभकामनाएं देता हूँ।
बीता वर्ष आपके कर्तव्य, कठिनाई और कर्मठता की कसौटी रहा। दिन-रात, धूप-धूल और दबाव के बीच आपने कानून का इकबाल, संविधान की कसौटी और जनता के भरोसे को अक्षुण्ण रखा। यही वह पुलिसिंग है, जो केवल कार्रवाई नहीं, बल्कि आचरण, अनुशासन और उत्तरदायित्व से पहचानी जाती है।
आपकी वर्दी ने केवल शक्ति नहीं दिखाई, उसने संवेदनशीलता भी दिखाई। उसने केवल अनुशासन नहीं दिखाया, उसने आत्मसंयम भी दिखाया। यही वह संतुलन है, जो एक पुलिस बल को सशक्त भी बनाता है और स्वीकार्य भी।
साथियों,
नववर्ष हमें यह स्मरण कराता है कि वर्दी केवल पहचान नहीं, बल्कि उत्तरदायित्व की घोषणा है। हमारा हर शब्द, हर दृष्टि और हर निर्णय जनता के मन में विश्वास भी बो सकता है और संदेह भी। वर्दी में बैठा व्यक्ति केवल कानून का प्रतिनिधि नहीं होता; वह शासन की संवेदनशीलता और राज्य की आत्मा का परिचायक होता है।
जब आधी रात किसी वृद्ध का फोन आता है, जब कोई बहन भय के बीच थाने का दरवाज़ा खटखटाती है, या जब कोई गरीब, असहाय नागरिक न्याय की आशा लेकर हमारी ओर देखता है—तब हम उनके लिए कोई पदनाम नहीं होते; हम उनके संकट की अंतिम उम्मीद होते हैं। उस क्षण हमारा व्यवहार ही तय करता है कि राज्य उनके साथ खड़ा है या उनसे दूर। यही हमारी जिम्मेदारी की सबसे बड़ी कसौटी है और यही हमारे पेशे का सबसे बड़ा गौरव।
इसीलिए हमारे आचरण में पारदर्शिता, हमारी भाषा में मर्यादा और हमारे निर्णयों में मानवीय विवेक स्पष्ट दिखाई देना चाहिए। कानून का पालन कराना हमारा कर्तव्य है, लेकिन उस प्रक्रिया में मानवीय गरिमा की रक्षा करना हमारी नैतिक अनिवार्यता है। क्योंकि सुरक्षा तभी संपूर्ण होती है, जब उसके साथ संवेदना भी जुड़ी हो।
प्रिय साथियों,
उत्तर प्रदेश पुलिस की वास्तविक शक्ति उसकी संख्या, हथियार या तकनीक नहीं, बल्कि उसका सामूहिक मनोबल है। एक व्यक्ति साहस दिखा सकता है, पर एकजुट टीम इतिहास बदल सकती है। जब अलग-अलग वर्दियाँ एक ही उद्देश्य के लिए खड़ी होती हैं, तब पुलिस बल केवल व्यवस्था नहीं, बल्कि विश्वास की संस्था बन जाता है।
हर सहकर्मी हमारा प्रतिस्पर्धी नहीं, हमारा पूरक है। एक-दूसरे के प्रयासों को पहचानना, कठिन समय में चुपचाप साथ खड़े रहना और बिना कहे बोझ बाँटना—यही वह अदृश्य डोर है, जो किसी बल को भीतर से मजबूत बनाती है। थका हुआ जवान, दबाव में अधिकारी या असमंजस में खड़ा सिपाही—सबसे पहले अपने साथी से ही संबल पाता है। यही संबल कार्यक्षमता को ऊर्जा और मनोबल को स्थिरता देता है।
जब वरिष्ठों का अनुभव युवाओं की ऊर्जा से जुड़ता है, तब केवल योजनाएँ नहीं बनतीं—समाधान पैदा होते हैं। अनुभव दिशा देता है और युवा जोश उस दिशा को गति देता है। यही संतुलन पुलिसिंग को आज के लिए सक्षम और कल के लिए तैयार बनाता है। सीखते रहने की आदत, मिलकर काम करने की संस्कृति और आपसी भरोसा—यही वे मूल्य हैं, जो किसी भी पुलिस बल को साधारण से विशिष्ट बनाते हैं।
साथियों,
आज अपराध की दुनिया बदल चुकी है। अपराधी केवल गलियों में नहीं, नेटवर्क में सक्रिय हैं। वे केवल हथियारों से नहीं, एल्गोरिद्म से भी वार कर रहे हैं। ऐसे समय में तकनीक हमारे लिए चुनौती नहीं, हमारा सबसे विश्वसनीय साथी होनी चाहिए।
