रीवा 22दिसम्बर 25*हिजाब को आतंकवादी पहनावा बताने वाले घूंघट को क्या कहेंगे : नारी चेतना मंच
नीतीश तत्काल माफी मांग लेते तो जगहसाई से बच जाते
कोई धर्म विशेष नहीं , पूरा देश आहत हुआ
रीवा 22 दिसंबर।बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के द्वारा एक महिला चिकित्सक नुसरत परवीन को नियुक्ति पत्र देते समय उनका हिजाब खींचकर नीचे किया जाना निश्चित रूप से अप्रिय अशोभनीय अमर्यादित आचरण है। इसे लेकर कई दिनों से पक्ष और विपक्ष में जिस तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं उनमें अधिकांश काफी उत्तेजक, भड़काऊ और आपत्तिजनक हैं। निश्चित रूप से उक्त महिला चिकित्सक पर्याप्त सुरक्षा जांच के बाद अपना नियुक्ति पत्र लेने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास पहुंची थी। ऐसी स्थिति में उसके हिजाब पहनावे को लेकर किसी तरह का गलत संदेह व्यक्त करना अत्यंत घटिया बात है। समता सम्पर्क अभियान एवं नारी चेतना मंच ने एक संयुक्त विज्ञप्ति में कहा है कि यह मामला नारी सम्मान और अस्मिता से जुड़ा हुआ है। इसे सांप्रदायिक चश्मे से देखना सरासर ग़लत है। डॉ नुसरत परवीन को नियुक्ति पत्र देते समय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के द्वारा अचानक उनके हिजाब को खींचकर नीचे किए जाने की घटना से सभ्य समाज का हतप्रभ होना स्वाभाविक है। यदि संबंधित डॉ महिला को अपने हाथ से हिजाब हटाने का मौका मिलता तो ऐसी अप्रिय वारदात देखने की नौबत नहीं आती। नीतीश कुमार तत्काल माफी मांग लेते तो जगहसाई से बच जाते। यह भारी विडंबना है कि इस मामले को लेकर भारतीय जनता पार्टी की मोदी और योगी सरकार के मंत्री भी अनाप-शनाप बयानबाजी करके सांप्रदायिक सद्भाव का माहौल बिगाड़ रहे हैं वहीं कुछ विपक्षी दलों के नेता भी इसे धर्म पर हमला बता रहे हैं। जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने तो इसे मुस्लिम महिला का अपमान बताया जबकि नीतीश कुमार की हरकत से कोई धर्म विशेष नहीं बल्कि पूरा देश आहत हुआ है।
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के मंत्री संजय निषाद ने तो अपनी घटिया सोच प्रगट करते हुए कहा- ‘नकाब छू दिया तो इतना हंगामा हो गया, कहीं और छू देते तब क्या होता? उनका यह बयान अश्लील कटाक्ष है जो बहुत आपत्तिजनक है। ऐसी ओछी मानसिकता वाले व्यक्ति को मंत्री पद से बर्खास्त किया जाना चाहिए। वहीं एआईएमआईएम (AIMIM) के नेता और पूर्व सांसद इम्तियाज जलील ने संजय निषाद के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है. यवतमाल में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए जलील ने कहा कि अगर संजय निषाद उनके सामने होते, तो वह उनका ‘एक हाथ तोड़कर दूसरे हाथ में दे देते. जो लोग हमारी महिलाओं की गरिमा का अपमान करते हैं, हम उनके हाथ तोड़ देंगे। इस तरह का भड़काऊ बयान देकर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की राजनीति करने वालों को मौका दिया जा रहा है जो देश हित में नहीं है।
बीजेपी के वरिष्ठ नेता हरिभूषण ठाकुर ने भी काफी भड़काऊ बयान दिया है। उन्होंने कहा कि हिजाब पर पूरे भारत में प्रतिबंध लगना चाहिए. सरकारी नौकरियों में तो इस पर बैन लगा ही सकते हैं, क्योंकि हिजाब से आतंकवाद पनपता है. आतंकी वारदात को अंजाम देने के बाद हिजाब पहनकर भाग जाते हैं. हिजाब के पीछे वे अपनी असल पहचान छिपाते हैं. जिस किसी को भी हिजाब पहनना है , वो पाकिस्तान चला जाए। इस तरह की बयान बाजी बेहद आपत्तिजनक है। आजकल सभी धर्म की लड़कियां मुंह में कपड़ा बांध रही हैं। किसी धर्म विशेष को निशाना साधकर दिया गया बयान सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने वाला है जिसकी जितनी निंदा की जाए कम है। किसी पहनावे को आतंकवाद और धर्म से जोड़ना बहुत ही निंदनीय है। भारत में लंबे समय से घूंघट प्रथा रही है। गांव में आज भी वह प्रथा खत्म नहीं हुई है लेकिन क्या हरिभूषण ठाकुर इसे भी हिजाब की तरह आतंकवादी पहनावा बता सकते हैं?
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का बचाव करते हुए कहा कि यह महिला पर निर्भर है कि वह सरकारी नौकरी को ठुकरा दे या ‘जहन्नुम में जाए.।’ उन्होंने ‘कुछ भी गलत नहीं किया’ है. उन्होंने नीतीश का बचाव करते हुए कहा, ‘अगर कोई नियुक्ति पत्र लेने जा रहा है, तो क्या उसे अपना चेहरा नहीं दिखाना चाहिए? लेकिन यहां सवाल यह है कि क्या नीतीश कुमार को यह हक बनता है कि किसी महिला के मुंह से हिजाब और घूंघट को मनमाने तरीके से हटा दें या किसी अन्य महिला के गले में माला डाल दें। हो सकता है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने जवानी के दिनों में रुख से जरा नकाब हटाओ मेरे हुजूर वाला गाना या घुंघट पर कोई गीत गाया या गुनगुनाया होगा लेकिन उन्हें लक्ष्मण रेखा पार नहीं करना चाहिए।

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