शहादत दिवस
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गाजीपुर18अगस्त24*18 अगस्त 1942 को तिरंगा फहराने पर शहीद हुए आठ क्रांतिकारी– याद करो कुर्बानी, उन बलिदानों की
गाजीपुर से युपी आज तक हिमांशु राय की रिपोर्ट………
गाजीपुर। 18 अगस्त 1942 का वह दिन याद आ जाता है, जब महात्मा गांधी के ‘अंग्रेजों भारत छोड़ो’ आंदोलन के आह्वान पर जिले के शेरपुर के आंदोलित आजादी के आठ दीवाने शहीद हो गए। वह मुहम्मदाबाद तहसील भवन पर झंडा फहराने के लिए परिसर में घुसने लगे । तहसीलदार ने गोली चलाने का आदेश दिया। आठ लोग शहीद हो गए फिर भी तहसील पर तिरंगा फहरा कर ही माने। शहीद होने वालों में डा. शिवपूजन, वंश नारायण राय, ऋषेश्वर राय, श्रीनारायण राय, वंश नारायण राय, राजा राय, वशिष्ठ नारायण राय, रामबदन उपाध्याय रहे। हर साल इस दिन शहीद स्तंभ पर शहादत दिवस मनाया जाता है। गांधीजी के आह्वान पर 14 अगस्त 1942 को शेरपुर के यमुना गिरी के नेतृत्व में युवा गौसपुर हवाई अड्डा पर पहुंचकर। उसमें आग लगा दिए। वहां सुरक्षा में तैनात अंग्रेज सिपाहियों ने हवाई फायरिंग शुरू कर दी। फायरिंग में यमुना गिरी घायल हो गए, जिन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। इस आंदोलन का असर इलाके में पूरी तरह से युवकों पर पड़ा। 18 अगस्त 1942 को शेरपुर के डा. शिवपूजन राय के नेतृत्व में युवकों का जत्था तहसील भवन पर झंडा फहराने के लिए चल दिया। युवकों के सीने में यमुना गिरी का बदला लेने की आग धधक रही थी। युवक यमुना गिरी का बदला लेने आदि नारा लगाते हुए चल रहे थे। आंदोलनकारी युवा बड़की बारी गांव के पास एकत्रित हुए। वहां से निहत्थे तिरंगा लेकर तहसील पर पहुंचकर तहसील भवन पर झंडा फहराने के लिए चढ़ने लगे। अंग्रेजी सरकार के गुलाम तहसीलदार ने उन्हें झंडा फहराने से रोका। युवकों के न मानने पर उन पर गोली चलाने का आदेश दिया।

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