साइबर सुरक्षा, डेटा विश्लेषण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उन्नत तकनीकी साधन—ये केवल उपकरण नहीं, आधुनिक पुलिसिंग की दृष्टि हैं। जब हम इनका विवेकपूर्ण और जिम्मेदार उपयोग करते हैं, तब हम केवल अपराध का पीछा नहीं करते, बल्कि उसके जन्म से पहले ही उसे पहचानने लगते हैं। यही वह सोच है, जो हमें अपराध के बाद की कार्रवाई से आगे बढ़ाकर अपराध से पहले की रोकथाम की ओर ले जाती है। यह वही मार्ग है, जो उत्तर प्रदेश को अपराधियों के लिए जोखिमपूर्ण और अपराध के लिए अलाभकारी बना रहा है।
तकनीक के साथ प्रशिक्षण का सतत नवीकरण और नवाचार के प्रति खुला दृष्टिकोण—इन्हीं से हम पारंपरिक पुलिसिंग और आधुनिक रणनीतियों के बीच संतुलित सेतु बना पाएंगे।
उत्तर प्रदेश पुलिस में 60,244 नव-भर्ती आरक्षियों का आगमन हम सभी के लिए एक ऐतिहासिक शक्ति-वृद्धि है। प्रशिक्षण पूर्ण कर जब ये आरक्षी प्रदेश के थानों में तैनात होंगे, तो प्रति थाना लगभग 30/40 आरक्षियों की यह नई ऊर्जा हमारी कार्यक्षमता, त्वरित पुलिसिंग और जन-विश्वास को नई गति देगी। परंतु यह “संख्या” भर नहीं है—यह “जिम्मेदारी” भी है। मैं समस्त थानाध्यक्षों से अपेक्षा करता हूँ कि आप इन नव-प्रशिक्षित साथियों को केवल ड्यूटी का हिस्सा नहीं, बल्कि संगठन की धरोहर समझें: उन्हें सही मार्गदर्शन दें, कार्य-संस्कृति सिखाएँ, कानून-सम्मत एवं संवेदनशील आचरण की आदतें मजबूत करें, और मैदान की वास्तविक चुनौतियों के लिए चरणबद्ध रूप से तैयार करें। साथ ही, सभी कर्मियों के कल्याण—आवास/भोजन/स्वास्थ्य, तनाव-प्रबंधन और सम्मानजनक कार्य-परिस्थितियों—पर विशेष ध्यान दें, ताकि वे आत्मविश्वास के साथ, अनुशासन में रहकर, जन-सेवा को अपना सर्वोच्च धर्म मानते हुए कार्य करें। हमें याद रखना होगा: एक सक्षम पुलिस बल का निर्माण सिर्फ़ संख्या-वृद्धि से नहीं, निरंतर ‘ग्रूमिंग’, ‘मेंटोरिंग’ और ‘केयर’ से होता है—और यही हमारे नेतृत्व की असली कसौटी है।
मैं साइबर अपराध की रोकथाम में आरक्षियों को “पहली ढाल” मानता हूँ। थाना/क्षेत्र स्तर पर आप प्रथम प्रत्युत्तरकर्ता हैं—साइबर शिकायत मिलते ही त्वरित संज्ञान, आवश्यक प्राथमिक जानकारी, डिजिटल साक्ष्य का सुरक्षित संरक्षण और संबंधित साइबर इकाई को तुरंत अग्रेषण आपकी प्राथमिक जिम्मेदारी है।
बीट स्तर पर आपकी एक और बड़ी भूमिका है—जन-जागरूकता: नागरिकों को बताइए कि OTP/पासवर्ड/UPI PIN/KYC कभी साझा न करें, संदिग्ध लिंक/कॉल/क्यूआर से सतर्क रहें, और जरूरत पड़ते ही 1930 पर कॉल करें तथा NCRP पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।
मैं चाहता हूँ कि आप “यक्ष ऐप” को सिर्फ एक तकनीकी सुविधा नहीं, बल्कि अपनी बीट पुलिसिंग का दैनिक अनुशासन बनाएं। यह ऐप पारंपरिक बीट-बुक की जटिलता को डिजिटल बीट-बुक में बदलकर आपके काम को सरल, तेज और अधिक प्रभावी करेगा। मेरी आपसे अपेक्षा है कि आप अपने क्षेत्र से जुड़ी अपराधियों/वांछितों की गतिविधियाँ, संदिग्ध व्यक्तियों व घटनाक्रम, तथा कानून-व्यवस्था से संबंधित इनपुट को समय पर और रियल-टाइम अपडेट करें—क्योंकि पुलिसिंग में सही सूचना जितनी जल्दी आएगी, उतनी जल्दी रोकथाम और कार्रवाई होगी।
