कौशाम्बी 24/11/25*धान खरीद केदो में दो दशक से व्यापारी बिचौलिए हॉबी किसान परेशान*
*केंद्र प्रभारियों ने धान और गेहूं खरीद में हेरा फेरी करके अकूत संपत्ति अर्जित की है*
*किसानों के धान तौल का समय निर्धारित बिचौलियों की आधी रात तक होती है तौल*
*कौशांबी* अफसर के तमाम प्रयास के बाद भी धान खरीद केदो में बिचौलिए और व्यापारियों की दखलअंदाजी खत्म नहीं हो रही है किसानों के धान समय से तौल ना होने पर उनके सामने जब समस्याएं आती है तो इसका लाभ सीधा व्यापारी और बिचौलिया उठाते हैं कम दामों पर किसानों का धान खरीद करके उन्हीं किसानों की खतौनी लेकर के धान खरीद केंद्र में बेच करके बीच का कमीशन खा जाते हैं इस सब ड्रामा करने के पीछे विपणन निरीक्षक और जिला वितरण अधिकारी की संलिप्तता उजागर हो रही है यदि किसानों की तौल समय से हो जाए उन्हें समय पर उनकी उपज का भुगतान मिल जाए उनकी जरूरत पर उन्हें रुपए मिल जाए उनकी जरूरत पूरी हो जाए तो किसान कम दामों पर बिचौलिए और व्यापारियों को अपनी उपज नहीं बेचेगे लेकिन किसानों की उपज सही समय पर तौल नहीं होती है सही समय पर उनको भुगतान नहीं मिलता है जिससे किसान मजबूर हो जाते हैं और किसानों की मजबूरी का फायदा धान खरीद केंद्र प्रभारी से साठगांठ करने के बाद खुलेआम बिचौलिया व्यापारी उठा रहे हैं बिचौलिया और व्यापारियों का धान खरीद केंद्र में दखलंदाजी नई बात नहीं है बीते 20 वर्षों से बिचौलिए व्यापारी हॉबी है वही चिन्हित कुछ दर्जन बिचौलिए पूरी धान खरीद केंद्र की व्यवस्था को चौपट कर मालामाल होते हैं देखते-देखते 20 साल के बीच में बिचौलिए कई करोड़ की कमाई कर चुके हैं और अफसर बिचौलियों को चिन्हित नहीं कर सके जिससे व्यवस्था में विपणन निरीक्षक और जिला विपणन अधिकारी की संलिप्तता से इनकार करना एकदम बेमानी होगी किसानों के लिए तौल का समय निर्धारित है लेकिन दलाल और बिचौलियों की उपज के तौल का समय नहीं निर्धारित है आधी रात तक बिचौलियों के धान की तौल होती है
नवीन मंडी स्थल ओसा में खुले धान खरीद केंद्र में विपणन निरीक्षक की संलिप्तता से खुलेआम बिचौलिए व्यापारी पूरे समय खरीद केंद्र और उसके अगल-बगल दिखाई पड़ते हैं बिचौलियों पर रोक न लगने के बाद जिला वितरण अधिकारी की भी मिलीभगत से मंडी में दलालों का जमावड़ा लगने की बात से इनकार नहीं किया जा सकता किसान मंडी में धान लाते हैं लेकिन किसानों की धान खरीद तौल नही हो पा रही हैं क्योंकि मंडी परिसर में जितने दलाल लगे हुए हैं जो अधिकारियों को चाय नाश्ता करवाते हैं बीते 20 सालों से धान खरीद केंद्र में अपना वर्चस्व बना चुके यह बिचौलिए और व्यापारी खरीद केंद्र प्रभारी की जेब भी गर्म करते हैं पेट्रोल का खर्चा देते हैं केंद्र प्रभारी की हर सुविधाओं को यह पूरा करते हैं जिससे व्यापारियों का धान सबसे पहले तौल कराया जाता है 2 दिन पहले जो धान खरीद केंद्र पर उतारा गया है 24 घंटे पहले जो धान उतारा गया है बिचौलिए और व्यापारियों का वह धान पहले तौल होता है किसान लवकुश त्रिपाठी का कहना है 13 नवम्बर से मंडी परिसर में अपना धान रख के यहीं पड़े रहते हैं ठंडी में शरीर कॉप जाती है किसानों के रुकने के लिए संसाधन नहीं बनाए गए हैं लेकिन 12 दिन बीत जाने के बाद उनका धान तौल नहीं कराया जा रहा केंद्र प्रभारी ने आजकल आजकल करते-करते किसान के धान की तौल 12 दिन बीत जाने के बाद नहीं हुई है लेकिन केंद्र प्रभारी दलाल और बिचौलिया की चर्चा करने पर भड़क जाते हैं व्यापारियों का सबसे पहले धान की तौल होती है 41 किलो 200 ग्राम बोरी में धान भरा जाता है किसानों के साथ वजन में भी केंद्र में लूट हो रही है और अफसर मौन बने हैं इसके बावजूद किसानों के धान में रिकवरी के नाम पर धान अलग से काटा जाता है किसानों का तरह-तरह से केंद्र में शोषण होता है जिससे किसान मजबूर है जबकि यह व्यवस्था दलाल और बिचौलिया पर नहीं होती है केंद्र प्रभारियों की जेब गर्म करने के बाद उनके लिए नियम कायदे अलग हैं केंद्र प्रभारियों ने धान और गेहूं खरीद में हेरा फेरी करके अकूत संपत्ति अर्जित की है यदि भ्रष्टाचार निवारण संगठन से उनकी अकूत संपत्ति की जांच हुई तो केदो में व्याप्त भ्रष्टाचार भी उजागर होगा लेकिन शासन प्रशासन इनकी अकूत संपत्ति की जांच करने को तैयार नहीं दिखाई पड़ रहा है

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