March 4, 2026

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कौशाम्बी15सितम्बर25*बाल सेवा योजना के नाम पर अनाथ बच्चों के साथ योगी सरकार का भद्दा मजाक*

कौशाम्बी15सितम्बर25*बाल सेवा योजना के नाम पर अनाथ बच्चों के साथ योगी सरकार का भद्दा मजाक*

कौशाम्बी15सितम्बर25*बाल सेवा योजना के नाम पर अनाथ बच्चों के साथ योगी सरकार का भद्दा मजाक*

*माता पिता की मौत के बाद छोटे-छोटे अनाथ बच्चे योजना के लाभ की लालच में सरकारी कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं*

*आवेदन के लिए वेबसाइट खोल दी जाए या फिर बाल सेवा योजना से छोटे-छोटे अनाथ बच्चों को लाभान्वित करने की योजना को बंद करने की घोषणा कर दी जाए*

*कौशांबी।* जिन बच्चों के माता-पिता की मौत हो चुकी है बच्चे अनाथ हो चुके हैं उनके साथ योगी सरकार किस तरह से भद्दा मजाक कर रही है माता-पिता की मौत के बाद अनाथ बच्चों को बल सेवा योजना के तहत लाभान्वित करने की घोषणा सरकार द्वारा की गई लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद बाल सेवा योजना की वेबसाइट नहीं खुली अनाथ बच्चों का आवेदन कैसे होगा उन्हें योजना का लाभ कैसे मिलेगा ऑफलाइन आवेदन अधिकारी नहीं लेते सीएम की योजना पर शासन के अधिकारी चपत लग रहे हैं अनाथ बच्चों को लाभान्वित करने की इस योजना की घोषणा करने के बाद जब आवेदन ही नहीं जमा हो रहा तो जिन बच्चों के माता-पिता की मौत हो चुकी है उनको योजना का लाभ कैसे मिलेगा यह पूरी व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा है लेकिन कोई भी समस्या का समाधान करने के लिए तैयार नहीं दिखाई पड़ रहा है छोटे-छोटे अनाथ बच्चे योजना के लाभ की लालच में सरकारी कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं एक तरफ उनके माता-पिता दोनों लोगों की मौत हो गई है बच्चे अनाथ हो गए उनके पास 2 जून रोटी खाने का जुगाड़ नहीं है और योगी सरकार की योजना के लाभ के लिए वह कार्यों का चक्कर काट रहे हैं यह स्थिति केवल कौशांबी की नहीं है यह स्थिति पूरे प्रदेश की हो चुकी है जिससे अफसर नेताओं की मनसा का अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस तरह से कोरी बकवास करके आम जनता को गुमराह कर रहे हैं जिन छोटे-छोटे बच्चों के माता-पिता की मौत हो गई है योजना की वेबसाइट बंद करने के बाद भी उन्हें योजना का लालच देकर सरकारी कार्यालय दौड़ाया जा रहा है छोटे-छोटे अनाथ हो चुके बच्चों के साथ यह कैसा मजाक सरकार कर रही है या तो बाल सेवा योजना के आवेदन के लिए वेबसाइट खोल दी जाए या फिर बाल सेवा योजना से छोटे-छोटे अनाथ बच्चों को लाभान्वित करने की योजना को बंद करने की घोषणा कर दी जाए।

माता-पिता की मौत होने के बाद छोटा-छोटा अनाथ बच्चों को बाल सेवा योजना के तहत लाभान्वित करने की योजना केवल नेताओं के मंच माइक तक सीमित रह गई है वर्षों बीत जाने के बाद योजना के तहत आवेदन करने के लिए वेबसाइट नहीं खोली गई है फॉर्म भरकर जब छोटे-छोटे अनाथ बच्चे कार्यालय जमा करने जाते हैं तो कार्यालय के कर्मचारी और अधिकारियों द्वारा बाल सेवा योजना के आवेदन नहीं लिया जा रहा है लेकिन उसके बाद भी अनाथ बच्चों की मदद का ढिंढोरा पीटा जा रहा है माता-पिता की मौत होने के बाद अनाथ हो चुके छोटे-छोटे बच्चों के जीवन के साथ यह कैसा मजाक है प्रचार प्रसार के नाम पर इस तरह सड़क से लेकर कार्यालय में बड़े-बड़े बोर्ड लगा करके लोगों को गुमराह किया जा रहा है जबकि योजना में आवेदन करने के लिए वेबसाइट बंद है वर्षों से आवेदन नहीं हो रहा है तो फिर योजना का प्रचार प्रसार का उद्देश्य क्या रह गया है सरकार की इस योजना ने पूरी व्यवस्था पर सवाल कर दिया है जो चर्चा का विषय बना हुआ है।

 

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