मैं यह भी स्पष्ट करता हूँ कि “यक्ष ऐप” पर दर्ज प्रत्येक सूचना सटीक, सत्यापित और जिम्मेदारी के साथ होनी चाहिए। आपका नियमित अपडेटिंग और फीडबैक बीट स्तर पर निगरानी को मजबूत करेगा, अपराधियों की गतिविधियों का सतत ट्रैक बनेगा, और वरिष्ठ अधिकारियों तक अद्यतन स्थिति तुरंत पहुँचती रहेगी। मैं चाहता हूँ कि आप इस ऐप के माध्यम से सजग, जवाबदेह और तकनीक-सक्षम पुलिसकर्मी के रूप में अपनी पहचान मजबूत करें—ताकि आपकी ड्यूटी अधिक परिणामोन्मुख बने और जनता का भरोसा और भी पुख्ता हो।
मैं अपने सभी आरक्षियों और थाना प्रभारियों से यह भी अपेक्षा करता हूँ कि आप वर्दी के साथ संवेदनशीलता और सहानुभूति को अपना स्थायी व्यवहार बनाएं। थाने पर आने वाला हर नागरिक कोई “फाइल” नहीं, वह किसी समस्या, डर, नुकसान या उम्मीद के साथ आता है। आपकी नरम भाषा, धैर्य से सुनी गई बात और सम्मानजनक व्यवहार कई बार आधा समाधान बन जाते हैं। याद रखिए—कानून का पालन कराते हुए भी हम इंसानियत नहीं छोड़ते; और जब पुलिस सख्ती के साथ संवेदना दिखाती है, तभी जनता का भरोसा सबसे मजबूत होता है।
नववर्ष में हमें यही संकल्प लेना है कि हम संवेदनशील भी रहेंगे, संगठित भी रहेंगे; तकनीकी भी बनेंगे और मानवीय भी। क्योंकि जब विवेक, विज्ञान और संवेदना एक साथ चलते हैं, तभी पुलिसिंग सच्चे अर्थों में जन-सेवा बनती है।
प्रिय साथियों,
हम दूसरों की सुरक्षा करते हैं, लेकिन हमें अपनी मानसिक और भावनात्मक सेहत का भी ध्यान रखना होगा। तनाव, थकान और निरंतर दबाव—ये हमारे पेशे की वास्तविकताएँ हैं।
इसलिए एक-दूसरे से संवाद करें, सहयोग मांगने में संकोच न करें और अपने परिवारों के साथ समय बिताएँ।
आपके परिवारजन आपकी ड्यूटी के मौन साझेदार हैं। उनका त्याग, धैर्य और समर्थन हमारी सेवा की नींव है। उनके प्रति कृतज्ञता और सम्मान भी हमारी जिम्मेदारी है।
साथियों,
नववर्ष केवल तिथि का परिवर्तन नहीं होता; यह दृष्टि, दिशा और दायित्व के नवीकरण का अवसर होता है। इस नए वर्ष में हमारा संकल्प स्पष्ट और दृढ़ होना चाहिए कि हम तकनीक को केवल उपकरण नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश पुलिस की नई चेतना बनाएंगे। हम सीखेंगे, स्वयं को निरंतर अपडेट करेंगे और आधुनिक साधनों का उपयोग पूरी संवेदनशीलता और नैतिकता के साथ करेंगे।
हम यह संकल्प लें कि हमारी पुलिसिंग प्रतिक्रिया तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूर्वानुमान, रोकथाम और परिणाम की ओर अग्रसर होगी। हम ऐसे प्रहरी बनेंगे, जो अपराध के घटित होने की प्रतीक्षा नहीं करते, बल्कि उसे जन्म लेने से पहले ही रोक देते हैं।
इसी प्रतिबद्धता के साथ हम उत्तर प्रदेश को ऐसा राज्य बनाएंगे, जहाँ अपराधियों के लिए हर कदम जोखिमभरा हो और अपराध का हर प्रयास असफल।
नए वर्ष में तकनीक, टीमवर्क और मानवीय विवेक—तीनों के समन्वय से हम उत्तर प्रदेश पुलिस को और अधिक सक्षम, भरोसेमंद और भविष्य-सजग बनाएंगे। यही हमारा संकल्प हो, यही हमारी दिशा हो और यही हमारी पहचान बने।
आप सभी मेरे लिए केवल सहकर्मी नहीं, बल्कि मेरा गर्व हैं। भारत के सबसे बड़े पुलिस बल का नेतृत्व करने का सौभाग्य मुझे गर्व से भर देता है।
मेरी हार्दिक कामना है कि मेरे उत्तर प्रदेश पुलिस परिवार के लिए यह नया वर्ष आनंदमय, शांतिमय, सुखमय, आरोग्यमय और सर्वथा मंगलमय सिद्ध हो।
जय हिन्द।
(राजीव कृष्ण)
पुलिस महानिदेशक,
उत्तर प्रदेश

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