कौशाम्बी04अप्रैल*आधी रात को दो महिलाओं को घर से उठा लाई पुलिस*
*महिला आयोग मानवाधिकार आयोग सुप्रीम कोर्ट पुलिस कानून की धज्जियां उड़ाने वाले*
*महेवाघाट थानेदार को कानून का पाठ नहीं पढ़ा सके पुलिस आला अधिकारी*
*कौशांबी* शाम को सूरज ढलने के बाद महिलाओं की गिरफ्तारी पर सुप्रीम कोर्ट ने भी रोक लगाई है मानवाधिकार आयोग ने भी आधी रात को महिलाओं की गिरफ्तारी पर पूरी तरह से रोक लगाने के निर्देश दिए हैं आधी रात को महिलाओं की गिरफ्तारी करने के मामले में महिला आयोग ने भी कड़े रुख अख्तियार किए हैं पुलिस मैनुअल में भी आधी रात को महिलाओं की गिरफ्तारी पर रोक लगाई गई है मीटिंग और कार्यक्रम के माध्यम से महिलाओं की गिरफ्तारी के मामले में बार-बार पुलिस अधिकारी कानून का पाठ पढ़ाने की बात कर रहे हैं एक तरफ उत्तर प्रदेश की योगी सरकार महिलाओं के सुरक्षा को लेकर तमाम कानून नियम निर्देश अधिकारियों को भेज रहे हैं आए दिन जिला प्रोबेशन कार्यालय द्वारा महिलाओं की सुरक्षा और उनकी जागरूकता को लेकर कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं महिलाओं की सुरक्षा और जागरुकता को लेकर कार्यक्रमों के शुरुआत में आला अधिकारी फोटो खिंचवा कर महिला कार्यक्रमों का शुभारंभ कर रहे हैं
महिला सहायता केंद्र भी स्थापित किए गए हैं लेकिन उसके बाद भी जिले की महिलाओं को उनका अधिकार और सम्मान नहीं मिल रहा है महिलाएं सुरक्षित नहीं है महिलाओं को सुरक्षित करने की बात करने वाले अधिकारी उनके अधिकारों के प्रति गंभीर नहीं दिखाई पड़ रहे हैं जनता की सुरक्षा करने का जिसे जिम्मा मिला है वही कानून की धज्जियां उड़ाने पर लगा हुआ है आखिर कैसे जमीनी हकीकत में महिला कानून का पालन होगा संविधान की शपथ लेकर कानून की रक्षा का वचन देकर वर्दी पहनने वाले थानेदार जब कानून की धज्जियां उड़ा देंगे और कानून की धज्जियां उड़ाने वालों पर कार्यवाही करने में जांच के नाम पर मामले को लटकाया जाएगा तो कैसे कानून का राज स्थापित होगा यह व्यवस्था पर बड़ा सवाल है
महेवाघाट थानेदार सशस्त्र पुलिस जवानों और उप निरीक्षकों के साथ बीती रात थाना क्षेत्र के दलेला गंज मवई गांव पहुंचे और आधी रात को गांव से सिया दुलारी और रानी देवी दो महिलाओं को महेवाघाट की पुलिस जबरिया अपने साथ उठा लाई आधी रात को पुलिस टीम के साथ महिला पुलिसकर्मी भी मौजूद नहीं थी कानून की बात करने वाली थाना पुलिस किस तरह के कानून की धज्जियां उड़ाते हैं इसको देखने वाले पुलिस अधिकारी पुलिस कर्मियों की गलतियों को नजरअंदाज करते हैं मामले की शिकायत महिलाओं के परिजनों ने सोमवार की दोपहर पुलिस अधीक्षक से की लेकिन उसके बाद भी महिलाओं को थानेदार ने अपने हिरासत से नहीं छोड़ा है महिलाओं के विरुद्ध किसी प्रकार का मुकदमा नहीं दर्ज है उनके खिलाफ थानेदार को किसी ने शिकायती पत्र भी नहीं दिया है लेकिन फिर भी दो महिलाओं को आधी रात को कानून नियम की धज्जियां उड़ा कर उठा ले जाने वाले थानेदार पर खबर लिखे जाने तक कार्यवाही नहीं हो सकी है क्या यही योगीराज की कानून व्यवस्था है

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